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लोकसभा चुनाव

अयोध्या में BJP की हार पर तंज कसना मुकेश खन्ना को पड़ा भारी, यूजर्स ने यूं लताड़ा

2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को अयोध्या सीट पर मिली हार पर अपनी प्रतिक्रिया दी. भाजपा उम्मीदवार लल्लू सिंह की हार और समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद की जीत पर मुकेश खन्ना ने अपने गुस्से का इजहार किया.

Updated on: 08 Jun 2024, 08:47 AM

highlights

  • अयोध्या में BJP की हार पर तंज कसना मुकेश खन्ना को पड़ा भारी
  • मुकेश खन्ना की सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
  • भड़के यूजर्स बोले- तुम तो चुप ही रहो पलटू राम

 

 

New Delhi:

Lok Sabha Election 2024: छोटे पर्दे पर कभी शक्तिमान और कभी भीष्म पितामह का किरदार निभाकर दर्शकों का दिल जीतने वाले मुकेश खन्ना अक्सर समकालीन मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखने के लिए जाने जाते हैं. हाल ही में, उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को अयोध्या सीट पर मिली हार पर अपनी प्रतिक्रिया दी. भाजपा उम्मीदवार लल्लू सिंह की हार और समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद की जीत पर मुकेश खन्ना ने अपने गुस्से का इजहार किया. बता दें कि मुकेश खन्ना ने अयोध्या हार को लेकर अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बीजेपी पर कटाक्ष किया है, जिससे न सिर्फ राजनेता बल्कि यूजर्स भी नाराज हो गए हैं.

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अयोध्या पर राजनीति

बता दें कि पहले फैजाबाद और अब अयोध्या के नाम से जाना जाने वाला यह शहर इस साल राम मंदिर के कारण चर्चा में रहा था. इस मंदिर के निर्माण से सभी को उम्मीद थी कि बीजेपी को इसका राजनीतिक लाभ मिलेगा. कई लोग मानते थे कि राम मंदिर का निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक बड़ा सियासी मुद्दा बनेगा लेकिन चुनाव परिणाम ने इन उम्मीदों को झटका दिया.

मुकेश खन्ना की सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

मुकेश खन्ना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा, ''अयोध्या चुनाव हार से हमें यह सीख लेनी चाहिए कि भव्य मंदिरों के साथ-साथ नगरवासियों की जिंदगी को भी भव्य बनाने का प्रयास होना चाहिए. करोड़ों के बजट के बीच कुछ करोड़ रुपये वहां के लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए भी रखना जरूरी है. फिर चाहे ये राम मंदिर हो, चार धाम हों या जयपुर निकट खाटू श्याम का मंदिर हो. श्रद्धा की जगहों को टूरिस्ट स्पॉट न बनने दें. वहां लोग भी रहते हैं, उनका भी खयाल रखें.''

 
 
 
 
 
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मुकेश खन्ना को लोगों ने कहा पलटू राम

वहीं मुकेश खन्ना के इस पोस्ट पर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दीं. एक यूजर ने लिखा, ''एक बार आप अयोध्या जाकर देखकर आइए कितना विकास और रोजगार दिया है, तब कुछ बोलिएगा.'' वहीं, एक अन्य ने कहा, ''आप ये बात आज इसलिए कह रहे हैं क्योंकि वो हार गए. अगर जीत जाते तो आप ना कहते.'' एक यूजर ने लिखा, ''अनफॉलो कर रहा हूं, सॉरी शक्तिमान.'' एक और व्यक्ति ने कहा, "तुम तो चुप ही रहो, अपने एसी कमरे और स्टूडियो में बैठ कर ज्ञान मत दो. तुम्हारे जैसे लोगों को ज्ञान देने का अधिकार नहीं है.''

मुकेश खन्ना के प्रति आलोचना

आपको बता दें कि मुकेश खन्ना की आलोचना केवल अयोध्या की हार पर उनकी प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रही. लोगों ने उनके पुराने बयानों और कार्यों को भी लेकर उन्हें घेरा. एक व्यक्ति ने टिप्पणी की, ''तुमको राम जी के मंदिर का निमंत्रण मिला और तुम गए नहीं, बाद में बोले की अरुण गोविल को ठीक से दर्शन करने की व्यवस्था आयोजक नहीं कर पाए, ऐसा मेरे साथ भी होता इसीलिए नहीं गया.'' वहीं एक अन्य ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ''वाह, पल में शक्तिमान, पल में गंगाधर. पलटू राम.''

राजनीति और धर्म की जटिलता

बहरहाल, मुकेश खन्ना की टिप्पणी ने एक बार फिर यह प्रश्न उठाया है कि राजनीति और धर्म का मेल कैसे होना चाहिए. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण एक धार्मिक मुद्दा है, लेकिन इसका राजनीतिक प्रभाव भी है. मंदिर निर्माण से बीजेपी को लाभ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन चुनाव परिणाम ने ये दिखाया कि केवल धार्मिक भावनाओं को भुनाना पर्याप्त नहीं है. लोगों की दैनिक समस्याएं, जैसे रोजगार, विकास और बुनियादी सुविधाएं, भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं.