News Nation Logo
कोविड के खिलाफ लड़ाई में भी भारत और रूस के बीच सहयोग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में 85 फीसदी पात्र आबादी को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगा दी गई है: मनसुख मंडाविया दिल्ली में इस साल डेंगू से अब तक 15 मरीजों की मौत बीते 6 साल में डेंगू से मौत का सबसे बड़ा आंकड़ा शाही ईदगाह मस्जिद की जगह पर भव्य श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण के लिए संकल्प यज्ञ किया गया ओमिक्रोन के अलर्ट के बीच पटना में 100 विदेशियों की तलाश भारत ने न्यूजीलैंड को 372 रन से हराकर टेस्ट मैच श्रृंखला 1-0 से जीती टीम इंडिया ने घर में लगातार 14वीं टेस्ट सीरीज जीती न्यूजीलैंड पर 372 रनों से जीत रनों के लिहाज से भारत की टेस्ट मैचों में सबसे बड़ी जीत है उत्तराखंड के चमोली में देवल ब्लॉक के ब्रह्मताल ट्रेक मार्ग पर बर्फबारी हुई रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के साथ नई दिल्ली में बैठक की

आगरा में 30 फीट गहरे बोरवेल से रेस्क्यू की गई नीलगाय, बिलाव

आगरा में 30 फीट गहरे बोरवेल से रेस्क्यू की गई नीलगाय, बिलाव

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 11 Nov 2021, 09:05:01 PM
NILGAI AND

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

आगरा: देश में खुले कुओं और बोरवेल का खतरा अभी भी बना हुआ है, क्योंकि इस खतरनाक स्थिति में जंगली जानवर गिरते रहते हैं और अपनी जान जोखिम में डालते हैं। आगरा के एत्मादपुर स्थित राहन कलां गांव में एक नीलगाय का बछड़ा 30 फुट गहरे कुएं में गिर गया। जब ग्रामीण नजदीक से देखने के लिए जमा हुए, तो नीलगाय के साथ एक बिलाव फंसा हुआ देखकर वे दंग रह गए। नर नीलगाय का बछड़ा और छोटा भारतीय बिलाव दोनों को 30 फुट गहरे खुले बोरवेल से रेस्क्यू किया गया।

वन्यजीव एसओएस के प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा दोनों जानवरों को सुरक्षित रूप से बचा लिया गया है और बाद में जंगल में वापस छोड़ दिया गया।

वन्यजीव एसओएस द्वारा दो सदस्यीय बचाव दल को तुरंत आवश्यक बचाव उपकरण और चिकित्सा सहायता के साथ भेजा गया, ताकि गिरने के दौरान जानवरों को लगी किसी भी चोट का इलाज किया जा सके।

दो घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बोरवेल से जानवरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वन्यजीव एसओएस पशु चिकित्सकों द्वारा गहन चिकित्सा जांच के बाद, नीलगाय और बिलाव को सुरक्षित रूप से वापस जंगल में छोड़ दिया गया।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, खुले कुएं न केवल वन्यजीवों के लिए, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा हैं। कुओं को कवर करने की तत्काल आवश्यकता है, खासकर जो परिधि पर हैं समय पर वन विभाग और वन्यजीव एसओएस तक पहुंचने के लिए हम लोगों के बहुत आभारी हैं।

वन्यजीव एसओएस के संरक्षण परियोजनाओं के निदेशक, बैजुराज एमवी ने कहा, एक जंगली जानवर को बचाने के लिए बहुत विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। बचाव अभियान के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए हमारी टीम को एक-एक करके दोनों जानवरों को निकालना पड़ा। हमारे बचाव दल पूरे दिन काम करते हैं। हमारी रेस्क्यू टीम चौबीसों घंटे काम करती हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जानवरों की सहायता के लिए आई कोई भी कॉल खाली ना रह जाए।

नीलगाय (बोसेलाफस ट्रैगोकैमेलस) सबसे बड़ा एशियाई मृग है और यह भारतीय उपमहाद्वीप के लिए स्थानिक है। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-3 के तहत संरक्षित है।

छोटा भारतीय बिलाव (विवरिकुला इंडिका), जिसे ओरिएंटल सिवेट भी कहा जाता है, दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया का मूल निवासी है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची- 3 के तहत उच्च मांग के कारण खतरे में रहते हैं।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 11 Nov 2021, 09:05:01 PM

For all the Latest India News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.