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जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने को लेकर BJP नेता ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. इस पत्र के माध्यम से उन्होंने पीएम मोदी को लिखा है कि संसद का वर्तमान सत्र 14 सिंतबर से शुरू होने वाला है.

News Nation Bureau | Edited By : Deepak Pandey | Updated on: 01 Sep 2020, 09:17:34 PM
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सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय (Photo Credit: न्यूज नेशन ब्यूरो )

नई दिल्‍ली:

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय (Ashwini Upadhyay)  ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने जनसंख्या नियंत्रण पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका भी डाली है. अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है. गृह और कानून मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करना है. सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस मामले में फैसला दे सकता है.

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय (Ashwini Upadhyay) ने इस पत्र के माध्यम से पीएम मोदी को लिखा है कि संसद का वर्तमान सत्र 14 सिंतबर से शुरू होने वाला है और इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान अटल जी द्वारा बनाए गए 11 सदस्यीय संविधान समीक्षा आयोग (वेंकटचलैया आयोग) पर आकृष्ट करना चाहता हूं. अटल जी द्वारा 20 फरवरी 2000 को बनाया गया संविधान समीक्षा आयोग भारत ही नहीं बल्कि विश्व का सबसे प्रतिष्ठित आयोग है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस वेंकटचलैया इसके अध्यक्ष थे तथा सुप्रीम कोर्ट के ही तीन सेवानिवृत्त जज- जस्टिस सरकारिया, जस्टिस जीवन रेड्डी और जस्टिस पुन्नैया इसके सदस्य थे.

भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और संविधान विशेषज्ञ केशव परासरन तथा सोली सोराब और लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप इसके सदस्य थे. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष संगमा इसके सदस्य थे. सांसद सुमित्रा भी इस आयोग की सदस्य थी. वरिष्ठ पत्रकार सीआर ईरानी और अमेरिका में भारत के राजदूत रहे वरिष्ट नौकरशाह आबिद हुसैन इसके सदस्य थे. वेंकटचलैया आयोग ने 2 वर्ष तक सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत विचार-विमर्श के बाद 31 मार्च 2002 को अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपा था. इसी आयोग की सिफारिश पर मनरेगा, राइट टू एजुकेशन, राइट टू इनफार्मेशन और राइट टू फूड जैसे महत्वपूर्ण कानून बनाए गए, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण कानून पर संसद में चर्चा भी नहीं हुई.

आयोग ने देशव्यापी विस्तृत विचार-विमर्श के बाद संविधान में आर्टिकल 47A जोड़ने और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने का सुझाव दिया था, जिसे आज तक लागू नहीं किया गया. अब तक 125 बार संविधान संशोधन हो चुका है, 5 बार सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी बदला जा चुका है, सैकड़ों नए कानून बनाए गए, लेकिन देश के लिए सबसे ज्यादा जरूरी जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बनाया गया, जबकि ‘हम दो-हमारे दो’ कानून से भारत की 50% समस्याओं का समाधान हो जाएगा. वेंकटचलैया आयोग ने मौलिक कर्तव्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया था, जिसे आजतक लागू नहीं किया गया. आयोग द्वारा चुनाव सुधार प्रशासनिक सुधार और न्यायिक सुधार के लिए दिए गए सुझाव भी आजतक लंबित हैं.

देश की 50% समस्याओं का मूल कारण 'जनसंख्या विस्फोट' है और 'जनसंख्या विस्फोट' पर आप भी चिंता व्यक्त कर चुके हैं. 1976 में 42वां संविधान संशोधन विधेयक पास हुआ था और संविधान की सातवीं अनुसूची की तीसरी सूची (समवर्ती सूची) में जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन जोड़ा गया. 42वें संविधान संशोधन द्वारा केंद्र सरकार के साथ ही साथ सभी राज्य सरकारों को भी जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया गया.

