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पूसा संस्थान ने किसानों की मदद के लिए बनाया बायो-डीकम्पोजर : केजरीवाल

पूसा संस्थान ने किसानों की मदद के लिए बनाया बायो-डीकम्पोजर : केजरीवाल

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 13 Sep 2021, 03:10:01 PM
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(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को केंद्र सरकार के उपक्रम वैपकोस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूसा संस्थान द्वारा निर्मित बायो-डीकंपोजर की सफलता दर पर प्रसन्नता व्यक्त की और अन्य राज्यों से पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली के नक्शेकदम पर चलने का आग्रह किया।

केजरीवाल ने एक वर्चुअल प्रेस मीट को संबोधित करते हुए कहा कि वैपकोस ने चार जिलों के 15 गांवों में जाकर 79 किसानों के साथ बातचीत की। उस जानकारी के आधार पर, केंद्र सरकार के उपक्रम ने सोमवार को कहा है कि दिल्ली के किसान डीकंपोजर का उपयोग करने के बाद खुश हैं और इसके परिणाम उत्साहजनक हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 90 प्रतिशत किसानों ने कहा कि उनके खेत में पराली 15-20 दिनों के भीतर सड़ गई और उनके खेत अगले सीजन की फसल के लिए तैयार हो गए है। पहले, उन्हें गेहूं उगाने के लिए अपनी जमीन को छह से सात बार जोतना पड़ता था, हालांकि , बायो-डीकंपोजर का उपयोग करने के बाद, उन्हें केवल दो-तीन जुताई करनी पड़ी।

इस नए जैव-अपघटक के उपयोग के बाद उनके खेतों में कार्बनिक कार्बन 40 प्रतिशत तक बढ़ गया क्योंकि फसल अवशेष खाद बन गई। नाइट्रोजन की मात्रा में भी 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई और अच्छे बैक्टीरिया 7 प्रतिशत और कवक में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके अलावा मिट्टी की गुणवत्ता इतनी बढ़ी कि गेहूं की फसल का अंकुरण 17-20 प्रतिशत बढ़ गया।

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत किसानों ने स्वीकार किया कि प्रति एकड़ डीएपी खाद का उपयोग पहले के 46 प्रतिशत से घटकर 36-40 प्रतिशत हो गया, जिसके परिणामस्वरूप गेहूं की फसल के उत्पादन में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

उन्होंने कहा कि पहले किसानों पर पराली जलाने के लिए जुर्माना लगाया जा रहा था, लेकिन यह उनकी गलती नहीं थी बल्कि समस्या का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी थी।

केजरीवाल ने केंद्र सरकार से अन्य राज्यों को दिल्ली के मॉडल का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया ताकि पड़ोसी राज्यों के किसान भी इस सुविधा का लाभ उठा सकें।

सर्दियों के मौसम की शुरूआत के साथ, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्यों में किसान (खरीफ / रबी सीजन) फसलों के लिए अपने खेतों को तैयार करते हैं। वे फसल के अवशेषों को जला देते हैं जिससे हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है। यह बड़े पैमाने पर वायु प्रदूषण को जन्म देती है और इसके नागरिकों में श्वसन संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती है।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 13 Sep 2021, 03:10:01 PM

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