News Nation Logo
Banner

निर्भया केस: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दोषी अक्षय की दया याचिका खारिज की

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले के चार दोषियों में एक अक्षय कुमार सिंह की दया याचिका खारिज कर दी है.

News Nation Bureau | Edited By : Deepak Pandey | Updated on: 05 Feb 2020, 08:49:11 PM
निर्भया के दोषी

निर्भया के दोषी (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली:

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले के चार दोषियों में एक अक्षय कुमार सिंह की दया याचिका खारिज कर दी है. गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बुधवार को इस बारे में बताया. दोषी अक्षय ने कुछ दिन पहले राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल की थी. एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ने सिंह की दया याचिका खारिज कर दी. कोविंद मामले में दो अन्य आरोपियों मुकेश सिंह और विनय कुमार शर्मा की दया याचिका पहले ही खारिज कर चुके हैं.

यह भी पढ़ेंःराम मंदिर का केस लड़ने वाले वकील के. परासरन का घर बना राम मंदिर ट्रस्ट का अधिकारिक दफ्तर

बता दें कि दिल्‍ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसले में केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दी, जिसमें सरकार ने निर्भया के दोषियों को अलग-अलग फांसी की सजा देने की मांग की थी. केंद्र सरकार ने दिल्‍ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में याचिका दायर कर सभी दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की पैरवी की थी. केंद्र का कहना था कि जिन दोषियों की दया याचिका (Mercy Petition) राष्ट्रपति खारिज कर चुके हैं, उन्हें फांसी पर लटकाया जाना चाहिए. दोषी खुद को बचाने के लिए अलग-अलग दया याचिका राष्ट्रपति के पास दायर कर रहे हैं. लीगल रेमिडीस के नाम पर दोषी खुद को बचा रहे हैं और इससे पीड़ित परिवार को न्‍याय मिलने में देरी हो रही है. यह दोषियों की डिले टैक्टिक्स है.

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने दोषियों को एक सप्ताह में सभी कानूनी विकल्प लेने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा, हाईकोर्ट की याचिका का हाईकोर्ट में ही निपटारा किया जाए. कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि निर्भया के दोषियों को जल्द ही फांसी मिल सकेगी. कोर्ट ने पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए सभी दोषियों को एक साथ फांसी दिए जाने को सही माना.

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्‍ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा था कि दोषी सजा के अमल में विलंब करने की सुनियोजित चाल चल रहे हैं. दूसरी ओर, दोषियों के वकील एपी सिंह और दोषी मुकेश की वकील रेबेका जॉन ने केंद्र सरकार की याचिका पर ऐतराज जताते हुए कहा था- दोषी मुकेश की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने देरी के आधार पर नहीं बल्कि मेरिट के आधार पर खारिज की है. निर्भया की मां ने भी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच के सामने मेंशनिंग कर फैसला जल्द सुनाए जाने की मांग की थी.

यह भी पढ़ेंःशाहीन बाग का शूटर यदि आप से है, तो उसे दोगुनी सजा दी जानी चाहिए: अरविंद केजरीवाल

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए दो बार डेथ वारंट (Death Warrant) जारी कर चुका है, लेकिन कानूनी दांवपेंच के चक्‍कर में दोनों बार चारों दोषियों की फांसी टल चुकी है.

क्या है निर्भया गैंगरेप केस

दोस्त के साथ दक्षिण दिल्ली के मुनिरका इलाके में बस स्टैंड पर खड़ी 23 साल की एक पैरामेडिकल स्टूडेंट के साथ 16 दिसंबर 2012 की रात बस में एक नाबालिग समेत 6 लोगों ने न केवल गैंगरेप किया था, बल्‍कि बर्बर तरीके से मारपीट भी की थी. गैंगरेप के बाद पीड़िता को चलती बस से फेंक दिया गया था. पैरामेडिकल स्‍टूडेंट अपने फ्रेंड के साथ फिल्म देखकर घर लौट रहे थे. बुरी तरह जख्मी युवती को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर सिंगापुर ले जाया गया था, जहां 29 दिसंबर, 2012 को उसकी मौत हो गई थी.

LIVE TV NN

NS

NS

First Published : 05 Feb 2020, 08:25:22 PM

For all the Latest India News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.