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उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, चार धाम यात्रा तीर्थयात्रियों पर निर्भर, रोक ठीक नहीं

उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, चार धाम यात्रा तीर्थयात्रियों पर निर्भर, रोक ठीक नहीं

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 07 Jul 2021, 06:14:58 AM
Supreme Court

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

नई दिल्ली: उत्तराखंड सरकार ने चार धाम यात्रा पर रोक लगाने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

उत्तराखंड सरकार ने राज्य हाईकोर्ट के 28 जून के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें स्थानीय तीर्थयात्रियों को एक जुलाई को चार धाम यात्रा में भाग लेने की अनुमति देने के उसके 25 जून के फैसले पर रोक लगा दी गई थी।

छह जुलाई को दायर अपील में, राज्य सरकार ने दलील दी है कि उच्च न्यायालय ने इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया है कि चार धाम स्थलों के आसपास रहने वाली आबादी के महत्वपूर्ण हिस्से की आजीविका इसी यात्रा पर निर्भर करती है।

सरकार ने अपनी दलील में कहा कि वहां के लोगों का रोजगार चार धाम यात्रा पर ही टिका है। उत्तराखंड सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि चार धाम यात्रा से वहां के लोगों को रोजगार मिलता है, जो उनकी कमाई का एकमात्र साधन है। इन इलाकों में लोग छह महीने बेरोजगार जैसे रहते हैं। सरकार ने कहा कि स्थानीय लोगों को काम करने का मौका सिर्फ चार धाम यात्रा के दौरान ही मिलता है, इसलिए अगर यात्रा रद्द कर दी गई तो वहां के लोगों को आर्थिक तंगी होगी।

राज्य सरकार ने यह देखते हुए कि चार धाम समुद्र तल से लगभग 12,000 से 14,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं और सर्दियों में मौसम शून्य से 5 और शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच गिर जाता है, अपनी याचिका में कहा, कठोर जलवायु के कारण चार धाम यात्रा के दौरान आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की आजीविका काफी हद तक यात्रा के दौरान पर्यटन और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से होने वाली कमाई पर निर्भर है।

याचिका में कहा गया है कि वैष्णो देवी, बनारस में काशी विश्वनाथ, वृंदावन या अन्य दक्षिण भारतीय मंदिर जैसे अन्य धार्मिक हिंदू मंदिरों के विपरीत, चार धाम तक जलवायु के कारण पहुंच केवल 6 महीने की अवधि के लिए ही रहती है।

दलील दी गई है कि इसी कारण यहां से सटे गांवों के लोगों को 6 महीने तक बिना किसी कमाई के बिताने पड़ जाएंगे।

कोरोना के खतरे को दरकिनार करते हुए राज्य सरकार ने कहा है कि इन इलाकों में कोरोना पॉजिटिविटी रेट बहुत कम है। इसने कहा है कि 15 जून, 2021 से 2 जुलाई, 2021 तक चमोली जिले में पॉजिटिविटी दर 0.64 प्रतिशत और रुद्रप्रयाग जिले में 1.16 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट को चार धाम यात्रा बहाल करने की इजाजत देनी चाहिए।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वैज्ञानिक समुदाय द्वारा भविष्यवाणी की गई तीसरी लहर के संभावित खतरे की ओर इशारा किया था, जिसमें सबसे अधिक पीड़ित बच्चों होंगे, ऐसे आसार हैं। इसने कहा था कि एक बच्चे का नुकसान न केवल माता-पिता के लिए बल्कि पूरे देश के लिए दर्दनाक है। उच्च न्यायालय ने एक आदेश पारित करते हुए कहा, यह जनता के हित में है कि 25 जून के कैबिनेट के फैसले के संचालन पर रोक लगा दी जाए और सरकार को तीर्थयात्रियों को चार धाम यात्रा मंदिरों तक पहुंचने की अनुमति न देने का निर्देश दिया जाए।

राज्य सरकार ने चार धाम यात्रा के पहले चरण के लिए 26 जून को विस्तृत एसओपी जारी किए थे। अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल और उपायों के अलावा, एसओपी ने प्रत्येक धाम के लिए तीर्थयात्रियों की एक निश्चित संख्या के लिए भी प्रदान किया था। इसके अनुसार, बद्रीनाथ प्रति दिन अधिकतम 600 तीर्थयात्री; केदारनाथ प्रतिदिन अधिकतम 400 तीर्थयात्री; गंगोत्री प्रति दिन अधिकतम 300 तीर्थयात्री और यमनोत्री प्रति दिन अधिकतम 200 तीर्थयात्री शामिल हो सकते हैं।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 07 Jul 2021, 06:14:58 AM

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