News Nation Logo

तमिलनाडु : कोविड का बहाना ना हो, SC ने 9 जिलों में निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया

पीठ ने कहा कि 2018 से 19 में स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त हो गया था और तब से कोई नया निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है. पीठ ने चेतावनी दी कि अगर अदालत के आदेश का पालन नहीं किया गया तो चुनाव आयोग को अवमानना की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

News Nation Bureau | Edited By : Ravindra Singh | Updated on: 22 Jun 2021, 03:48:27 PM
supreme court

सुप्रीम कोर्ट (Photo Credit: फाइल)

नयी दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु राज्य चुनाव आयोग को 15 सितंबर तक नौ जिलों में स्थानीय निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया है. जस्टिस हेमंत गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने 11 दिसंबर, 2019 को शीर्ष अदालत द्वारा पारित आदेश को ध्यान में रखते हुए कहा कि चार महीने के बजाय, जो चुनाव कराने के लिए दिए गए थे, पोल पैनल ने 18 महीने का समय लिया है. पीठ ने कहा कि 2018 से 19 में स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त हो गया था और तब से कोई नया निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है. पीठ ने चेतावनी दी कि अगर अदालत के आदेश का पालन नहीं किया गया तो चुनाव आयोग को अवमानना की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

शीर्ष अदालत ने कहा कि स्थानीय निकायों के चुनाव के लिए राज्य चुनाव आयोग को अधिसूचना जारी करनी होगी और 15 सितंबर तक नतीजे घोषित करने होंगे. वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एस. भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) का प्रतिनिधित्व करते हुए नरसिम्हा ने पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया कि 2019 में पारित आदेश को लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि विधानसभा चुनाव को प्राथमिकता दी गई थी और बाद में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव था.

नरसिम्हा ने कहा कि राज्य में कोविड के मामले अधिक हैं और अदालत से इन नौ जिलों में चुनाव कराने के लिए कुछ और समय देने का आग्रह किया. पीठ ने कहा, इन दिनों आम तौर पर हर दूसरे मामले में कोविड को बहाने के तौर पर पेश किया जाता है और राजनीतिक दल जब चाहें तब चुनाव करा सकते हैं. शीर्ष अदालत ने 11 दिसंबर, 2019 को तमिलनाडु सरकार और राज्य चुनाव आयोग को आगामी स्थानीय निकाय चुनाव 1991 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर कराने का निर्देश दिया था.

डीएमके ने 7 दिसंबर, 2019 को राज्य चुनाव पैनल द्वारा जारी अधिसूचना को रद्द करने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था. डीएमके ने आरोप लगाया था कि स्थानीय निकाय चुनाव के लिए, राज्य चुनाव पैनल ने महिलाओं के लिए कोटा प्रदान नहीं किया और 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार इस उद्देश्य के लिए 1991 की जनगणना का उपयोग कर रहे थे.

First Published : 22 Jun 2021, 03:48:27 PM

For all the Latest India News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.