News Nation Logo

निर्भया गैंगरेप केसः सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की फांसी की सजा को रखा बरकरार

निर्भया गैंग रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में फांसी की सजा बरकरार रखा है।

News Nation Bureau | Edited By : Abhiranjan Kumar | Updated on: 05 May 2017, 03:37:19 PM
निर्भया गैंगरेप केसः दोषियों की फांसी की सजा कोर्ट ने रखा बरकरार

नई दिल्ली:

निर्भया गैंग रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में हाइकोर्ट की फांसी की सजा के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध ऐसा है जिसके लिये माफी की गुंजाइश नहीं थी। 

जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस बानुमति की बेंच ने यह फैसला सुनाया। तीनों जजों ने आपसी समहति से इस सजा पर फैसला दिया।

इससे पहले इसी साल 27 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, एमिकस क्यूरी और दोषियों के वकीलों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिसके बाद मांग उठ रही थी कि दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस तरह के जघन्य अपराध के लिये माफी की गुंजाइश नहीं हो सकती है, ऐसे मामले में कड़ी सजा देने से समाज में एक संदेश जाएगा।

कोर्ट का कहना था कि लगता नहीं ये गुनाह इसी दुनिया में हुआ है, ये घटना सदमे की सुनामी थी। 

पढ़ें, कब क्या हुआ ?

16 दिंसबर 2012 - सर्दी की कंपकपाती रात दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका इलाके में 6 लोगों ने चलती बस में निर्भया से बलात्कार किया जिसमें एक नाबालिग भी शामिल था। निर्भया उस वक्त अपने एक दोस्त के साथ फिल्म देखकर वापस लौट रही थी।

11 मार्च 2013 - गैंगरेप के एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली।

31 अगस्त 2013 - मामले की सुनवाई में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग को गैंगरेप का दोषी पाया और उसे 3 साल के लिए बाल सुधार गृह में भेजने का फैसला दिया।

29 जनवरी 2013 - सुप्रीम कोर्ट ने केस के ट्रांसफर की याचिका को खारिज कर दिया।

सितंबर 2013 - जिला कोर्ट में गैंगरेप के बाकी चार आरोपियों को जज योगेश खन्ना ने फांसी की सजा सुनाई।

13 मार्च 2014 - हाई कोर्ट में दो जजों की बेंच( रेवा खेतरपाल और प्रतिभा रानी) ने निचली अदालत के फैसले पर रोक लगा दी।

15 मार्च 2014 - मामले की निष्पक्ष सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदलात से मिले सजा पर रोक लगा दी।

18 दिसंबर 2015 - गैंगेरप के नाबालिग आरोपी को जमानत देने से दिल्ली हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया।

3 अप्रैल 2016 - 19 महीने तक सुनवाई स्थगित रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट में निर्भया मामले की सुनवाई फिर शुरू हुई। जस्टिस दीपक मिश्रा, वी गोपाला गौड़ा और कुरियन जोसेफ की बेंच ने मामले की सुनवाई शुरू की।

8 अप्रैल 2016 - वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन और संजय हेगड़े को कोर्ट की तरफ से इस मामले में सलाहकार नियुक्त किया गया।

11 जुलाई 2016 - निर्भया मामले की सुनवाई करने वाले जजों के बेंच में बदलाव किया गया। नए बेंच में जस्टिस दीपक मिश्रा, आर भानूमति, औऱ अशोक भूषण को शामिल किया गया।

1 अगस्त 2016 - सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम नंबर 4 में माले की सुनवाई शुरू हुई।

29 अगस्त 2016 - कोर्ट रूम में सबूत से छेड़छाड़ को लेकर खूब ड्रामा हुआ। पुलिस पर सबूत से छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था।

इसे भी पढ़ेंः निर्भया बलात्कार के बाद भी नहीं बदले हालात, अभी भी 'रेप कैपिटल' है दिल्ली

2 सितंबर 2016 - वकील एमएल शर्मा ने अपने अपने बाते पूरी की।

16 सितंबर 2016 - निर्भया गैंगरेप की जांच से जुड़ी डीसीपी छाया शर्मा का दिल्ली से तबादला हो गया और उन्हें मिजोरम भेज दिया गया।

7 नवंबर 2016 - गैंगरेप मामले की जांच से जुड़ी डीसीपी छाया शर्मा मिजरोम से दिल्ली मामले की सुनवाई के लिए आई। 

28 नंवबर 2016 - वरिष्ठ वकील और मामले में कोर्ट के सलाहकार संजय हेगड़े ने निर्भया केस में सूबत की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए

6 जनवरी 2017 - सुप्रीम कोर्ट ने अभियुक्तों से घटना की परिस्थिति बताने का आदेश दिया।

3 फरवरी 2017 - केस की सुनवाई में अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फिर से मामले की सुनवाई करने का फैसला सुनाया।

इसे भी पढ़ेंः निर्भया गैंगरेप के ये हैं 6 गुनाहगार, सुप्रीम कोर्ट सुनाएगी अंतिम फैसला

6 मार्च 2017 - गैंगरेप के सभी आरोपियों ने कोर्ट में एडिशनल एफिडेविट दाखिल किया

27 मार्च 2017 - करीब 1 साल तक सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी थी कि इन चारों दोषियों ने बर्बर कृत्य किया है, चारों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। कोर्ट से उन्होंने मांग की थी कि सजा में कोई रियायत नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा था कि अदालत को फैसला देते वक्त इस वारदात के ना केवल पीड़ित लड़की पर बल्कि पूरे समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना चाहिए।

LIVE TV NN

NS

NS

First Published : 05 May 2017, 02:20:00 PM

For all the Latest India News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.