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जानें आखिर पीएम मोदी ने अयोध्या फैसले को बर्लिन की दीवार से क्यों जोड़ा

अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को विवादित पूरी 2.77 एकड़ जमीन राम लला को दे दी.

News Nation Bureau | Edited By : Yogesh Bhadauriya | Updated on: 09 Nov 2019, 07:30:25 PM
पीएम मोदी(फाइल फोटो)

पीएम मोदी(फाइल फोटो) (Photo Credit: News State)

New Delhi:

हिन्‍दुओं (Hindu) के सबसे बड़े आराध्‍य श्रीराम (SriRam) का अयोध्‍या में मंदिर बनने का रास्‍ता सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है. अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को विवादित पूरी 2.77 एकड़ जमीन राम लला को दे दी. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कानूनी तौर पर श्रीराम को एक व्‍यक्‍ति मानते हुए अयोध्‍या (Ayodhya) में राम मंदिर का रास्‍ता साफ कर दिया है. वहीं अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने अयोध्या फैलले को बर्लिन की दीवार से जोड़ेते हुए आज के दिन की तारीफ की.

पीएम मोदी ने कहा कि आज 9 नवंबर है. ये वही तारीख है जब बर्लिन की दीवार गिरी थी. दो विपरीत धाराओं ने एकजुट होकर नया संकल्प लिया था. उन्‍होंने कहा कि आज 9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर की भी शुरुआत हुई है. इसमें भारत और पाकिस्‍तान दोनों देशों का योगदान रहा है. आज की तारीख हमें साथ रहकर आगे बढ़ने का संदेश दे रही है.

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जानें बर्लिन की दीवार की क्या है कहानी

बर्लिन शहर को दो हिस्सों में बांटने वाली दीवार 13 अगस्त 1961 को खड़ी की गई. 09 नवंबर 1989 को ये गिरा दी गई. दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मनी दो देशों में भी बंट गया था. पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी. इन दोनों देशों का भी दीवार गिरने के बाद एकीकरण हो गया था.

1950 और 1960 के दशक के शीत युद्ध में पश्चिमी देश बर्लिन को पूर्वी ब्लॉक की जासूसी के लिए भी इस्तेमाल करते थे. जब तक सीमा खुली थी तो वे रूसी सेक्टर में चले जाते थे. 1960 में लगभग 80 जासूसी सेंटर थे. इतने ही सेंटर पूर्वी ब्लॉक के खिलाफ भी काम कर रहे थे. इस तरह के जासूसी युद्ध को उस जमाने में खामोश युद्ध कहा जाता था.

इन्हीं सब वजहों से परेशान होकर 1961 में 12 और 13 अगस्त की रात पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन की सीमा को बंद कर दिया गया. हजारों सैनिक सीमा पर तैनात किए गए और मजदूरों ने कंटीले तार लगाने शुरू किए. इसके बाद वहां दीवार बननी शुरू हुई. यह काम रात को एक बजे शुरू किया गया. सड़कों पर जलने वाली लाइटें भी बंद कर दी गईं ताकि पश्चिमी हिस्से के लोगों को पता न चले. सुबह तक शहर दो हिस्सों में बंट चुका था और लोगों को पता ही नहीं चल रहा था कि क्या हो रहा है. समय बीतता गया और लोग दीवार पार कर अपनों से मिलने की कोशिश करते रहे. करीब तीन दशक तक पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन को अलग-अलग रखने के बाद आखिरकार साल 1989 में बर्लिन की दीवार गिरा दी गई. दीवार का गिरना आखिरकार जर्मन एकीकरण का कारण साबित हुआ.

क्या हुआ था जर्मनी के विभाजन के बाद

दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब जर्मनी का विभाजन हो गया, तो सैकड़ों कारीगर और व्यवसायी रोज पूर्वी बर्लिन को छोड़कर पश्चिमी बर्लिन जाने लगे. बहुत से लोग राजनैतिक कारणों से भी समाजवादी पूर्वी जर्मनी को छोड़कर पूंजीवाद जर्मनी यानी पश्चिमी जर्मनी जाने लगे. इससे पूर्वी जर्मनी को आर्थिक और राजनीतिक रूप से बहुत हानि होने लगी. बर्लिन दीवार का उद्देश्य इसे रोकना था. इस दीवार के विचार की कल्पना वाल्टर उल्ब्रिख्त ने की थी. सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने इसे मंजूरी दी.

First Published : 09 Nov 2019, 07:30:25 PM

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