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केवल शिक्षा नहीं, आधुनिक ट्रेनिंग के जरिए शिक्षकों का भी होगा कायाकल्प

केवल शिक्षा नहीं, आधुनिक ट्रेनिंग के जरिए शिक्षकों का भी होगा कायाकल्प

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 22 Jul 2021, 03:10:01 PM
Mumbai

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय अब देशभर में शिक्षकों के बेहतर प्रशिक्षण पर बल देगा। इसके तहत जहां शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में तब्दीली की जाएगी वहीं शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए कई नए सुधार किए जाएंगे।

शिक्षा मंत्रालय की नई सिफारिशों के तहत शिक्षकों की नियुक्ति में स्थानीय भाषा शैली में अध्यापक की पारंगता को प्रमुखता दी जाएगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शिक्षक बच्चों को सहजता से समझ सकें।

नई शिक्षा नीति में ग्रामीण शिक्षकों को आदर्श बनाने की बात भी कही गई है, ताकि उनकी शहरी क्षेत्रों की ओर दौडने की मंशा पर अंकुश लग सके। ग्रामीण शिक्षा के सु²ढ़ीकरण के लिए सरकार गांवों में आवासीय पाठशालाएं शुरू करेगी।

नई शिक्षा नीति के अंतर्गत किए गए एक महत्वपूर्ण सुधार के तहत शिक्षक बनने के लिए बीएड के चार वर्षीय पाठ्यक्रम की संस्तुति है। अभी तक यह पाठ्यक्रम दो वर्ष का था।

अब 12वीं कक्षा के बाद बीएड चार साल का पाठ्यक्रम होगा। प्रसिद्ध शिक्षाविद सीएस कांडपाल के मुताबिक विश्व भर में इस प्रक्रिया से बेहतर शिक्षक तैयार किए जा रहे हैं।

शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक अध्यापक जिस स्कूल में शिक्षा देते हैं उन्हें वहां के सामाजिक व सांस्कृतिक माहौल से परिचित होना चाहिए। सारे विश्व में यही अपेक्षा की जाती है कि प्राथमिक कक्षाओं के अध्यापक आसपास के क्षेत्रों के ही हों तो ज्यादा उपयोगी रहता है। ऐसा पहले भी किया गया है और अब व्यापक रूप से इसका क्रियान्वयन होगा।

इसी तरह शिक्षकों की कार्य कुशलता में बढ़ोत्तरी करने के लिए स्थानीय, क्षेत्रीय, राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्यशालाओं का आयोजन करने का प्रावधान किया गया है।

अध्यापकों को समग्र विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत वर्ष में 50 घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य रुप से लेना होगा। शिक्षकों को कम्प्यूटर व इंटरनेट के इस्तेमाल के प्रति प्रोत्साहित भी किया जाएगा।

शिक्षा नीति 2020 में शिक्षक भर्ती नियमों को पारदर्शी बनाने के लिए भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। नए नियमों के अंतर्गत कक्षा पहली से कक्षा बाहरवीं तक के अध्यापकों को अब टीईटी के साथ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए की परीक्षा भी उतीर्ण करनी होगी।

शिक्षकों को अपडेट करने के लिए एनसीईटी व एनसीईआरटी के सहयोग से नेशनल कॅरिकुलम फॉर टीचर एजुकेशन का गठन किया जाएगा ताकि राष्ट्र निर्माताओं शिक्षकों की कार्यकुशलता बेहतर हो सके।

शिक्षकों की कार्यक्षमता में वृद्धि करने के लिए वर्ष 2022 तक नेशनल प्रोफेशनल स्टैण्डर्ड फॉर टीचर्स ट्रेनिंग को गठित करने की सिफारिश की गई है। इससे शिक्षकों की नियुक्ति वेतन, पदोन्नति आदि की सुनिश्चितता, उसकी कार्यक्षमता के आधार पर तय की जा सकेगी।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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First Published : 22 Jul 2021, 03:10:01 PM

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