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करतारपुर काॅरिडोर (फोटो-पीटीआई)
पाकिस्तान ने 28 नवंबर को सीमा पर अपनी ओर करतारपुर गलियारे की आधारशिला रखी. पड़ोसी मुल्क ने नवंबर में बगैर वीजा के भारत के सिखों को नरोवाल जिला स्थित करतारपुर साहिब गुरुद्वारा की तीर्थयात्रा करने के लिए करतारपुर सीमा खोल दिया था. पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर गलियारे को लेकर भारत को एक प्रस्ताव भेजा है. इस प्रपोजल के मुताबिक, पाकिस्तान इस यात्रा के लिए परमिट जारी करेगा. एक दिन में 500 श्रद्धालु को ही प्रवेश दिया जाएगा. इसके साथ ही भारत को तीन दिन पहले यात्रियों की जानकारी देना अनिवार्य है. तीर्थयात्रियों के समूहों को परमिट मिलेगा. इन समूह में 15 लोग होने चाहिए. करतारपुर गलियारा सुबह आठ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक खुला रहेगा. यात्रियों के नाम और उनकी पिछली यात्राओं की जानकारी का डेटाबेस तैयार किया जाएगा.
Pak media: Pakistan Govt to send a proposal on #kartarpuracorridor to India, points in which will be- It will be a permit based entry, a passport is compulsory, not more than 500 pilgrims per day to be allowed, also India has to give 3-day prior info of visiting pilgrims.
— ANI (@ANI) December 29, 2018
मालूम हो कि पिछले महीने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने नवजोत सिंह सिद्धू ,सुषमा स्वराज, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और राज्य मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को निमंत्रण दिया था. उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू गुरदासपुर जिले के मान गांव में नए घोषित डेरा बाबा नानक-करतारपुर साहिब रोड गलियारे की आधारशिला रखी थी.
इससे पहले नवंबर में पाकिस्तान ने गुरु नानक की 549वीं जयंती के जारी समारोहों के लिए सिख तीर्थयात्रियों को 3,800 से अधिक वीजा जारी किए थे. करतारपुर साहिब गलियारे के निर्माण की मांग भारत दो दशक से करता आ रहा है, जहां गुरुनानक का निधन 1539 में हुआ था. यह धार्मिक स्थल भारतीय सीमा से दिखाई पड़ता है. सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव करतापुर में अपने जीवन के अंतिम 18 साल बिताए थे.
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