42वां संविधान संशोधन 3 जनवरी 1977 को लागू हुआ था, लेकिन वोट बैंक की राजनीति के कारण 43 साल बाद भी एक कठोर और प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बनाया गया, जबकि देश की 50% से अधिक समस्याओं का मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है. जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग वाली मेरी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय को नोटिस जारी किया था, लेकिन मंत्रालय ने अभी तक अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया. मेरा व्यक्तिगत मत है कि वेंकटचलैया आयोग के सुझावों के अनुसार चुनाव सुधार और न्यायिक सुधार करना तथा जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाना ही अटल जी को सच्ची श्रद्धांजली है.

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट और बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने प्रधानमंत्री से कहा कि जैसा कि आप जानते हैं कि हजारों वर्ष पूर्व भगवान राम ने 'बहुविवाह' और 'जनसंख्या विस्फोट' पर रोक लगाया था और एक 'समान नागरिक संहिता' और ‘हम दो-हमारे दो’ नीति लागू की थी. जनता को स्पष्ट संदेश देने के लिए भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन ने स्वयं ‘हम दो-हमारे दो’ नियम का पालन किया था, जबकि उस समय जनसंख्या विस्फोट की समस्या इतनी खतरनाक नहीं थी.

वर्तमान समय में जनसंख्या विस्फोट भारत के लिए बम विस्फोट से भी अधिक खतरनाक है. जब तक 2 करोड़ बेघरों को घर दिया जाएगा तब तक 10 करोड़ बेघर और पैदा हो जाएंगे, इसलिए जनसंख्या विस्फोट रोकना बहुत जरूरी है. एक 'समान नागरिक संहिता' तथा प्रभावी 'जनसंख्या नियंत्रण कानून' लागू किए बिना स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत, साक्षर भारत, संपन्न भारत, समृद्ध भारत, सबल भारत, सशक्त भारत, सुरक्षित भारत, समावेशी भारत, स्वावलंबी भारत, स्वाभिमानी भारत, संवेदनशील भारत तथा भ्रष्टाचार और अपराध मुक्त भारत का निर्माण मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. 'समान नागरिक संहिता' तथा 'जनसंख्या नियंत्रण कानून' लागू किए बिना 'रामराज्य' पुनःस्थापित करना और भारत को विश्वगुरु बनाना असंभव है.

राजनीतिक दलों के नेता, सांसद और विधायक ही नहीं बल्कि बुद्धिजीवी, समाजशास्त्री, पर्यावरणविद, लेखक, शिक्षाविद, न्यायविद, विचारक और वरिष्ठ पत्रकार भी इस बात से सहमत हैं कि देश की 50% से ज्यादा समस्याओं का मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है. टैक्स देने वाले ‘हम दो-हमारे दो’ नियम का पालन करते हैं, लेकिन मुफ्त में रोटी कपड़ा मकान लेने वाले जनसंख्या विस्फोट कर रहे हैं. इसलिए तत्काल एक प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाना चाहिए. कानून मजबूत और प्रभावी होना चाहिये और जो व्यक्ति इसका उल्लंघन करे उसका राशन कार्ड, वोटर कार्ड, आधार कार्ड, बैंक खाता, बिजली कनेक्शन और मोबाइल कनेक्शन बंद होना चाहिए. इसके साथ ही कानून तोड़ने वालों पर सरकारी नौकरी करने, चुनाव लड़ने, राजनीतिक पार्टी बनाने और पार्टी पदाधिकारी बनने पर आजीवन प्रतिबंध होना चाहिए. ऐसे लोगों को सरकारी स्कूल और सरकारी हॉस्पिटल सहित अन्य सभी सरकारी सुविधाओं से वंचित करना चाहिये और 10 साल के लिए जेल भेजना चाहिए.

