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नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी (फाइल फोटो)
बिहार की राजनीति में आज अहम दिन है। गुरुवार तक महागठबंधन के सहयोग से मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार शुक्रवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के समर्थन से मुख्यमंत्री बने। अब नीतीश कुमार शनिवार को विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे। लेकिन उधर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने भी कमर कस ली है।
लालू यादव ने विधानसभा में 'गुप्त मतदान' कराने की मांग की है। शायद लालू यादव को भरोसा है कि जेडीयू के कई विधायक नीतीश कुमार के खिलाफ जाकर वोट करेंगे।
लालू यादव के घर शुक्रवार शाम हुई आरजेडी की बैठक के बाद एक विधायक ने कहा, 'हम विधानसभा में गुप्त मतदान की मांग करेंगे। तब हमें पता चल सकेगा कि कौन जीता और कौन हारा।'
वहीं नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू ने साफ कर दिया है कि उनके पास पूर्ण बहुमत है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बने रहेंगे। राज्यपाल को नीतीश ने 131 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा है। जिसके बाद राज्यपाल ने नीतीश को दो दिनों के भीतर विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा था।
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अधिकारिक बयान में कहा गया है कि शुक्रवार को बिहार विधानसभा की विशेष सत्र बुलाई गई है, जिसमें नवगठित मंत्रिपरिषद विश्वासमत प्राप्त करेगी।
क्या है सीटों का गणित
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में जेडीयू और बीजेपी को मिलाकर 129 विधायक हो जाएंगे, जो जरूरी बहुमत 122 से अधिक है। बिहार में आरजेडी के 80, जेडीयू के 71, बीजेपी गठबंधन के 58, कांग्रेस के 27, वामदलों के 3 और निर्दलीय 4 विधायक हैं। नीतीश के फैसले से उनके 15 विधायक नाराज बताए जा रहे हैं।
नीतीश सरकार में फिर मोदी
जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बिहार की महागठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के अगले दिन गुरुवार को फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
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जनादेश महागठबंधन को मिला था, जिसे धता बताते हुए नीतीश ने बीजेपी से गठबंधन कर नई सरकार बना ली है और महागठबंधन एक झटके में टूट गया है।
नीतीश छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं। उनकी नई मंत्रिपरिषद शुक्रवार को विश्वासमत प्राप्त करेगी। महागठबंधन के अचानक टूटने के बाद आरजेडी और जेडीयू में बगावत के सुर उभरने लगे हैं।
जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव और राज्यसभा सांसद अली अनवर ने नीतीश के फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने जेडीयू के अन्य नाराज नेताओं के साथ दिल्ली में बैठक की। जो नीतीश के लिए मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
लालू समर्थक नाराज
नीतीश के इस कदम से लालू प्रसाद के समर्थकों में जबर्दस्त आक्रोश है। पटना सहित कई जिलों में प्रदर्शन किया गया और सड़क जाम किया गया। पहलेजा में जिलाधिकारी पर पथराव किया गया। कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। जगह-जगह नीतीश का पुतला फूंका गया।
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आरजेडी के प्रवक्ता मनोज झा ने कहा, 'सबसे ज्यादा 80 विधायक राजद के पास हैं, इसके बावजूद प्रभारी राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने राजद को सरकार बनाने का न्योता नहीं देकर आनन-फानन में जदयू-भाजपा की सरकर बनवा दी। यह लोकतंत्र की हत्या है। ये पूरा घटनाक्रम सुनियोजित ढंग से हुआ है।'
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी ने भी कहा, 'नीतीश ने बिहार की जनता के साथ विश्वासघात किया है। जनता ने भाजपा के खिलाफ ऐतिहासिक जनादेश दिया था। यह बिहार की जनता का अपमान है।'
कैसे बदली तुरंत-तुरंत स्थितियां
नीतीश कुमार ने बुधवार की शाम मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके साथ ही 20 महीने पुरानी महागठबंधन सरकार अचानक गिर गई। इस्तीफे का कारण आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी के साथ नीतीश की तनातनी को माना जा रहा है। जद(यू) का कहना है कि तेजस्वी पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, लेकिन नीतीश के कहने के बावजूद उन्होंने इन आरोपों का तथ्यात्मक जवाब नहीं दिया।
वहीं लालू का कहना है कि आरोप निराधार है, तेजस्वी सीबीआई को जवाब देंगे, नीतीश सीबीआई के निदेशक नहीं हैं। जबकि नीतीश का कहना है कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर इस्तीफा दिया।
उधर, दिल्ली में बीजेपी संसदीय दल की बैठक हुई, वहां से आए फरमान के मुताबिक बीजेपी की बिहार इकाई ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनने वाली सरकार को समर्थन देने की घोषणा की।
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बीजेपी के समर्थन से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नीतीश ने बिहार के विकास का वादा किया। उन्होंने कहा, 'हमने यह निर्णय बिहार के विकास और यहां के लोगों के हित में लिया गया है। मेरा न्याय के साथ विकास का कार्यक्रम चलता रहेगा।'
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HIGHLIGHTS
- नीतीश कुमार आज बिहार विधानसभा में साबित करेेंगे बहुमत
- राज्यपाल को नीतीश ने 131 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा है
- आरजेडी बिहार विधानसभा में गुप्त मतदान की मांग करेगी
Source : News Nation Bureau
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