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निर्भया केसः 22 जनवरी को नहीं होगी दोषियों को फांसी, गृह मंत्रालय पहुंची दया याचिका

गुरुवार को सुनवाई के दौरान पटियाला हाउस कोर्ट ने जेल प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट में जेल प्रशासन को बताना होगा कि मर्सी पेटिशन दायर होने के बाद क्या जेल प्रशासन नियम के मुताबिक फांसी के समय मे बदलाव कर रहा है.

News Nation Bureau | Edited By : Kuldeep Singh | Updated on: 16 Jan 2020, 06:45:58 PM
निर्भया केस के आरोपी मुकेश, अक्षय, विनय और पवन

निर्भया केस के आरोपी मुकेश, अक्षय, विनय और पवन (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

निर्भया गैंग रेप मामले के दोषियों को 22 जनवरी को फांसी नहीं दी जाएगी. कोर्ट ने सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि अगर ये भी मान लें कि कल परसों में ही राष्ट्रपति खारिज भी कर देते हैं तो भी हमको उसके बाद भी 14 दिन का वक़्त देना पड़ेगा ही इसका मतलब तो यही है कि 22 जनवरी को कानूनन तौर पर फांसी हो ही नहीं सकती. फिलहाल दोषी मुकेश को निचली अदालत से भी कोई राहत नहीं मिली है. गुरुवार को सुनवाई के दौरान पटियाला हाउस कोर्ट ने जेल प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट में जेल प्रशासन को बताना होगा कि मर्सी पेटिशन दायर होने के बाद क्या जेल प्रशासन नियम के मुताबिक फांसी के समय मे बदलाव कर रहा है. अब इस मामले में शुक्रवार को दोबारा सुनवाई की जाएगी. उधर उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज होने के बाद उसे गृह मंत्रालय भेज दिया गया है. गृह मंत्रालय मुकेश की फाइल देखने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजेगा.

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गुरुवार को दोषी मुकेश ने डेथ वारंट वाले आदेश को निरस्त करने और डेथ वांरट पर रोक लगाने की मांग की. पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि हम मानते है कि ट्रायल कोर्ट के डेथ वारंट के आदेश में कोई खामी नहीं है. हमने हाई कोर्ट में दायर अर्जी में आपके आदेश में कोई खामी नहीं बताई थी, लेकिन डेथ वारंट के आदेश जारी होने के बाद चीजे बदली हैं. हमने रास्ट्रपति के सामने दया याचिका लगाई है. सुप्रीम कोर्ट का शत्रुघ्न केस में फैसला है कि दया याचिका खारिज होने के बाद भी 14 दिनों की मोहलत मिलनी चाहिए. इसलिए हम कह रहे है कि डेथ वारंट का आदेश पर अमल सम्भव नहीं है.

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18 दिसंबर के बाद मुझे इस केस में कोर्ट की ओर से मुकेश की पैरवी करने को कहा गया है. इससे पहले जो दोषियों की ओर से देरी हुई है, उसको मैं बदल नहीं सकती. उन्होंने कहा कि हम इस बात को जेल प्रशासन पर नहीं छोड़ सकते हैं क्योंकि यह किसी की ज़िंदगी का सवाल है. कोर्ट को इस मामले में साफ साफ निर्देश देना चाहिए. मैं जानती हूँ कि इस मामले को लेकर जज़्बात हावी है, लेकिन हमें देखना होगा कि कानून क्या कहता है.

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उन्होंने कहा कि मैंने दया याचिका दायर करने के लिये तिहाड़ जेल अधिकारियों से दस्तावेज मांगे. उन्होंने मेरी एप्लीकेशन का जवाब तक नहीं दिया. हम उन पर क्या विश्वास कर सकते है. कोर्ट को साफ निर्देश देने चाहिए, अगर उन्हे फांसी तो क़ानूनी प्रकिया के तहत हो, मेरे क़ानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए मुझे ब्लेम नहीं किया जा सकता. तिहाड़ जेल के वकील इरफान ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार को दया याचिका दायर करने के बारे में लिखा है. हम उनके जवाब का इतंज़ार कर रहे है. जैसे ही उनका जवाब आएगा, हम कोर्ट को सूचित करेंगे लेकिन डेथ वारंट के आदेश पर रोक लगाने की ज़रूरत नहीं है. निर्भया के वकील जितेंद्र झा ने कहा कि एक बार कोर्ट ने सेक्शन 413 के तहत डेथ वारंट जारी करने अपने अधिकार का इस्तेमाल कर लिया, उसे बदला नहीं जा सकता.

First Published : 16 Jan 2020, 03:42:08 PM

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