2019 में सवा सौ करोड़ भारतीयों का आधार बन गया था और लगभग 20% अर्थात 25 करोड़ भारतीय (विशेष रूप से बूढ़े और बच्चे) आज भी बिना आधार के हैं. इसके अतिरिक्त लगभग पांच करोड़ बंगलादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिये अवैध रूप से भारत में रहते हैं. इससे स्पष्ट है कि भारत की जनसंख्या सवा सौ करोड़ नहीं बल्कि डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा है और जनसंख्या के मामले में हम अब चीन से आगे है. यदि संसाधनों की बात करें तो भारत का क्षेत्रफल दुनिया का लगभग 2% है, पीने योग्य पानी मात्र 4% है, लेकिन जनसंख्या दुनिया की 20% है.

चीन का क्षेत्रफल 95,96,960 वर्ग किमी, अमेरिका का क्षेत्रफल 95,25,067 वर्ग किमी है, जबकि भारत का क्षेत्रफल मात्र 32,87,263 वर्ग किमी है अर्थात भारत का क्षेत्रफल चीन और अमेरिका के क्षेत्रफल का लगभग एक तिहाई है, लेकिन जनसंख्या वृद्धि की दर चीन से लगभग डेढ़ गुना और अमेरिका से छह गुना से भी ज्यादा है. इस वर्ष नए वर्ष पर अमेरिका में 10,247 बच्चे, चीन में 46,299 बच्चे और भारत में 67,385 बच्चे पैदा हुए थे.

जल जंगल और जमीन की समस्या, रोटी कपड़ा और मकान की समस्या, गरीबी बेरोजगारी और कुपोषण की समस्या, वायु जल मृदा और ध्वनि प्रदूषण की समस्या, कार्बन वृद्धि और ग्लोबल वार्मिग की समस्या, अर्थव्यवस्था के धीमी रफ्तार की समस्या, चोरी लूट और झपटमारी की समस्या तथा थाना तहसील हॉस्पिटल और स्कूल में भीड़ की समस्या का मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है. सड़क रेल और जेल में भीड़ की समस्या, ट्रैफिक जाम और पार्किग की समस्या, बलात्कार और व्याभिचार की समस्या, आवास और कृषि विकास की समस्या, दूध दही घी में मिलावट की समस्या, फल सब्जी में मिलावट की समस्या, रोड एक्सीडेंट और रोड रेज की समस्या, बढ़ती हिंसा और आत्महत्या की समस्या, अलगाववाद और कट्टरवाद की समस्या, आतंकवाद और नक्सलवाद की समस्या, मुकदमों के बढ़ते अंबार की समस्या, अनाज की कमी और भुखमरी की समस्या का मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है. जेल में बंद अपराधियों विशेष रूप से बलात्कारियों और भाड़े के हत्यारों पर सर्वे करने से पता चलता है कि 80% से अधिक अपराधी ऐसे हैं जिनके मां-बाप ने हम दो- हमारे दो नियम का पालन नहीं किया. इन तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत की 50% से अधिक समस्याओं का मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है.

अंतराष्ट्रीय रैंकिंग में भारत की दयनीय स्थिति का मुख्य कारण भी जनसंख्या विस्फोट है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 102वें स्थान पर, साक्षरता दर में 168वें स्थान पर, वर्ल्ड हैपिनेस इंडेक्स में 140वें स्थान पर, ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स में 129वें स्थान पर, सोशल प्रोग्रेस इंडेक्स में 53वें स्थान पर, यूथ डेवलपमेंट इंडेक्स में 134वें स्थान पर, होमलेस इंडेक्स में 8वें स्थान पर, लिंग असमानता इंडेक्स में 76वें स्थान पर, न्यूनतम वेतन में 64वें स्थान पर, रोजगार दर में 42वें स्थान पर, क्वालिटी ऑफ़ लाइफ इंडेक्स में 43वें स्थान पर, फाइनेंसियल डेवलपमेंट इंडेक्स में 51वें स्थान पर, करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में 80वें स्थान पर, रूल ऑफ़ लॉ इंडेक्स में 68वें स्थान पर, एनवायरमेंट परफॉरमेंस इंडेक्स में 177वें स्थान पर तथा जीडीपी पर कैपिटा में 139वें स्थान पर हैं लेकिन जमीन से पानी निकालने के मामले में पहले स्थान पर हैं जबकि पीने योग्य पानी दुनिया का मात्र 4% है.

