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लोकसभा चुनाव

दिल्ली में दंगाइयों ने भारी भूल की है, कीमत चुकानी होगी, हिंसा पर बोले जेडीयू नेता

बिहार में बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू के नेता अजय आलोक ने दंगाईयों को कीमत चुकाने की बात कही है.

Updated on: 25 Feb 2020, 04:11 PM

पटना:

दिल्ली के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में संशोधित नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act) को लेकर हिंसा जारी है. नारे लगाती दंगाइयों ने आज भी एक बाइक को आग के हवाले कर दिया. दो दमकल वाहनों को क्षति पहुंचाई गई है. दिल्ली (Delhi) में संशोधित नागरिकता कानून के विरोधियों और समर्थक समूहों के बीच हिंसा में अब तक 7 लोगों की जान चली गई है और करीब 150 लोग घायल हो गए. इस हिंसा को लेकर राजनीति भी जमकर हो रही है. सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं. इस बीच बिहार (Bihar) में बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू के नेता अजय आलोक ने दंगाईयों को कीमत चुकाने की बात कही है.

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जेडीयू नेता अजय आलोक ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा, 'अतिथि देवों भव: आज रात 10 बजे तक ही ये उत्पात चलेगा. उसके बाद हिंसा बंद हो जाएगी, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति और विश्व के सामने ये भारत को बदनाम कर चुके. लेकिन इनको ये नहीं पता कि इन्होंने कितनी भारी भूल की हैं और कीमत? वो तो चुकानी होगी. ये ब्लैक्मेल करेंगे? गोली मारेंगे?'

बिहार के विपक्षी दलों को भी निशाने पर लेते हुए अजय आलोक ने आगे लिखा, 'जब नीतीश कुमार ने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से कह दिया की NRC अस्तित्व में ही नहीं हैं. NPR पुराने फॉर्मेट में रहेगा. सवालों का जवाब अनिवार्य नहीं हैं, उसके बाद भी दिल्ली में हिंसा और बिहार की विधानसभा में हंगामा! ये क्या दर्शाता हैं? इनकी मंशा अव्यवस्था फैलाना हैं.'

उधर, एनपीआर को लेकर बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र को लिखा है कि एनपीआर के तहत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर 2010 में अंकित श्रेणियों से संबंधित सूचनाएं ही प्राप्त की जाएं, जिससे लोगों को कठिनाई नहीं हो.

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बता दें कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर आज बिहार विधानसभा में विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया. सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनपीआर को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बरगलाने का आरोप लगाया. तेजस्वी ने एनआरसी और एनपीआर को देश तोड़ने वाला काला कानून बताया. उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि विपक्ष देश के संविधान को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है, इसको बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. इस मुद्दे पर सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला. दोनों पक्षों के विधायक आमने-सामने आ गए. बढ़ते हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी.

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