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एएमयू के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण, पढ़िए 10 बड़ी बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना दिवस के शताब्दी समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने विशेष डाक टिकट भी जारी किया.

News Nation Bureau | Edited By : Dalchand Kumar | Updated on: 22 Dec 2020, 12:47:28 PM
PM Modi in AMU

AMU के शताब्दी समारोह में PM मोदी का भाषण, पढ़िए 10 बड़ी बातें (Photo Credit: BJP (Twitter))

नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना दिवस के शताब्दी समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के 55 साल में ये पहला मौका है, जब किसी प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में हिस्सा लिया. एएमयू के शताब्दी समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए डाक टिकट भी जारी किया. मोदी ने एएमयू को 'छोटा भारत' बताते हुए विश्वविद्यालय की विरासत का बखान किया. इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने छात्रों को मंत्र दिया और विरोधियों को जवाब भी दिया. पढ़िए प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें. 

कोरोना काल में एएमयू ने समाज की अभूतपूर्व मदद की

पीएम मोदी ने कोरोना काल में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के योगदान की तारीफ की. उन्होंने कहा, 'कोरोना के इस संकट के दौरान भी AMU ने जिस तरह समाज की मदद की, वो अभूतपूर्व है. हज़ारों लोगों का मुफ्त टेस्ट करवाना, आइसोलेशन वार्ड बनाना, प्लाज्मा बैंक बनाना और पीएम केयर फंड में बड़ी राशि का योगदान देना, समाज के प्रति आपके दायित्वों को पूरा करने की गंभीरता को दिखाता है.'

पूरी दुनिया में छाए हैं एएमयू के छात्र

पीएम मोदी ने कहा, 'बीते 100 वर्षों में AMU ने दुनिया के कई देशों से भारत के संबंधों को सशक्त करने का भी काम किया है. उर्दू, अरबी और फारसी भाषा पर यहाँ जो रिसर्च होती है, इस्लामिक साहित्य पर जो रिसर्च होती है, वो समूचे इस्लामिक वर्ल्ड के साथ भारत के सांस्कृतिक रिश्तों को नई ऊर्जा देती है. आज एएमयू से तालीम लेकर निकले सारे लोग भारत के सर्वश्रेष्ठ स्थानों पर ही नहीं बल्कि दुनिया के सैकड़ों देशों में छाए हुए हैं. एएमयू के पढ़े लोग दुनिया में कहीं भी हों, भारत की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं.'

एएमयू कैंपस में नजर आता है मिनी इंडिया

प्रधानमंत्री बोले, 'एएमयू के एक बिल्डिंग ही नहीं, इसके साथ शिक्षा का इतिहास से जुड़ा है. मुझे बहुत से लोग बोलते हैं कि एएमयू कैंपस अपने आप में एक शहर की तरह है. अनेक विभाग, दर्जनों हॉस्टल, हजारों टीचर-छात्रों के बीच एक मिनी इंडिया नजर आता है. यहां एक तरफ उर्दू पढ़ाई जाती है, तो हिंदी भी. अरबी पढ़ाई जाती है तो संस्कृति की शिक्षा भी दी जाती है.' मोदी ने कहा, 'यहां की लाइब्रेरी में कुरान है तो गीता-रामायण के अनुवाद भी हैं. एएमयू में एक भारत-श्रेष्ठ भारत की अच्छी तस्वीर है. यहां पर इस्लाम को लेकर जो रिसर्च होती है, उससे भारत का इस्लामिक देशों से संबंध अच्छा होता है.' उन्होंने कहा कि एएमयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान देश की ताकत हैं. 

मुस्लिम बेटियों का स्कूल ड्रॉपआउट रेट घटा

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्लिम बेटियों की संख्या पर जोर दिया. उन्होंने कहा, 'पहले मुस्लिम बेटियों का स्कूल ड्रॉपआउट रेट 70 फीसदी से ज़्यादा था वो अब घटकर करीब-करीब 30 फीसदी रह गया है. पहले लाखों मुस्लिम बेटियां शौचायल की कमी की वजह से पढ़ाई छोड़ देती थीं, अब हालात बदल रहे हैं. मुझे एक और बात बताई गई है एएमयू में अब महिला छात्राओं की संख्या बढ़कर 35 फीसदी हो गई है. मुस्लिम बेटियों का ड्रॉपआउट रेट कम से कम हो, इसके लिए केंद्र सरकार प्रयास कर रही है.' प्रधानमंत्री ने कहा कि मुस्लिम बेटियों की शिक्षा पर, उनके सशक्तिकरण पर सरकार का बहुत ध्यान है. पिछले 6 साल में सरकार द्वारा करीब करीब एक करोड़ मुस्लिम बेटियों को स्कॉलरशिप दी गई है. 

प्रधानमंत्री मोदी ने तीन तलाक का भी जिक्र किया

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान तीन तलाक का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि तीन तलाक जैसी कुप्रथा का अंत करके देश ने महिलाओं के लिए समान अधिकार की बात को आगे बढ़ाया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कहा जाता है कि घर की महिला शिक्षित हो तो पूरा परिवार शिक्षित हो जाता है, लेकिन शिक्षा के और भी गहरे मायने हैं. महिलाओं को शिक्षित होना है ताकि वह अपने अधिकारों का सही इस्तेमाल कर सकें, अपना भविष्य खुद बना सकें. प्रधानमंत्री ने अपील की, 'एक एम्पावरप वुमेन का हर फैसले में उतना ही योगदान होता है, जितना किसी और का, फिर चाहे बात परिवार को दिशा देने की हो या देश को. मैं देश की अन्य शिक्षा संस्थानों से भी कहूंगा कि ज्यादा से ज्यादा बेटियों को शिक्षा से जोड़ें.' 