वर्तमान समय में भारत में प्रतिदिन 70,000 बच्चे पैदा हो रहे हैं अर्थात 2020 में ढाई करोड़ बच्चे पैदा होंगे और भारत ही नहीं बल्कि किसी भी देश के लिए हर साल ढाई करोड़ नए रोजगार पैदा करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. चीन ने पहले ‘हम दो हमारे दो’ नीति को अपनाया और फिर ‘हम दो हमारे एक’ नियम को कड़ाई से लागू किया और लगभग 60 करोड़ बच्चों को पैदा होने से रोक दिया इसीलिए वह आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि विश्व महाशक्ति भी बन गया जबकि भारत आज भी गरीबी बेरोजगारी कुपोषण और प्रदूषण से लड़ रहा है.

एक कठोर और प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू किये बिना भारत को आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बनाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. जनसंख्या विस्फोट रोकने के साथ ही साथ अलगाववाद आतंकवाद माओवाद नक्सलवाद संप्रदायवाद कट्टरवाद जातिवाद भाषावाद क्षेत्रवाद तथा कालाजादू पाखंड अंधिविश्वास धर्मांतरण तथा रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ रोकने के लिए भी कठोर और प्रभावी कानून बनाना बहुत जरूरी है.

भारत की 50% समस्याओं का मूल कारण भ्रष्टाचार है इसलिए घूसखोरी कमीशनखोरी मुनाफाखोरी जमाखोरी मिलावटखोरी कालाबाजारी टैक्सचोरी मानव तस्करी नशा तस्करी घटतौली नक्काली हवालाबाजी कबूतरबाजी तथा कालाधन बेनामी संपत्ति और आय से अधिक संपत्ति को समाप्त करने के लिए भी कठोर और प्रभावी कानून बनाना अतिआवश्यक है.

प्रत्येक वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस और 2 दिसंबर को राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है, पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए पिछले पांच वर्ष में विशेष प्रयास भी किया गया, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि वायु, जल, ध्वनि और मृदा प्रदूषण की समस्या कम नहीं हो रही है और इसका मूल कारण जनसंख्या विस्फोट है. जनसंख्या विस्फोट के कारण वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है इससे स्पष्ट है कि एक कठोर और प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून के बिना स्वस्थ और आत्मनिर्भर भारत अभियान का सफल होना मुश्किल है.

संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्देशानुसार प्रत्येक वर्ष 25 नवंबर को महिला हिंसा उन्मूलन दिवस मनाया जाता है, लेकिन महिलाओं पर हिंसा बढ़ती जा रही है और इसका मुख्य कारण जनसंख्या विस्फोट है. बेटी पैदा होने के बाद महिलाओं पर शारीरिक और मानसिक अत्याचार किया जाता है, जबकि बेटी पैदा होगी या बेटा, यह महिला नहीं बल्कि पुरुष पर निर्भर करता है. कुछ लोग 3-4 बेटियां पैदा होने के बाद पहली पत्नी को छोड़ देते हैं और बेटे की चाह में दूसरा विवाह कर लेते हैं. बेटियों को बराबरी का दर्जा मिले, बेटियों का स्वास्थ्य ठीक रहे, बेटियां सम्मान सहित जिंदगी जीयें तथा बेटियां खूब पढ़ें और आगे बढ़ें.

इसके लिए एक कठोर और प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाना बहुत जरूरी है. जनसंख्या नियंत्रण कानून के बिना ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान तो सफल हो सकता है लेकिन विवाह के बाद बेटियों पर होने वाले अत्याचार को नहीं रोका जा सकता है. बेटा-बेटी में गैर-बराबरी बंद हो, उन्हें बराबर सम्मान मिले, बेटियां पढ़ें, बेटियां आगे बढ़ें और बेटियां सुरक्षित भी रहें, इसके लिए एक कठोर और प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाना अतिआवश्यक है.

First Published : 01 Sep 2020, 08:00:00 PM

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