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'मुस्लिम परिवार नियोजन नीति अपनाएं, गरीबी का कारण है बेरोकटोक जनसंख्या'

समुदाय के शिक्षित लोगों को आगे आना चाहिए और मुस्लिमों की गरीबी कम करने के लिए सरकार की मदद करनी चाहिए.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 11 Jun 2021, 01:39:13 PM
Hemanta Biswa Sarma

मदरसों पर भी दे चुके हैं कड़ा बयान. (Photo Credit: न्यूज नेशन)

highlights

  • जनसंख्या नियंत्रण के लिए मांगा अल्पसंख्यकों से समर्थन
  • गरीबी निवारण में बढ़ती बेरोकटोक जनसंख्या बड़ी अड़चन
  • मदरसों पर भी दे चुके हैं कठोर बयान

गुवाहटी:

असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने जनसंख्या नियंत्रण नीति पर मुस्लिम समुदाय से समर्थन मांग कर बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया है. उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय से परिवार नियोजन (Famil Planning) नीति अपनाने को कहा है. उन्होंने कहा असम सरकार को जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रण करके गरीबी कम करने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के समर्थन की जरूरत है. असम में सरकार के 30 दिन पूरे होने पर उन्होंने कहा, समुदाय के शिक्षित लोगों को आगे आना चाहिए और मुस्लिमों की गरीबी कम करने के लिए सरकार की मदद करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गरीबी का प्रमुख कारण जनसंख्या में बेरोकटोक वृद्धि है.

मदरसों पर भी दिया था बयान
लगभग एक महीने पहले असम में सीएम का पदभार ग्रहण करने वाले हेमंत बिस्व सरमा चुनाव प्रचार के दौरान भी अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े वक्तव्य देते रहे हैं. वह लगातार मदरसों को सामान्य स्कूलों की तरह चलाने की वकालत करते रहे हैं. उन्होंने कहा था कि आखिर मदरसा क्यों चाहिए? हम स्कूल-कॉलेज देंगे. आप बच्चों को डॉक्टर-इंजीनियर बनाओ.  सीएम ने कहा, उनकी सरकार मुस्लिम महिलाओं को शिक्षित करने की दिशा में प्रयास करेगी ताकि समस्या का प्रभावी तरीके से समाधान किया जा सके.

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बीते साल हुआ था फैसला
बीते साल दिसंबर महीने में राज्य में सरकारी मदरसों और संस्कृत स्कूलों को बंद करने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी दी गई थी. तब शिक्षा मंत्री रहे हेमंत ने कहा था कि असम में मदरसे अन्य सामान्य शिक्षण संस्थान की तरह काम करेंगे. उन्होंने कहा था कि हमारी कैबिनेट ने शिक्षा को सेकुलर बनाने का फैसला किया. असम में 198 उच्च मदरसा और 542 अन्य मदरसे किसी अन्य सामान्य शिक्षण संस्थान की तरह काम करेंगे और छात्रों को धर्मशास्त्र स्टडी में एडमिशन नहीं दिया जाएगा.

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सीएए पर भी राय है मुखर
गौरतलब है कि असम में सीएनए/एनआरसी को लेकर भी बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए थे. कांग्रेस ने इसे चुनाव प्रचार के दौरान बड़ा मुद्दा बनाया था. पार्टी ने पूरे राज्य में अभियान चलाकर एक लाख से ज्यादा असमिया गमछों पर सीएए विरोधी संदेश लिखवाए थे.

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First Published : 11 Jun 2021, 01:37:49 PM

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