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लखीमपुर कांड: SC ने योगी सरकार के एक्शन पर उठाए सवाल, 20 अक्टूबर को अगली सुनवाई

योगी सरकार की तरफ से हरीश साल्वे ने दलील रखी. हरीश साल्वे ने कहा कि जिस शख्स पर आरोप लग रहे है, उसे नोटिस जारी किया है.

Arvind Singh | Edited By : Nitu Pandey | Updated on: 08 Oct 2021, 02:55:56 PM
supreme court

सुप्रीम कोर्ट (Photo Credit: ANI )

highlights

  • लखीमपुर खीरी मामले की सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
  • कोर्ट ने जांच पर उठाए सवाल, लेकिन सीबीआई जांच से किया इंकार
  • सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 20 अक्टूबर को

नई दिल्ली :

लखीमपुर खीरी कांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में आज फिर सुनवाई हुई. इस दौरान यूपी सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने दलीलें रखी. लखीमपुर खीरी मामले में यूपी सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों पर सुप्रीम कोर्ट ने असंतुष्टि जताते हुए फटकार लगाई.  योगी सरकार की तरफ से हरीश साल्वे ने दलील रखी. उन्होंने ने कहा कि जिस शख्स पर आरोप लग रहे है, उसे नोटिस जारी किया है. पेश होने के लिए कहा गया है. उसे 11 बजे पेश होना है. अगर पेशी नहीं होती तो क़ानूनन सख्त कदम उठाए जाएंगे. किसान की गोली लगने से मौत के सवाल पर हरीश साल्वे ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से गोली की बात की पुष्टि नहीं होती है.

पुलिस के कदम पर SC ने उठाए सवाल

जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस तरीके से आप दूसरे लोगों को ट्रीट करते है, उसे भी उसी तरीके से ट्रीट किया जाए. ना कि सिर्फ नोटिस जारी कर उसके आने का इंतजार करे.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा आगे कहा कि आप जिम्मेदार पुलिस है. आरोप बेहद संजीदा है. अगर आम स्थिति में 302 का केस दर्ज होता है तो आप क्या करते है, आप तुंरत गिरफ्तार करते है. इस केस में ऐसा क्यों नहीं हुआ.

इसे भी पढ़ें:बिना सबूत सिर्फ आरोप पर नहीं होगी किसी की गिरफ्तारी, लखीमपुर कांड पर बोले CM योगी 

कोर्ट ने पूछा कि क्या सीबीआई जांच की सिफारिश यूपी सरकार की ओर से की गई है?

जिस पर योगी सरकार का पक्ष रख रहे साल्वे ने इससे इंकार किया.

कोर्ट ने सीबीआई जांच से किया इंकार 

कोर्ट ने कहा कि मामले की संजीदगी को देखते हुए हम अपनी तरफ से कोई टिप्पणी नहीं कर रहे है. बेहतर है राज्य सरकार खुद ज़रूरी कदम उठाए. इस मामले के तथ्यों को देखते हुए हम CBI जांच का आदेश नहीं दे रहे है. हालांकि कोर्ट ने इसे निर्दयतापूर्वक हत्या करार दिया.

डीजीपी सुनिश्चित करें कि सबूत से छेड़छाड़ ना हो

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूपी डीजीपी सुनिश्चित करें कि किसी भी सूरत में केस के अहम सबूत ख़त्म न हो पाए. जब तक कि दूसरी जांच एजेसी केस को लेती है. कोर्ट ने कहा कि यूपी सरकार की दलील से संतुष्ट नहीं है.यूपी पुलिस के सीनियर अधिकारी सुनिश्चित करें कि सबूत सुरक्षित रहे.

शीर्ष अदालत ने कहा कि यूपी सरकार की ओर से स्टेट्स रिपोर्टस से संतुष्ट नहीं है. जिस पर वकील ने आश्वस्त किया है कि वैकल्पिक एजेंसी से जांच की संभावना के बारे में भी कोर्ट को बतायेगे. अगली सुनवाई 20 अक्टूबर को होगी.

First Published : 08 Oct 2021, 02:30:01 PM

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