नई शिक्षा नीति में छात्रों की जरूरतों का विशेष ध्यान

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 21वीं सदी में भारत के छात्र-छात्राओं की जरूरतों को सबसे ज्यादा ध्यान में रखा गया है. हमारे देश के युवा 'देश पहले' के आह्वान के साथ देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. नई शिक्षा नीति से छात्रों को अपनी शिक्षा के बारे में फैसले लेने में आसानी होगी. सरकार उच्च शिक्षा में नामांकन की संख्या बढ़ाने और सीटें बढ़ाने के लिए भी लगातार काम कर रही है. आज देश में आईआईटी की संख्या 16 से बढ़कर 23 पहुंच गई है. आईआईआईटी की संख्या 9 से बढ़कर 25 हो गई और आईआईएम की संख्या 13 से बढ़कर 20 हो गई है. मेडिकल शिक्षा को लेकर भी बहुत काम किया गया है. 6 साल पहले तक देश में सिर्फ 7 एम्स थे आज देश में 22 एम्स हैं.

बिना किसी मत मजहब के भेद के सभी तक पहुंच रही योजनाएं

जो देश का, वह हर देशवासी का है, इसका लाभ हर देशवासी को मिलना ही चाहिए. हमारी सरकार इसी भावना के साथ काम कर रही है. आज देश जो योजनाएं बना रहा है वो बिना किसी मत मजहब के भेद के हर वर्ग तक पहुंच रही हैं. बिना भेदभाव, 40 करोड़ से ज्यादा गरीबों के बैंक खाते खुले. बिना भेदभाव, 2 करोड़ से ज्यादा गरीबों को पक्के घर दिए गए. बिना भेदभाव 8 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को गैस मिला. देश आज उस मार्ग पर बढ़ रहा है जहां मजहब की वजह से कोई पीछे न छूटे, सभी को आगे बढ़ने के समान अवसर मिले, सभी अपने सपने पूरे करें. सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास ये मंत्र मूल आधार है. देश की नीयत और नीतियों में यही संकल्प झलकता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीतिक दलों को निशाने पर लिया

एएमयू में संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीतिक दलों से कहा कि विकास को राजनीति के चश्मे से न देखें.   नकारात्मकता फैलाने वाले लोग हर जगह देखे जा सकते हैं. कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए भ्रम फैलाते हैं. राजनीतिक के लिए इंतजार किया जा सकता है, लेकिन विकास के लिए नहीं. समाज में वैचारिक मतभेद होते हैं, लेकिन जब बात राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति की हो, तो हर मतभेद किनारे रख देने चाहिए. जब आप सभी युवा साथी इस सोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो ऐसी कोई मंजिल नहीं, जो हम हासिल न कर सकें.

आज पूरी दुनिया की नजर भारत पर

उन्होंने कहा, 'हमें समझना होगा कि सियासत सोसाइटी का अहम हिस्सा है. लेकिन सोसाइटी में सियासत के अलावा भी दूसरे मसले हैं. सियासत और सत्ता की सोच से बहुत बड़ा, बहुत व्यापक किसी देश का समाज होता है. पिछली शताब्दी में मतभेदों के नाम पर बहुत समय पहले ही जाया हो चुका है. अब समय नहीं गंवाना है, सभी को एक लक्ष्य के साथ मिलकर नया भारत, आत्मनिर्भर भारत बनाना है.' पीएम मोदी ने कहा, 'आज पूरी दुनिया की नजर भारत पर है. जिस सदी को भारत की बताया जा रहा है, उस लक्ष्य की तरफ भारत कैसे आगे बढ़ता है, इसे लेकर सब उत्सुक हैं.  इसलिए हम सबका एकनिष्ठ लक्ष्य ये होना चाहिए कि भारत को आत्मनिर्भर कैसे बनाएं.'

छात्रों को दिया टास्क

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एएमयू के छात्रों को टास्क दिए. नरेंद्र मोदी ने कहा, 'एएमयू के 100 साल पूरे हो रहे हैं, ऐसे में 100 हॉस्टल के छात्र कुछ रिसर्च करें. आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर उन स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में रिसर्च करें, जिनके बारे में लोग काफी कम जानते हैं. इनमें 75 आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और 25 महिला स्वतंत्रता सेनानी के बारे में जानकारी जुटाए. साथ ही पुरानी पांडुलिपी को डिजिटल क्षेत्र के जरिए दुनिया के सामने लाएं.' प्रधानमंत्री ने कहा, '1920 में तब के युवाओं ने एक लक्ष्य रखा, तो 1947 में देश आजाद हुआ था. लेकिन 2020 से 2047 तक का वक्त काफी अहम है, क्योंकि देश अपनी आजादी के 100 सौ साल पूरा करेगा.'

First Published : 22 Dec 2020, 12:47:28 PM

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