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पश्चिम बंगाल: डॉक्टरों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मामले पर तुरंत सुनवाई की जरूरत नहीं

सुप्रीम कोर्ट में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर एक याचिका दाखिल की गई थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा

Arvind Singh | Edited By : Aditi Sharma | Updated on: 18 Jun 2019, 11:52:43 AM

नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टर के साथ हुई मारपीट के बाद शुरू हुआ बवाल अब शांत हो गया है. इस मामले में सोमवार को डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की और अपनी मांगे उनके सामने रखी. ममता बनर्जी ने डॉक्टरों की मांगे मान ली है जिसके बाद अब डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल खत्म दी है. वहीं दूसरी तरफ इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई भी टल गई है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर एक याचिका दाखिल की गई थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई होने वाली थी. लेकिन अब कोर्ट का कहना है कि इस मामले पर तुरंत सुनवाई की ज़रूरत नहीं है. अब मामला ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नियमित बेंच के सामने लगेगा.

इसी के साथ कोर्ट ने फिलहाल कोई आदेश पास करने से इंकार करते हुए कहा कि वो डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए ऐसे ही आदेश पास नहीं कर सकता. पुलिस कर्मियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए पूरी स्थिति को समझकर ही कोई आदेश पास किया जा सकता है. कोर्ट ने कहा, 'हम कानून व्यवस्था की कीमत पर डॉक्टरों की सुरक्षा का फैसला नहीं ले सकते.'

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बता दें, वकील अलख आलोक श्रीवास्तव की तरफ से दायर की गई डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सादा वर्दी में सुरक्षाकर्मी तैनात किये जाने की मांग की गई थी. इसके साथ ही इस याचिका में कोर्ट से मांग की गई थी कि वो ममता सरकार को आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए कहें. याचिका में यह सभी मांगे NRS मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की पिटाई का हवाला देते हुए की गई थी.

ये याचिका उस समय दाखिल की गई थी जब पूरे देश में डॉक्टरों की हड़ताल चरम पर थी, लेकिन अब जब बैठक के बाद ममता बनर्जी ने डॉक्टरों की मांगे मान ली हैं, तो कोर्ट ने मामले में सुनवाई को फिलहाल टालने का फैसला लिया है.

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ममता बनर्जी ने मांनी डॉक्टरों की ये मांगे

  बता दें, बंगाल में हिंसा के बाद हड़ताल पर गए डॉक्टरों के आगे ममता सरकार ने घुटने टेक दिए और उनकी मांगों को मान लिया है. इसके मुताबिक सरकारी अस्पतालों में निजी सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे और हर एक मरीज के साथ ज्यादा से ज्यादा 2 तीमारदार ही रुक सकेंगे. बैठक के बाद इस बातचीत से डॉक्टरों के प्रतिनिधि संतुष्ट दिखाई दे रहे थे. डॉक्टरों के संयुक्त मोर्चा के एक प्रवक्ता ने संवाददाताओं से यहां कहा कि डॉक्टर काम पर लौटेंगे क्योंकि वह राज्य सरकार को वादे लागू करने के लिए कुछ समय देना चाहते हैं.

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नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शासकीय निकाय की बैठक के बाद उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री के साथ हमारी मुलाकात और चर्चा सफल रही. हर चीज पर विचार करते हुए हमें उम्मीद है कि सरकार चर्चा के मुताबिक मुद्दे का समाधान करेगी.’

डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में यह तय किया गया कि अब हर सरकारी अस्पताल में ेक नोडल पुलिस ऑफीसर की तैनाती भी की जाएगी इसके अलावा डॉक्टरों की मांग पर सरकारी अस्पतालों में एक शिकायत निवारण का सेल बनाने का निर्णय भी लिया गया है. आपको बता दें कि इस बैठक में ममता बनर्जी के साथ पश्चिम बंगाल के हर मेडिकल कॉलेज से दो प्रतिनिधि शामिल हुए हैं.

First Published : 18 Jun 2019, 09:03:44 AM

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