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अफगानिस्तान को लेकर चीन सतर्क, पाकिस्तान को करना पड़ रहा गंभीर स्थिति का सामना

अफगानिस्तान को लेकर चीन सतर्क, पाकिस्तान को करना पड़ रहा गंभीर स्थिति का सामना

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 19 Sep 2021, 01:20:02 AM
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(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

नई दिल्ली: अफगानिस्तान की स्थिति से निपटने के लिए पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है और वह इस बात से वाकिफ है कि आने वाले दिनों में अफगानिस्तान में उसकी भूमिका और जांच के दायरे में आएगी। यही वजह है कि पाकिस्तानी नेता अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस विचार को पेश करने के लिए उकसा रहे हैं कि अफगानिस्तान पाकिस्तान की नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है।

साथ ही, पाकिस्तान इस सिद्धांत का प्रचार कर रहा है कि यदि अंतर्राष्ट्रीय समर्थन और सहायता नहीं मिलती है, तो अफगानिस्तान में किसी भी नकारात्मक घटनाक्रम का असर इस क्षेत्र और दुनिया पर पड़ सकता है।

तथ्य यह है कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान के दखल की तुलना में उसकी कहीं और अधिक गहरी भूमिका है और उसे इस स्तर पर भूमिका निभाने से कोई रोक नहीं सकता। पाकिस्तान विभिन्न स्तरों पर अफगान व्यवस्था से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

इस बीच, काबुल में अंतरिम सरकार के गठन ने तालिबान या उनके पाकिस्तानी सलाहकारों की प्रशंसा करने के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी है, क्योंकि कैबिनेट में कट्टरपंथियों का भारी समावेश है। हक्कानी समूह के वर्चस्व ने निश्चित रूप से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को खतरे में डाल दिया है।

इस तरह तालिबान ने अपनी छवि सुधारने का एक अवसर गंवा दिया है और सरकार गठन और कार्यो के निष्पादन के संदर्भ में अपने इरादों के बारे में मिश्रित संकेत भेजे हैं। वे महिलाओं के अधिकारों और एक समावेशी सरकार को देने में भी विफल रहे हैं और इससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अधिक चिंतित है।

इसके अलावा, तालिबान के ढांचे में दरार और वरिष्ठ नेताओं के बीच हितों के टकराव ने भी एक मजबूत नकारात्मक संदेश भेजा है। मुल्ला बरादर के घायल होने और यहां तक कि मारे जाने की अटकलों के साथ तालिबान के रैंकों में दिखाई देने वाले मतभेदों के बारे में रिपोर्टों ने वर्तमान सरकार की विश्वसनीयता के बारे में संदेह बढ़ा दिया है।

यदि शुरुआत में ही सरकार के साथ मतभेद हो गए हैं, तो डिलीवरी का दायरा और संभावना सीमित होना तय है। यदि अंतर्निहित मतभेद बने रहते हैं, तो यह और भी बढ़ जाएगा, क्योंकि सरकार काम करना शुरू कर देती है और कई मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं।

कोई भी इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकता है कि नेताओं के आक्रामक चरित्र और प्रकृति और उनकी युद्ध-कठोर पृष्ठभूमि को देखते हुए, उनके मतभेदों के उस स्तर तक बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 19 Sep 2021, 01:20:02 AM

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