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MHA ने कट्टरवाद को विश्लेषण करने के लिए अध्ययन को दी मंजूरी, UAPA में बदलाव का दिया सुझाव 

गृह मंत्रालय ने कट्टरता की घटनाओं का विश्लेषण करने के लिए अध्ययन को मंजूरी दी है. साथ ही यूएपीए में बदलाव का भी सुझाव दिया है. प्रोफेसर जीएस वाजपेयी ने कहा कि कट्टरवाद पर वैज्ञानिक रूप से अध्यन किया जाए.

News Nation Bureau | Edited By : Sushil Kumar | Updated on: 22 Nov 2020, 06:09:15 PM
प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

गृह मंत्रालय ने कट्टरता की घटनाओं का विश्लेषण करने के लिए अध्ययन को मंजूरी दी है. साथ ही यूएपीए में बदलाव का भी सुझाव दिया है. प्रोफेसर जीएस वाजपेयी ने कहा कि कट्टरवाद पर वैज्ञानिक रूप से अध्यन किया जाए. हमने प्रोपोजल दिया और स्वीकार भी कर लिया. हम पिछले डेढ़ साल से इसपर अध्यन कर रहे थे. उसी आधार पर कट्टरता पर स्टडी करेंगे. इस शब्द का अर्थ है कि मुख्य विचारधारा से खिलाफ जा कर लोग बहक रहे हैं और आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं. ये इसका एक पक्ष है, दूसरा पक्ष है कि इसके आंकड़े हमारे पास है कि युवाओं को रिक्रूट किया जा रहा है. जिसके लिए 500 वेबसाइट है जो ये काम करती है. जिसका बकायदा मॉड्यूल है. जिसमें ये स्टेट वाइज काम करते हैं फिर वो परोक्ष रूप से शामिल होने लगता है.

स्टडी की 4 बातें 

1) यूथ इसमें ज्यादा इन्वॉल्व हैं 
2) इंटरनेट के माध्यम से ये किया जा रहा है.
3) परिवारो को पता ही नही की उनके बच्चे किस दिशा में जा रहे हैं.
4) महाराष्ट्र में हमने मॉडल देखा, जिसमें वहां ATS डी-radicalisation पर अलग-अलग तरीके से काम करती है. जिसके लिए सोशल वर्कर, साइकेट्रिस्ट, क्रिमलोगिस्ट की टीम बनाई जाती है. जो ये काम करती है जिसमें बताया जाता है कि ये आयत में ये लिखा तो उस आयत का सही अर्थ समझाया जाए.

पहले हम इस समस्या को मानते नहीं थे, अब जब मानने लगे हैं. इसके लिए डेटा बेस बनाया जाना चाहिए. जिसकी जिम्मेदारी राज्यों की है. प्लान ऑफ एक्शन बनाया जा सके. कानून में कट्टरता को परिभाषित नहीं किया गया है. कट्टरवाद धर्म विशेष तक सीमित नहीं है. इसलिए इसे परिभाषित किया जा सके. हर राज्यों में 75 radicalized लोगों के इंटरव्यू करेंगे. शुरवात में केरल, दिल्ली, महाराष्ट्र और जेके में अध्ययन करेंगे. जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्य असम वेस्ट बंगाल भी जाएंगे. इसके लिए आतंकवाद को रोकने के लिए सबसे अहम UAPA एक्ट है. जिसमें कई संशोधन कुछ समय पहले किये गए है और अभी और भी कुछ संशोधन करने की ज़रूरत है जिसमे प्रिवेंटिव असस्पेक्ट पर जाए.

हार्ड फैक्ट है कि महाराष्ट्र ने 114 लोगों को डी radicalize किया है. इनके लिए प्रोग्रमा की जरूरत है. इस अध्ययन से radicalisation है क्या ये पता लगाया जाए. इसकी प्रक्रिया जानने की कोशिश करेंगे. ताकि उस चेन को ब्रेक किया जाए. अगर कोई radicalised हो जाये तो उसके लिए क्या किया जाए. अगर किसी को शिक्षा या रोज़गार के कारण radicalised हुए युवाओं को मुख्य धारा ने लाया जाए. सरकार चाहती है कि क्राइम घटित होने से पहले उसपर रोक लगाई जाए उसी के लिए ये अध्ययन करवाया जा रहा है.

First Published : 22 Nov 2020, 06:09:15 PM

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