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शिलांग हिंसा : पूर्व उग्रवादी की हत्या की जांच करेगा न्यायिक पैनल (लीड-1)

शिलांग हिंसा : पूर्व उग्रवादी की हत्या की जांच करेगा न्यायिक पैनल (लीड-1)

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 16 Aug 2021, 11:45:02 PM
Shillong violence

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

शिलांग: मेघालय सरकार ने सोमवार को एक पूर्व उग्रवादी नेता की हत्या की न्यायिक जांच का आदेश दिया। पूर्व उग्रवादी नेता के बाद रविवार को शिलांग में पथराव और आगजनी सहित हिंसा भड़क उठी थी। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।

एक अधिकारी ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने अपनी बैठक में 13 अगस्त की सुबह हुई घटनाओं की जांच के लिए जांच अधिनियम के तहत न्यायिक जांच आयोग का गठन करने का फैसला लिया।

उन्होंने कहा कि न्यायिक जांच के अलावा मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक शांति समिति गठित करने का भी निर्णय लिया गया, जिसका नेतृत्व उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसोंग करेंगे, जिसमें मंत्री हेमलेटसन डोहलिंग और रेनिक्टन तोंगखर लिंगदोह सदस्यों के रूप में होंगे।

अधिकारी ने कहा, समिति धार्मिक संगठनों और अन्य हितधारकों सहित नागरिक समाज के अन्य सदस्यों को शामिल करेगी। साथ ही, शिलांग में मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने फैसला किया कि रात का कर्फ्यू, जिसे रविवार को घोषित किया गया था, बुधवार को सुबह 5 बजे तक बढ़ा दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि चार जिलों में मोबाइल इंटरनेट डेटा सेवाओं पर प्रतिबंध को भी अगले 24 घंटे के लिए बढ़ा दिया गया है।

कैबिनेट की बैठक में कानून व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर गौर करने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उपसमिति गठित करने का भी निर्णय लिया गया। उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री समिति के सदस्य होंगे।

शिलांग हिंसा की न्यायिक जांच की मांग करते हुए मेघालय के गृहमंत्री लखमेन रिंबुई ने रविवार रात इस्तीफा दे दिया था।

मुख्यमंत्री को लिखे अपने त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि वह प्रतिबंधित हाइनीवट्रेप नेशनल लिबरेशन काउंसिल के पूर्व नेता चेस्टरफील्ड थांगख्यू की हत्या से स्तब्ध हैं।

हिंसक घटनाओं की एक श्रृंखला ने रविवार को शिलांग और इसके बाहरी इलाके में तबाही मचाई, जिसके कारण स्वतंत्रता दिवस समारोह बहुत ही साधारण तरीके से आयोजित किया गया।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि रविवार को शिलांग में काले झंडे के साथ विरोध मार्च निकालने वाले प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि शुक्रवार तड़के थांगख्यू को मुठभेड़ के नाम पर मार दिया गया।

भीड़ ने सुरक्षा बलों पर पथराव किया और विरोध कर रहे युवकों ने शहर के चारों ओर मावकिनरोह पुलिस चौकी से संबंधित पुलिस वाहन को काले झंडों के साथ खदेड़ दिया और बाद में आग लगा दी।

चौकी के प्रभारी अधिकारी सहित वाहन पर सवार पुलिसकर्मी भागने में सफल रहे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर भाग रहे पुलिसकर्मियों के हथियार छीन लिए।

संगमा के निजी आवास पर भी पथराव किया गया।

मावकिनरोह चौकी के चार पुलिसकर्मियों को उनके वाहन को छोड़ने के लिए निलंबित कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, घटना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। मैंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से घटना की जांच करने के लिए कहा है और किन परिस्थितियों में उन्होंने वाहन छोड़े हैं।

शुक्रवार की मुठभेड़ जिसमें थांगखिव मारा गया था, उसके तीन दिन बाद एचएनएलसी ने शिलांग के लैतुमखरा बाजार में एक आईईडी विस्फोट किया, जिसमें एक महिला सहित दो लोग घायल हो गए और आस-पास की इमारतों को नुकसान पहुंचा।

2018 में सरकार के सामने आत्मसमर्पण करने से पहले एचएनएलसी के संस्थापक नेता थेंगख्यू की मौत के बाद मेघालय मानवाधिकार आयोग ने भी स्वत: संज्ञान लिया है, और मुख्य सचिव को 15 दिनों के भीतर घटना पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। ऐसा न करने पर आयोग स्वयं जांच करेगा।

इस बीच, असम के विशेष पुलिस महानिदेशक जी.पी. सिंह ने गुवाहाटी में कहा कि शिलांग में लगाए गए कर्फ्यू के मद्देनजर असम के लोगों को सलाह दी जाती है कि वे वहां यात्रा न करें।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 16 Aug 2021, 11:45:02 PM

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