News Nation Logo

सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी में देरी पर गुजरात सरकार पर 25 हजार की लागत लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी में देरी पर गुजरात सरकार पर 25 हजार की लागत लगाई

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 07 Jul 2021, 07:25:02 PM
Supreme Court

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा 25 जुलाई, 2018 को दिए गए फैसले के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने में गुजरात सरकार द्वारा 865 दिनों की देरी करने पर नाराजगी व्यक्त की है।

शीर्ष अदालत ने 25,000 रुपये की लागत लगाने के साथ याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और एम.आर. शाह ने कहा, जिस तरह से पुलिस उपायुक्त, यातायात शाखा, अहमदाबाद और गुजरात राज्य के गृह विभाग द्वारा वर्तमान विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है, हम उस तरीके को अस्वीकार करते हैं।

उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने फरवरी 2017 में संबंधित प्राधिकरण को पुलिस हेड कांस्टेबल को अनुकंपा पेंशन देने का निर्देश दिया था, जो 21 मार्च, 2002 से अनुशासनात्मक जांच के बाद अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त हुए थे और एक महीने की अवधि के भीतर बकाया का भुगतान करते थे। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रतिवादी का एक बच्चा मानसिक रूप से विकलांग है और दूसरा पोलियो प्रभावित है। उन्हें गुजरात सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2002 के नियम 78 और 79 के तहत अनुकंपा पेंशन के लिए निर्देश जारी किया गया था।

पीठ ने अपने 5 जुलाई के आदेश में कहा था, मामले में शामिल कठिनाई से संबंधित इन तथ्यों के बावजूद, राज्य ने खंडपीठ के समक्ष 200 दिनों की देरी से मामले को मुकदमा चलाने का विकल्प चुना और अब संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत एक विशेष अनुमति याचिका जो हमारे सामने है, इसे 856 दिन देरी से दाखिल किया गया।

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के समक्ष एक पत्र पेटेंट अपील दायर करने में 200 दिनों की देरी के अलावा, उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ एसएलपी दाखिल करने में 856 दिनों की अतिरिक्त देरी है। हम देरी को माफ करने से इनकार करते हैं।

पीठ ने कहा, हम तदनुसार उस तरीके को अस्वीकार करते हैं जिस तरह से गुजरात राज्य ने इस न्यायालय को घोर और अस्पष्टीकृत देरी के साथ स्थानांतरित किया है और, विशेष अनुमति याचिका को लागत के साथ देरी के आधार पर खारिज करते हैं। याचिकाकर्ता चार सप्ताह के भीतर उच्चतम न्यायालय की कानूनी सेवा समिति के समक्ष 25,000 रुपये की लागत जमा करेंगे।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

LIVE TV NN

NS

NS

First Published : 07 Jul 2021, 07:25:02 PM

For all the Latest India News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.