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राम रहीम का 'पूरा सच' बताने वाले पत्रकार की हत्या का इंसाफ मांग रहा बेटा

राम रहीम सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पत्रकार राम चंदर छत्रपति का बेटा 15 सालों बाद भी अपने पिता की हत्या के लिए न्याय की तलाश में भटक रहा है।

News Nation Bureau | Edited By : Aditi Singh | Updated on: 27 Aug 2017, 08:01:55 AM
राम चंदर छत्रपति (फाइल फोटो)

राम चंदर छत्रपति (फाइल फोटो)

highlights

  • राम रहीम के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पत्रकार राम चंदर छत्रपति की गोली मार कर हत्या कर गई थी
  • छत्रपति ने अपने अखबार में पीड़ित साध्वियों के गुमनाम खत को छाप दिया था

ऩई दिल्ली:

बलात्कार के आरोप में दोषी करार दिए गए राम रहीम सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पत्रकार राम चंदर छत्रपति का बेटा 15 सालों बाद भी अपने पिता की हत्या के लिए न्याय की तलाश में भटक रहा है।

छत्रपति ने अपने स्थानीय अखबार 'पूरा सच' में राम रहीम पर आरोप लगाने वाली महिलाओं के खत को छाप दिया था। इस गुमनाम खत में दोनों साध्वियों ने अपने साथ हुए रेप और हिंसा की जिक्र किया गया था।

खत के छपने के कुछ महीनों के बाद 24 अक्टूबर 2002 में छत्रपति को उनके घर के बाहर ही गोलियां मार कर छलनी कर दिया गया था। 21 नवंबर 2002 को छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मौत हो गई थी। ये केस भी कोर्ट में चल रहा है।

अपने पिता की हत्या का इंसाफ मागने के लिए भटक रहें उनके बेटे अंशुल ने कहा,' मेरे पिता राम चंदर पत्रकार होने से पहले वकील थे। उन्होनें कई मीडिया संगठनों के साथ काम किया। हालांकि वो मीडिया संगठनों के तरीकों से खुश नहीं थे, इसलिए उन्होंने 'पूरा सच' नाम का अपना अखबार निकाला। उन्होंने 15 साल पहले डेरा में 'साध्वी' (महिला अनुयायियों) के कथित बलात्कार का पर्दाफाश किया था, जो तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को संबोधित किया गया था।'

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उन्होंने आगे कहा,'इस खत को छापने के बाद मेरे पिता को कई बार निशाना बनाया गया था और धमकी दी थी। हाई कोर्ट ने तब सीबीआई जांच का आदेश दिया था कि वह पत्र को संज्ञान में लें। फिर 24 अक्टूबर 2002 को मेरे पिता पर हमला किया गया; दो लोगों ने मेरे पिता को पांच गोलियां मार दी थी। मैं 21 साल का था, और यह नहीं पता था कि न्याय के लिए कहां जाना चाहिए, जब पुलिस ने एफआईआर में डेरा प्रमुख का नाम शामिल नहीं किया।'

अंशुल ने बताया कि मेरे पिता ने 28 दिनों के लिए अस्पताल में जीवन के लिए लड़ाई लड़ी थी और उन्होंने अपने बयान में आरोपी के रूप में स्थानीय पुलिस को डेरा प्रमुख का नाम दिया था। लेकिन पुलिस ने एफआईआर में डेरा प्रमुख नाम शामिल नहीं किया और यहीं से कानूनी लड़ाई शुरू हुई। इस घटना में इस्तेमाल की गई रिवाल्वर का लाइसेंस डेरा सच्चा सौदा के नाम पर है।'

गौरतलब है कि पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के बाद छत्रपति की हत्या की जांच सीबीआई को सौंपी गई। जांच के बाद सीबीआई ने राम रहीम और उनके विश्वासपात्रों को छत्रपति की हत्या का आरोपी बनाया। वो मुकदमा अभी चल रहा है।

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First Published : 27 Aug 2017, 04:34:33 AM

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