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17 महीने बाद 1 सितंबर से फिजिकल रूप से सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वर्चुअल सुनवाई के विकल्प के साथ-साथ मामलों की फिजिकल सुनवाई 1 सितंबर से शुरू करने के लिए एसओपी अधिसूचित किया है.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 30 Aug 2021, 11:38:09 AM
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कोरोना संक्रमण की वजह से फिलहाल तक बंद थी फिजिकल सुनवाई. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • प्रति पार्टी एक पंजीकृत क्लर्क, काउंसेल्स की पेपर बुक्स/जर्नल को प्रवेश की अनुमति
  • फिजिकल सुनवाई का विकल्प चुनने के बाद नहीं होगी वीडियो-टेली कांफ्रेंसिंग सुनवाई
  • एक एओआर (या उसके नामित), एक बहस करने वाले वकील और प्रति पक्ष एक कनिष्ठ वकील को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वर्चुअल सुनवाई के विकल्प के साथ-साथ मामलों की फिजिकल सुनवाई 1 सितंबर से शुरू करने के लिए एसओपी अधिसूचित किया है. एक शीर्ष अदालत के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार फिजिकल सुनवाई को धीरे-धीरे फिर से शुरू करने की दृष्टि से, अंतिम सुनवाई या गैर-विविध दिनों पर सूचीबद्ध नियमित मामलों को फिजिकल मोड (हाइब्रिड विकल्प के साथ) में सुना जा सकता है. अधिकारी ने कहा कि मामले में पक्षों की संख्या के साथ-साथ कोर्ट रूम की सीमित क्षमता को देखते हुए संबंधित बेंच निर्णय ले सकती है. एक बार फिजिकल मोड के माध्यम से सुनवाई एओआर या पीटीशनर-इन-पर्सन द्वारा चुने जाने के बाद, संबंधित पार्टी को वीडियो/टेली-कांफ्रेंसिंग मोड के माध्यम से सुनवाई की सुविधा नहीं होगी.

शीर्ष अदालत के पोर्टल पर बतानी होगी प्राथिमकता
शीर्ष अदालत के महासचिव ने एसओपी में कहा, 'आगे किसी भी अन्य मामले को ऐसे दिनों में फिजिकल मोड में सुना जा सकता है, यदि माननीय पीठ इसी तरह निर्देश देती है. विविध दिनों पर सूचीबद्ध अन्य सभी मामलों को वीडियो/टेलीकांफ्रेंसिंग मोड के माध्यम से सुना जाना जारी रहेगा.' एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) को शीर्ष अदालत के पोर्टल पर खुद को पंजीकृत करने और 24 घंटे/1.00 बजे के भीतर फिजिकल मोड या वीडियो/टेलीकांफ्रेंसिंग मोड के माध्यम से संबंधित अदालत के समक्ष पेश होने के लिए अपनी प्राथमिकताएं जमा करने की आवश्यकता होती है.

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इतने लोगों को होगी अनुमति
एसओपी के अनुसार, 'फिजिकल सुनवाई (हाइब्रिड विकल्प के साथ) के लिए सूचीबद्ध मामले में एक एओआर (या उसके नामित), एक बहस करने वाले वकील और प्रति पक्ष एक कनिष्ठ वकील को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी. प्रति पार्टी एक पंजीकृत क्लर्क, काउंसेल्स की पेपर बुक्स/जर्नल आदि को कोर्ट रूम तक ले जाने के लिए प्रवेश की अनुमति दी जाएगी.' एसओपी ने आगे कहा कि एक बार फिजिकल मोड के माध्यम से सुनवाई एओआर या पीटीशनर-इन-पर्सन द्वारा चुने जाने के बाद, संबंधित पार्टी को वीडियो/टेली-कांफ्रेंसिंग मोड के माध्यम से सुनवाई की सुविधा नहीं होगी.

First Published : 30 Aug 2021, 09:47:55 AM

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