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SCO बैठक में बोले PM नरेन्द्र मोदी, कट्टरता दुनिया के लिए बड़ा खतरा

पीएम मोदी ने तीनों नए डायलॉग पार्टनर्स- सऊदी अरब, मिस्र और कतर का स्वागत किया. पीएम मोदी ने कहा, 'भारत में और एससीओ के लगभग सभी देशों में, इस्लाम से जुड़ी उदारवादी, सहिष्णु और समावेशी संस्थाएं और परम्पराएं हैं

News Nation Bureau | Edited By : Kuldeep Singh | Updated on: 17 Sep 2021, 01:25:13 PM
PM Modi

पीएम मोदी ने SCO की बैठक को किया संबोधित (Photo Credit: ANI)

highlights

  • सऊदी अरब, मिस्र और कतर का किया स्वागत
  • अफगानिस्तान के हालात पर जताई चिंता
  • बैठक में शामिल हुए पाक पीएम इमरान खान

नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) शुक्रवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की शिखर बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े. उन्होंने अपने संबोधन में ताजिकिस्तान के लोगों को आजादी के तीसवें पर्व की बधाई दी. इस मौके पर पीएम मोदी ने तीनों नए डायलॉग पार्टनर्स- सऊदी अरब, मिस्र और कतर का स्वागत किया. पीएम मोदी ने कहा, 'भारत में और एससीओ के लगभग सभी देशों में, इस्लाम से जुड़ी उदारवादी, सहिष्णु और समावेशी संस्थाएं और परम्पराएं हैं. एससीओ को इनके बीच एक मजबूत तंत्र विकसित करने के लिए काम करना चाहिए.'

यह बैठक ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में चल रही है. इसमें भारत के अलावा चीन, रूस, पाकिस्तान और कुछ मध्य एशियाई देश भी शामिल हुए हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मीटिंग के लिए दुशांबे में उपस्थित हैं. पीएम मोदी ने कहा कि इस साल हम एससीओ की भी 20वीं वर्षगांठ मना रहे हैं. अच्छी बात है कि इस संगठन में नए लोग भी जुड़ रहे हैं. नए साझेदारों के जुड़ने से एससीओ और भी क्रेडिबल बनेगा. पीएम ने इस मौके पर तीनों नए डायलॉग पार्टनर्स- सऊदी अरब, मिस्र और कतर का स्वागत किया. 

यह भी पढ़ेंः कट्टरता का बड़ा उदाहरण अफगानिस्तान, SCO में बोले PM मोदी

कट्टरपंथ एक बड़ी 
पीएम मोदी ने कहा कि एससीओ की 20वीं वर्षगांठ इस संगठन के भविष्य के बारे में भी सोचने का अवसर है. इन समस्याओं का बढ़ता हुआ कारण कट्टरपंथ (रैडिकलाइजेशन) है. अफगानिस्तान में हालिया घटनाओं ने इस चुनौती को और स्पष्ट कर दिया है. इस मुद्दे पर एससीओ को पहल लेकर काम करना चाहिए. अगर हम इतिहास पर नजर डालें तो मध्य एशिया का क्षेत्र प्रोग्रेसिव कल्चर और वैल्यूज का गढ़ रहा है.

बैठक में पीएम मोदी ने रुपये कार्ड, यूपीआइ और कोविन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, चाहे वित्तीय समावेशन बढ़ाने के लिए यूपीआइ और रुपेय कार्ड जैसी तकनीक हों, या कोविड से लड़ाई में हमारे आरोग्य-सेतु और कोविन जैसे डिजिटल प्लेटफार्म्स इन सभी को हमने स्वेच्छा से अन्य देशों के साथ भी साझा किया है.

पीएम ने कहा, "मध्य एशिया की इस धरोहर के लिए एससीओ को कट्टरपंथ से लड़ने का एक साझा टेंपलेट बनाना चाहिए. भारत में और एससीओ के लगभग सभी देशों में, इस्लाम से जुड़ी उदाहरवादी, सहिष्णु और समावेशी संस्थाएं और परम्पराएं मौजूद हैं. एससीओ को इनके बीच एक मजबूत नेटवर्क विकसित करने के लिए काम करना चाहिए. इस सन्दर्भ में मैं एससीओ के रैट्स मैकेनिज्म (RATS mechanism) द्वारा किए जा रहे उपयोगी कार्यों की प्रशंसा करता हूं."

First Published : 17 Sep 2021, 01:21:02 PM

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