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स्वर्गीय मार्ग तिब्बती लोगों को खुशियां दिलाता है

स्वर्गीय मार्ग तिब्बती लोगों को खुशियां दिलाता है

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 23 Aug 2021, 10:25:01 PM
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(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

बीजिंग: जुलाई 2021 में, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव शी चिनफिंग ने तिब्बत का दौरा किया और न्यिंगची से ल्हासा तक ट्रेन की सेवा लेकर तिब्बत में रेलवे निर्माण का निरीक्षण किया। अभी तक तिब्बत में छींगहाई-तिब्बत रेलवे के अलावा, सिचुआन-तिब्बत रेलवे, युन्नान-तिब्बत रेलवे और शिनच्यांग-तिब्बत रेलवे का भी निर्माण किया जा रहा है या किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने इन रेल मार्गों की स्वर्गीय मार्ग के रूप में प्रशंसा की है जो स्थानीय लोगों को खुशियां दिला रहे हैं।

पुराने तिब्बत काल में, तिब्बत में रेलवे तो क्या, एक वास्तविक राजमार्ग भी नहीं था। शांतिपूर्ण मुक्ति के बाद, खासकर लोकतांत्रिक सुधारों के बाद, केंद्र ने तिब्बत के परिवहन के विकास में भारी निवेश किया। 1 जुलाई, 2006 को, 1956 किलोमीटर लम्बे छींगहाई-तिब्बत रेलवे को आधिकारिक तौर पर यातायात के लिए खोल दिया गया। एक लाख चीनी कर्मचारियों ने चार हजार मीटर ऊंचे पठार पर उच्च ठंड, ऑक्सीजन की कमी और जमी हुई मिट्टी जैसी कठिनाइयों को दूर कर रेलवे निर्माण के इतिहास में एक चमत्कार किया। इस रेल मार्ग के निर्माण से तिब्बत को भीतरी इलाकों के साथ जोड़ा गया है। तिब्बतियों ने न केवल पहली बार अपने दरवाजे पर रेलवे को देखा, बल्कि वे ट्रेन से अंतदेर्शीय क्षेत्रों की यात्रा कर सकते हैं। मुख्य भूमि की ओर से यात्री और माल भी इस रेलवे के साथ तिब्बत आ सकते हैं।

हालांकि, केवल छींगहाई-तिब्बत रेलवे का निर्माण तिब्बत के विकास की जरूरतों को पूरा नहीं किया जाएगा। अब सिचुआन-तिब्बत रेलवे और युन्नान-तिब्बत रेलवे का निर्माण भी किया जा रहा है, और भविष्य में शिनच्यांग-तिब्बत रेलवे का निर्माण भी किया जाएगा। 1700 किलोमीटर लंबी सिचुआन-तिब्बत रेलवे तिब्बत के विकास को बढ़ावा देने और लोगों की आजीविका में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण रेलवे मार्ग होगा। अभी तक याच्यांग स्टेशन से न्यिंगची तक तथा ल्हासा से शिगात्से तक का रेल मार्ग प्रशस्त किया जा चुका है। सिचुआन-तिब्बत रेलवे की तरह, युन्नान-तिब्बत रेलवे भी हेंगडुआन पर्वत से गुजर जाता है। इस रेलवे के कुनमिंग-लिजिआंग भाग को 2009 में ही खोला गया, और इस लाइन पर हाई स्पीड रेल गाड़ियों का प्रयोग 2019 में शुरू होने लगा। हालांकि, शिनच्यांग-तिब्बत रेलवे का निर्माण सबसे कठिन है। शिनच्यांग-तिब्बत रेलवे की औसत ऊंचाई 4,500 मीटर से अधिक है। इस रेलवे मार्ग को बर्फ से ढके पहाड़ों, बर्फ-नदियों और हजारों किलोमीटर लम्बे गोबी को भी पार करना होगा। वर्तमान में, शिनच्यांग-तिब्बत रेलवे योजना और सर्वेक्षण के चरण में है। पर योजनानुसार, यह लाइन शिनच्यांग के होटन से शुरू होकर लगभग 2,000 किलोमीटर की कुल लंबाई के साथ अली, शिगात्से से गुजरकर ल्हासा तक पहुंच जाएगी। तब तक तिब्बत समेत चीन का पूरा पश्चिमी क्षेत्र रेलवे नेटवर्क से कवर हो जाएगा।

