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विश्वभारती के समारोह में बोले प्रधानमंत्री मोदी, आतंक फैलाने वालों में हाइली स्किल लोग भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विश्व-भारती यूनिवर्सिटी (Visva-Bharati University) के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया.

News Nation Bureau | Edited By : Dalchand Kumar | Updated on: 19 Feb 2021, 01:09:56 PM
Prime Minister Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo Credit: News Nation)

highlights

  • विश्वभारती यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह
  • PM मोदी ने किया समारोह को संबोधित
  • नरेंद्र मोदी ने छात्रों को दिए कई मंत्र

नई दिल्ली/कोलकाता:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विश्व-भारती यूनिवर्सिटी (Visva-Bharati University) के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया. इस दौरान प्रधानमंत्री ने रवींद्रनाथ टैगोर को याद किया और साथ ही शिवाजी महाराज की जयंती पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने छात्रों को कई मंत्र दिए. उन्होंने कहा कि हमेशा याद रखना होगा कि ज्ञान, विचार और स्किल, स्थिर नहीं है, ये सतत चलने वाली प्रक्रिया है. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दुनिया में आतंक फैलाने वालों में हाइली स्किल लोग भी शामिल हैं.

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'विश्व भारत, सिर्फ ज्ञान देने वाली एक संस्था नहीं. ये एक प्रयास है'

समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, 'गुरुदेव अगर विश्व भारती को सिर्फ एक यूनिवर्सिटी के रूप में देखना चाहते, तो वो इसको ग्लोबल यूनिवर्सिटी या कोई और नाम भी दे सकते थे. लेकिन उन्होंने, इसे विश्व भारती विश्वविद्यालय नाम दिया. गुरुदेव टैगोर के लिए विश्व भारती, सिर्फ ज्ञान देने वाली एक संस्था नहीं थी. ये एक प्रयास है भारतीय संस्कृति के शीर्षस्थ लक्ष्य तक पहुंचने का, जिसे हम कहते हैं- स्वयं को प्राप्त करना. जब आप अपने कैंपस में बुधवार को ‘उपासना’ के लिए जुटते हैं, तो  स्वयं से ही साक्षात्कार करते हैं. जब आप गुरुदेव द्वारा शुरू किए गए समारोहों में जुटते हैं, तो स्वयं से ही साक्षात्कार करते हैं.'

'सत्ता में रहते हुए संयम और संवेदनशील रहना जरूरी'

उन्होंने कहा, 'विश्व भारती तो अपने आप में ज्ञान का वो उन्मुक्त समंदर है, जिसकी नींव ही अनुभव आधारित शिक्षा के लिए रखी गई. ज्ञान की, क्रिएटिविटी की कोई सीमा नहीं होती, इसी सोच के साथ गुरुदेव ने इस महान विश्वविद्यालय की स्थापना की थी.' नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपको ये भी हमेशा याद रखना होगा कि ज्ञान, विचार और स्किल, स्थिर नहीं है, ये सतत चलने वाली प्रक्रिया है और इसमें कोर्स करेक्शन की गुंजाइश भी हमेशा रहेगी. लेकिन नॉलेज और पावर, दोनों जिम्मेदारी के साथ आते हैं. उन्होंने कहा, 'जिस प्रकार, सत्ता में रहते हुए संयम और संवेदनशील रहना पड़ता है, उसी प्रकार हर विद्वान को, हर जानकार को भी उनके प्रति ज़िम्मेदार रहना पड़ता है जिनके पास वो शक्ति नहीं है. आपका ज्ञान सिर्फ आपका नहीं बल्कि समाज की, देश की धरोहर है.'

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प्रधानमंत्री ने छात्रों को दिए उदाहरण

नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आपका ज्ञान, आपकी स्किल, एक समाज को, एक राष्ट्र को गौरवान्वित भी कर सकती है और वो समाज को बदनामी और बर्बादी के अंधकार में भी धकेल सकती है. इतिहास और वर्तमान में ऐसे अनेक उदाहरण हैं.' मोदी ने कहा कि आप देखिए, जो दुनिया में आतंक फैला रहे हैं, जो दुनिया में हिंसा फैला रहे हैं, उनमें भी कई हाइली शिक्षित और हाइली स्किल लोग हैं. उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ ऐसे भी लोग हैं जो कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से दुनिया को मुक्ति दिलाने के लिए दिनरात प्रयोगशालाओं में जुटे हुए हैं. मोदी ने कहा, 'ये सिर्फ विचारधारा का प्रश्न नहीं है, बल्कि माइंडसेट का भी विषय है. आप क्या करते हैं, ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपका माइंडसेट पॉजिटिव है या नेगेटिव है.'

फैसला लेने में डरें नहीं- मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर आपकी नीयत साफ है और निष्ठा मां भारती के प्रति है, तो आपका हर निर्णय किसी ना किसी समाधान की तरफ ही बढ़ेगा. सफलता और असफलता हमारा वर्तमान और भविष्य तय नहीं करती. हो सकता है आपको किसी फैसले के बाद जैसा सोचा था वैसा परिणाम न मिले, लेकिन आपको फैसला लेने में डरना नहीं चाहिए. मोदी ने कहा कि आज भारत में जो नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनी है, वो भी पुरानी बेड़ियों को तोड़ने के साथ ही, विद्यार्थियों को अपना सामर्थ्य दिखाने की पूरी आजादी देती. ये शिक्षा नीति आपको अलग-अलग विषयों को पढ़ने की आजादी देती है. ये शिक्षा नीति, आपको अपनी भाषा में पढ़ने का विकल्प देती है.

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प्रधानमंत्री ने छात्रों से की ये अपील

नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत जो है, जो मानवता, जो आत्मीयता, जो विश्व कल्याण की भावना हमारे रक्त के कण-कण में है, उसका ऐहसास बाकी देशों को कराने के लिए विश्व भारती को देश की शिक्षा संस्थाओं का नेतृत्व करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मेरा आग्रह है, अगले 25 वर्षों के लिए विश्व भारती के विद्यार्थी मिलकर एक विजन डॉक्यूमेंट बनाएं. वर्ष 2047 में, जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष का समारोह बनाएगा, तब तक विश्व भारती के 25 सबसे बड़े लक्ष्य क्या होंगे, ये इस विजन डॉक्यूमेंट में रखे जा सकते हैं.

First Published : 19 Feb 2021, 01:09:56 PM

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