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CAA पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा - केंद्र को सुने बिना कोई आदेश पारित नहीं करेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून पर फिलहाल कोई रोक लगाने से इनकार कर दिया है. बुधवार को नागरिकता कानून को लेकर दायर 140 याचिकाओं की सुनवाई करते सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम बिना सभी को सुने कोई आदेश पारित नहीं करेंगे.

News Nation Bureau | Edited By : Sunil Mishra | Updated on: 22 Jan 2020, 01:10:08 PM
CAA पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

CAA पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार (Photo Credit: File Photo)

नई दिल्‍ली :

सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून पर फिलहाल कोई रोक लगाने से इनकार कर दिया है. बुधवार को नागरिकता कानून को लेकर दायर 140 याचिकाओं की सुनवाई करते सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम बिना सभी को सुने कोई आदेश पारित नहीं करेंगे. सुनवाई शुरू होते ही नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दलीलें पेश करते हुए कपिल सिब्‍बल ने कोर्ट से गुजारिश की कि जब तक नागरिकता कानून पर कोर्ट कोई अंतिम निर्णय निर्देश नहीं देता, NPR प्रकिया को तीन महीने के लिए टाल दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरन कहा कि याचिकाओं की कॉपी केंद्र को सौंपी जांए और उन्हें जवाब देने दें. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जवाब देने के लिए 4 हफ्तों का समय दिया दे दिया. इसके बाद बाद 5वें हफ्ते में फिर इस पर सुनवाई की जाएगी.

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सुनवाई शुरू होने से पहले अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुनवाई के लिए CJI की अदालत में भीड़ के बारे में शिकायत की. उन्होंने कहा, कोर्ट का माहौल शांतिपूर्ण और शांत होना है, खासकर सुप्रीम कोर्ट में'. अटॉर्नी जनरल ने कहा - 140 याचिकाएं दायर हई हैं. उनमें से जो 60 के करीब याचिकाएं हमे मिली हैं, उन पर हम शुरुआती जवाब दाखिल कर रहे हैं, बाकी याचिकाएं हमे अभी नहीं मिली है.

सिब्बल और सिंघवी का कहना है कि प्रकिया पर फिलहाल रोक लगा देनी चाहिए, क्योंकि इसके तहत नागरिकता मिलने के बाद वापस नागरिकता लेना मुश्किल हो जाएगा. AG ने कहा- विशेष परिस्थितियों में नागरिकता दिये जाने के बाद वापस भी ली जा सकती है. इसके बाद जस्टिस बोबड़े ने संकेत दिए कि मामला आगे विचार के लिए संविधान पीठ को सौंपा जा सकता है.

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सीनियर वकील विकास सिंह ने कहा कि अंतरिम रोक लगनी ज़रूरी है, अन्यथा असम की डेमोग्राफी ही बदल जाएगी. आधे से ज़्यादा वहां शरणार्थी बंगाली हिंदू हैं.
CJI ने साफ किया कि बिना केंद्र सरकार को सुने हम अभी कोई आदेश पास नहीं करने जा रहे. यानी स्टे का आदेश नहीं दे रहे. उन्होंने कहा - सभी याचिकाओं की कॉपी केंद्र सरकार को मिलनी चाहिए.

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, केंद्र ने प्रारंभिक हलफनामा तैयार किया है, जो आज दायर किया जाएगा. एएम सिंघवी ने कहा, यूपी ने प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह अपरिवर्तनीय है क्योंकि एक बार नागरिकता प्रदान करने के बाद इसे वापस नहीं लिया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद इस मामले को बड़ी बेंच को सौंप दिया. इस मामले को लेकर संवैधानिक पीठ का गठन किया जाएगा. इस बीच चीफ जस्टिस ने वकीलों से असम और नॉर्थ ईस्ट के लोगों की ओर से दाखिल याचिकाओं पर आंकड़ा मांगा है. कोर्ट का कहना है कि असम का मसला अलग भी किया जा सकता है. कोई ने कहा- असम और त्रिपुरा के लिए अलग से सुनवाई की जाएगी.

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AG ने जवाब दाखिल करने के लिए 6 हफ्ते का वक्त मांगा. हालांकि याचिकाकर्ताओं ने इसका विरोध किया. उन्होंने कहा- तेजी से सुनवाई की ज़रूरत है. इसको लेकर अलग सुनवाई भी की जा सकती है. कोर्ट ने पूछा है कि असम के मसले पर सरकार कबतक जवाब देगी?

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जवाब देने के लिए 4 हफ्तों का समय दिया दे दिया. इसके बाद बाद 5वें हफ्ते में फिर इस पर सुनवाई की जाएगी.

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First Published : 22 Jan 2020, 11:19:14 AM