तिब्बती पठार पर रेलवे नेटवर्क बनाने के लिए चीन ने क्यों भारी निवेश किया है? उत्तर यही है: तिब्बती जनता को खुशियां लाना। तिब्बती पठार अपने विशेष वातावरण के कारण लंबे समय से बंद है। रेलवे के बिना, बाहरी दुनिया के साथ बड़े पैमाने पर आदान-प्रदान नहीं हो सकता है, और आर्थिक विकास और लोगों की आजीविका में सुधार लाना भी मुश्किल है। अब तक खोली गई रेलवे लाइनों से सामग्रियों का सुचारू रूप से प्रवाहन किया जा रहा है, और यात्री भी पठार के सुंदर ²श्यों का आनंद लेने के लिए ट्रेन की सर्विस ले सकते हैं। भविष्य में तिब्बत रेलवे नेटवर्क के पूरा होने के बाद, पर्यटक विश्व प्रसिद्ध कुनलुन पर्वत, गंगडीस पर्वत और हिमालय की यात्रा करने के लिए ट्रेन ले सकेंगे, और रास्ते में बर्फ से ढके पहाड़ों, ग्लेशियरों, घास के मैदानों और रेगिस्तानों की सराहना भी कर सकेंगे। यह एक ऐसा मार्ग होगा, जिसके लिए पर्यटक अंतहीन तरसेंगे।

चीन के रेलवे निर्माण का उद्देश्य आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और रेलवे लाइन के क्षेत्रों के लोगों को ठोस लाभ पहुंचाना है। हालांकि, लंबी अवधि के नजरिए से चीनी रेलवे नेटवर्क से दुनिया के दूसरे देशों व क्षेत्रों को भी फायदा होगा। वर्तमान में, रूस और मध्य-पूर्वी यूरोप के लिए चीन की रेलवे ट्रेनें पूर्व और पश्चिम को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण व्यापार चैनल बन गई हैं। चीन से दक्षिण पूर्व एशिया की ओर जाने वाली रेलवे लाइन भी ट्रांस-एशियन रेलवे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा। भविष्य में तिब्बत के रेलवे मार्ग को निश्चित रूप से दक्षिण एशियाई रेलवे नेटवर्क के साथ जोड़ा जाएगा। भारतीय पर्यटकों के लिए नई दिल्ली से ट्रेन से चीनी राजधानी पेइचिंग तक यात्रा कर जाना मुश्किल नहीं होगा।

उधर रेलवे के निर्माण से भी लोगों की धारणा बदली है। ल्हासा स्थित नेपाल के पूर्व जनरल कौंसल लीला मणि बॉडेल ने तिब्बत में कई स्थानों का दौरा किया। छींगहाई-तिब्बत रेलवे पर उनकी यात्रा ने उन पर गहरी छाप छोड़ी है। बॉडेल ने कहा कि अतीत में उन्होंने तिब्बत के बारे में जो किताबें पढ़ीं, उनमें से अधिकांश पश्चिमी लोगों द्वारा लिखी गई थीं, जो न केवल ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लंघन करती थीं, बल्कि पूर्वाग्रह से भी भरी थीं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे पश्चिमी ²ष्टिकोण को छोड़कर तिब्बत की सच्चाइयों का पता लगाएं। उधर 2019 में चीन और नेपाल ने सीमा पार रेलवे के व्यवहार्यता पर अध्ययन शुरू करने की घोषणा की। एक नया स्वर्गीय मार्ग, जो हिमालय के दोनों किनारों को जोड़ेगा, को भी प्रशस्त होगा। और काठमांडू से ल्हासा के लिए ट्रेन लेने का सपना जल्द ही वास्तविक बन जाएगा।

(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 23 Aug 2021, 10:25:01 PM

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