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वैश्विक शासन के लिए चीन का प्रस्ताव : विभिन्न सभ्यताओं को एक ही सुंदरता साझा करें

वैश्विक शासन के लिए चीन का प्रस्ताव : विभिन्न सभ्यताओं को एक ही सुंदरता साझा करें

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 04 Oct 2021, 10:10:01 PM
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(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

बीजिंग: लंबे इतिहास में मानव ने रंगीन सभ्यताओं का निर्माण और विकास किया है। चाहे चीनी राष्ट्र की सभ्यता हो, या विश्व के अन्य राष्ट्रों की सभ्यताएं ही क्यों न हो, सभी मानव सभ्यता का फल है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कई बार विभिन्न स्थलों में सभ्यताओं के आदान-प्रदान और आपसी सीख को लेकर अपना विचार व्यक्त किया। वे सभ्यता की नई अवधारणा की वकालत करते हैं, जो मानव जाति के साझे भाग्य वाले समुदाय की विचारधारा के मार्गदर्शन पर विभिन्न सभ्यताओं को एक दूसरे के फर्क मानते हुए आपसी सम्मान को बल देता है, और एक दूसरे से सीखता है। सभ्यता की नई अवधारणा सामंजस्यपूर्ण है लेकिन अलग है, जो विश्व शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए चीन के प्रयासों को दुनिया को दिखाती है।

शी चिनफिंग ने कहा कि विभिन्न सभ्यताओं के साथ व्यवहार करते समय हमें आकाश से विशाल मन की आवश्यकता है। हमें विभिन्न सभ्यताओं के पारस्परिक सम्मान, सद्भाव में सह-अस्तित्व को बढ़ाना चाहिए, ताकि सभ्यता के आदान-प्रदान और आपसी सीख विभिन्न देशों की जनता के बीच मैत्री को बढ़ाने वाले सेतु बन सके, मानव समाज की प्रगति को आगे बढ़ाने की प्रेरक शक्ति बन सके और विश्व शांति की रक्षा का बंधन बन सके।

मार्च 2014 में, शी चिनफिंग ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र यूनेस्को के मंच पर भाषण दिया। उन्होंने कहा के सभ्यताएं आदान-प्रदान के कारण रंगीन होती हैं, और सभ्यताएं परस्पर सीखने के कारण समृद्ध होती हैं। सभ्यता का आदान-प्रदान और आपसी सीख मानव सभ्यता की उन्नति और दुनिया के शांतिपूर्ण विकास के लिए एक महत्वपूर्ण प्रेरक शक्ति है।

इधर के सालों में शी चिनफिंग विभिन्न स्थलों में कई बार सभ्यता की चीन की अवधारणा पेश की और विभिन्न सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान तथा आपसी सीख को मजबूत करने के लिए सिलसिलेवार महत्वपूर्ण चचार्एं कीं, जिनसे दुनिया को सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान और आपसी सीख को मजबूत करने और मानव सभ्यता की प्रगति को बढ़ावा देने पर चीन की सोच को समझने का मौका मिला है।

शी चिनफिंग का कहना है कि विभिन्न इतिहास और राष्ट्रीय परिस्थितियों, विभिन्न राष्ट्रीयताओं और रीति-रिवाजों ने विभिन्न सभ्यताओं का पोषण किया है और दुनिया को और रंगीन बना दिया है। सभ्यता में श्रेष्ठता और हीनता में कोई अंतर नहीं है, केवल विशेषताओं और क्षेत्रों के बीच का अंतर है। सभ्यता के अंतर को दुनिया में संघर्ष का स्रोत नहीं बनना चाहिए, बल्कि मानव सभ्यता की प्रगति के लिए प्रेरक शक्ति बनना चाहिए। विभिन्न सभ्यताओं को एक दूसरे की ताकत से सीखना चाहिए और एक साथ प्रगति करनी चाहिए।

सभ्यताओं का आदान-प्रदान और आपसी सीख जनता के बीच संपर्क का पुल है, अंतरराष्ट्रीय आवाजाही में इसकी एक अपूरणीय भूमिका है। बीते कुछ सालों में हर एक बार की विदेशी यात्रा के दौरान, शी चिनफिंग ने विभिन्न देशों में विभिन्न जगतों के लोगों से संपर्क किया। उन्होंने विभिन्न संस्कृतियों और सभ्यताओं के बीच संवाद और आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया। वे किसान के घर गए, कारखाने का दौरा किया और समुद्री घाट की यात्रा भी की। वे विभिन्न देशों के आम नागरिकों को पास गए। कोस्टा रिका में उन्होंने कॉफी बागान में जाकर किसानों के साथ कॉफी और चाय दोनों संस्कृतियों के संलयन से चीन और लातिन अमेरिका के दो महाद्वीपों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के बारे में बात की। रूस में उन्होंने चीन के जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध में सहायता देने वाले सोवियत संघ के वृद्ध योद्धा को पदक दिया और कहा कि हम अपने पुराने दोस्तों को कभी नहीं भूलेंगे जो एक ही नाव में थे और एक दूसरे का समर्थन करते थे।

नवम्बर 2019 में ग्रीस की राजकीय यात्रा पर शी चिनफिंग ने पूर्व राष्ट्रपति प्रोकोपिस पावलोपोलोस के साथ हुई भेंट-वार्ता में कहा कि दोनों प्राचीन सभ्य देश होने के नाते चीन और ग्रीस के पास समान या मिलती-जुलती विचारधारा है। चीन-ग्रीस दोस्ती दोनों देशों का सहयोग ही नहीं, दोनों बड़ी सभ्यताओं के बीच संवाद भी है। उन्हें आशा है कि चीन और ग्रीस सहयोग को गहराते हुए सभ्यताओं के आदान-प्रदान को आगे बढ़ाएंगे, ज्यादा न्यायसंगत और उचित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत करेंगे, ताकि दो प्राचीन सभ्यताओं वाले देश के रूप में चीन और ग्रीस नए युग में नई रोशनी से चमकेंगी।

इस वर्ष अप्रैल महीने में दक्षिण चीन के हाईनान प्रांत में आयोजित बोआओ एशिया मंच के वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपने वीडियो भाषण में एक बार फिर उल्लेख किया कि जब देश एक दूसरे के साथ हो जाते हैं, तो एक दूसरे के साथ समान व्यवहार करना, आपसी सम्मान करना और पारस्परिक विश्वास करना आवश्यक है। हमें शांति, विकास, निष्पक्षता, न्याय, लोकतंत्र और स्वतंत्रता वाले मानव जाति के समान मूल्य को बढ़ावा देना चाहिए, विभिन्न सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान और आपसी सीख की वकालत करनी चाहिए। शी चिनफिंग ने घोषणा की कि जैसे ही महामारी को नियंत्रण में लाया जाएगा, चीन एशियाई सभ्यताओं के संवाद पर दूसरे सम्मेलन की मेजबानी करेगा, ताकि एशियाई और वैश्विक सभ्यताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाई जा सके।

( साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग )

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First Published : 04 Oct 2021, 10:10:01 PM

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