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वाराणसी का पढ़िए इतिहास, जानें क्यों कहते 'बनारस' और 'काशी'

भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक प्रसिद्ध नगर है. इसे 'बनारस' और 'काशी' भी कहते हैं. इसे हिन्दू धर्म में एक पवित्र नगर माना गया है और इसे अविमुक्त क्षेत्र कहा जाता है. इसके अलावा बौद्ध एवं जैन धर्म में भी यह एक महत्वपूर्ण शहर है.

News Nation Bureau | Edited By : Shailendra Kumar | Updated on: 25 Mar 2021, 12:14:33 PM
Banaras and Kashi

'बनारस' और 'काशी' (Photo Credit: @Wikipedia)

highlights

  • काशी नगर की स्थापना हिन्दू भगवान शिव ने लगभग 5000 वर्ष पूर्व की थी
  • आज एक महत्त्वपूर्ण तीर्थ स्थल है. ये हिन्दुओं की पवित्र सप्तपुरियों में से एक है
  • समान्यत वाराणसी शहर को लगभग 3000 वर्ष प्राचीन माना जाता है

वाराणसी:

भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक प्रसिद्ध नगर है. इसे 'बनारस' और 'काशी' भी कहते हैं. इसे हिन्दू धर्म में एक पवित्र नगर माना गया है और इसे अविमुक्त क्षेत्र कहा जाता है. इसके अलावा बौद्ध एवं जैन धर्म में भी यह एक महत्वपूर्ण शहर है. यह संसार के प्राचीन बसे शहरों में से एक है. काशी नरेश (काशी के महाराजा) वाराणसी शहर के मुख्य सांस्कृतिक संरक्षक एवं सभी धार्मिक क्रिया-कलापों के अभिन्न अंग हैं. वाराणसी की संस्कृति का गंगा नदी एवं इसके धार्मिक महत्त्व से अटूट रिश्ता है. ये शहर सहस्रों वर्षों से भारत का, विशेषकर उत्तर भारत का सांस्कृतिक एवं धार्मिक केन्द्र रहा है.

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का बनारस घराना वाराणसी में ही जन्मा एवं विकसित हुआ है. भारत के कई दार्शनिक, कवि, लेखक, संगीतज्ञ वाराणसी में रहे हैं, जिनमें कबीर, वल्लभाचार्य, रविदास, स्वामी रामानंद, त्रैलंग स्वामी, शिवानन्द गोस्वामी, मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, पंडित रवि शंकर, गिरिजा देवी, पंडित हरि प्रसाद चौरसिया एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खां आदि कुछ हैं. गोस्वामी तुलसीदास ने हिन्दू धर्म का परम-पूज्य ग्रंथ रामचरितमानस यहीं लिखा था और गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम प्रवचन यहीं निकट ही सारनाथ में दिया था.

वाराणसी में चार बड़े विश्वविद्यालय स्थित हैं

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइयर टिबेटियन स्टडीज़ और संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय. यहां के निवासी मुख्यतः काशिका भोजपुरी बोलते हैं, जो हिन्दी की ही एक बोली है. वाराणसी को प्रायः 'मंदिरों का शहर', 'भारत की धार्मिक राजधानी', 'भगवान शिव की नगरी', 'दीपों का शहर', 'ज्ञान नगरी' आदि विशेषणों से संबोधित किया जाता है.

प्रसिद्ध अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन लिखते हैं

"बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों (लीजेन्ड्स) से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है."

इतिहास
पौराणिक कथाओं के अनुसार, काशी नगर की स्थापना हिन्दू भगवान शिव ने लगभग 5000 वर्ष पूर्व की थी, जिस कारण ये आज एक महत्त्वपूर्ण तीर्थ स्थल है. ये हिन्दुओं की पवित्र सप्तपुरियों में से एक है. स्कन्द पुराण, रामायण, महाभारत एवं प्राचीनतम वेद ऋग्वेद सहित कई हिन्दू ग्रन्थों में इस नगर का उल्लेख आता है. समान्यत वाराणसी शहर को लगभग 3000 वर्ष प्राचीन माना जाता है. परन्तु हिन्दू परम्पराओं के अनुसार काशी को इससे भी अत्यंत प्राचीन माना जाता है. नगर मलमल और रेशमी कपड़ों, इत्रों, हाथी दांत और शिल्प कला के लिये व्यापारिक एवं औद्योगिक केन्द्र रहा है. गौतम बुद्ध (जन्म 567 ईपू) के काल में, वाराणसी काशी राज्य की राजधानी हुआ करता था. बनारस के दशाश्वमेध घाट के समीप बने शीतला माता मंदिर का निर्माण अर्कवंशी क्षत्रियों ने करवाया था. प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने नगर को धार्मिक, शैक्षणिक एवं कलात्मक गतिविधियों का केन्द्र बताया है और इसका विस्तार गंगा नदी के किनारे 5 किमी तक लिखा है.

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First Published : 22 Mar 2021, 07:45:21 PM

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