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राहुल गांधी पर राजद का बड़ा हमला, महागठबंधन में शुरू आरोप-प्रत्यारोप

राजद के नेताओं ने सीधे-सीधे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है, तो राहुल का बचाने के लिए कांग्रेस के दरबारी न सिर्फ सक्रिय हो गए हैं बल्कि हार के लिए राजद की तुष्टीकरण नीति को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 16 Nov 2020, 08:11:24 AM
Rahul Gandhi

70 सीटें लेना वाली कांग्रेस के नेता राहुल गांधी 70 सभा भी नहीं कर सके. (Photo Credit: न्यूज नेशन.)

नई दिल्ली:  

महागठबंधन के परचम तले बिहार विधानसभा चुनाव लड़ी और बुरी तरह हारी कांग्रेस में नेतृत्व पर विवाद फिर से शुरू हो गया है. राजद के नेताओं ने सीधे-सीधे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है, तो राहुल का बचाने के लिए कांग्रेस के दरबारी न सिर्फ सक्रिय हो गए हैं बल्कि हार के लिए राजद की तुष्टीकरण नीति को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं. इस बीच गोवा में कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष ने नेतृत्व पर युवाओं की अनदेखी का आरोप लगा इस्तीफा दे दिया है. जाहिर है एक और हार के बाद कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन और जवाबदेही ठहराने की सूनामी फिर से उठने लगी है.

राहुल ने 70 सभाएं भी नहीं की
राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने सीधे-सीधे राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं. शिवानंद तिवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी महागठबंधन के लिए बाधा बन गई. कांग्रेस ने 70 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, लेकिन 70 रैलियां भी नहीं कीं. राहुल गांधी बिहार में केवल तीन दिन के लिए आए. प्रियंका गांधी नहीं आईं क्योंकि वो बिहार से उतना परिचित नहीं थीं. उन्होंने कहा कि बिहार में चुनाव सरगर्मी तेज थी और राहुल गांधी शिमला में प्रियंका गांधी के घर पिकनिक मना रहे थे. क्या पार्टी ऐसे चलती है? कांग्रेस पार्टी जिस तरह से चलाई जा रही है, उससे बीजेपी को फायदा हो रहा है. 

कांग्रेस करे आत्ममंथन
शिवानंद तिवारी ने कहा कि राहुल गांधी के घर बैठक हुई थी. इस बैठक में कपिल सिब्बल, शशि थरूर, मुकुल वासनिक, मनीष तिवारी ये सब लोग बैठे थे. सब लोगों ने चिट्ठी लिखी, ये सब जीवन भर कांग्रेस के प्रति लॉयल रहे. इस तरह से आप पार्टी नहीं चला सकते  है. इस तरह से पार्टी चलती है क्या? कांग्रेस का जिस तरह से कारोबार चल रहा है उससे बीजेपी का फायदा हो रहा है. आरजेडी नेता ने कहा कि मुझे लगता है कि केवल बिहार में ही ऐसा नहीं है. अन्य राज्यों में भी कांग्रेस ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने पर जोर देती है, लेकिन वो चुनाव जीतने में विफल रहती है. कांग्रेस को इस बारे में सोचना चाहिए.

बीजेपी से सबक ले कांग्रेस
यही नहीं, शिवानंद तिवारी ने कांग्रेस को बीजेपी खासकर पीएम नरेंद्र मोदी से भी सीख लेनी की सलाह दे डाली. उन्होंने कहा कि अगर सीखने की बात आए तो विरोधियों से भी सबक सीखने चाहिए. महागठबंधन में टूट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजग बिहार का मुख्यमंत्री पद नीतीश कुमार को देने जा रही है, जबकि महागठबंधन सीटों को बंटवारों को लेकर उठे विवाद में जीतिन राम मांझी समेत कई नेताओं को महागठबंधन से बाहर जाते देखती रह गई. कांग्रेस को सिर्फ ज्यादा सीटों पर खड़ा होने की लालसा रहती है. चुनाव जीतने पर नहीं. अब समय आ पहुंचा है जब कांग्रेस आत्ममंथन कर दशा-दिशा तय करे.

कांग्रेस का पलटवार
राजद के सीधे हमले खासकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को निशाना बनाए जाने पर कांग्रेस के नेता भी सक्रिय हो गए. अनिल शर्मा ने बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की सरकार नहीं बन पाने का ठीकरा राजद की तुष्टीकरण नीति पर फोड़ा है. उन्होंने कहा कि राजद सभी समुदायों में विश्वास जगाने में नाकाम रही, तो इसकी एक बड़ी वजह उसकी एक खास समुदाय को खुश करने की नीति रही है. इस फेर में राजद विश्वास जगाने में सफल नहीं हो सकी. यही नहीं, अनिल शर्मा ने राजद में भितरघात को भी चुनाव में हार का एक बड़ा कारम बताया है.

First Published : 16 Nov 2020, 07:49:27 AM

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