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किशन रेड्डी बोले- नए कृषि कानूनों का ‘आंख मूंदकर विरोध’ नहीं करें, क्योंकि...

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी ने सोमवार को कहा कि किसानों और राजनीतिक दलों को कृषि कानूनों का '‘आंखें मूंदकर विरोध'’ नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें निरस्त करने की मांग करनी चाहिए.

Bhasha | Updated on: 14 Dec 2020, 11:38:14 PM
Kishan Reddy

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी (Photo Credit: फाइल फोटो)

हैदराबाद:

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी ने सोमवार को कहा कि किसानों और राजनीतिक दलों को कृषि कानूनों का '‘आंखें मूंदकर विरोध'’ नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें निरस्त करने की मांग करनी चाहिए, बल्कि उनका विस्तृत अध्ययन करना चाहिए क्योंकि केंद्र उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए तैयार है. रेड्डी ने कहा कि केंद्र द्वारा लाए गए कानून सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं और किसान उनसे या किसी किसी से भी कभी भी स्पष्टीकरण मांग सकते हैं.

किशन रेड्डी ने कहा कि राजग सरकार ने किसानों और उनके मुद्दों का समर्थन कर रहे संगठनों से संपर्क करने का फैसला किया क्योंकि ऐसे कुछ लोग जो राजनीतिक रूप से भाजपा और प्रधानमंत्री का मुकाबला करने में असमर्थ थे, वे किसानों को 'उकसाने' तथा बदनाम करने का प्रयास कर रहे थे. उन्होंने कहा कि राजग सरकार ने कृषि क्षेत्र में बिजली और उर्वरकों की कमी जैसी समस्याओं को दूर करने की कोशिश की है. इसके अलावा किसानों के लिए मिट्टी (सॉयल) स्वास्थ्य कार्ड, फसल ऋण, फसल बीमा, ई-नाम जैसी पहल की गयी है तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की जा रही है.

रेड्डी ने दावा किया कि पंजाब को छोड़कर पूरे देश में किसानों ने नए कृषि कानूनों का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि हमने कृषि क्षेत्र में दशकों से प्रतीक्षित क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत की. मैं राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं, पंजाब को छोड़कर... किसान विरोध नहीं कर रहे हैं। लेकिन आंखें मूंद कर विरोध नहीं करें. रेड्डी ने कहा कि भाजपा या मोदी से राजनीतिक विरोध के कारण कानूनों का विरोध नहीं करें. कानूनों को देखें. मैं राजनीतिक दलों से भी अनुरोध करता हूं. मोदी सरकार में हम उन कानून से जुड़े उन मुद्दों को स्पष्ट करेंगे जो आपको परेशान कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि यदि जरूरी हो, तो हम उन्हें बदलने के लिए तैयार हैं। लेकिन कानून को रद्द करने की मांग करना अच्छी परंपरा नहीं है. मंत्री ने कहा कि सरकार कानूनों में बदलाव करने को राजी है और वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी दर्जा देने के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े औद्योगिक घराने संप्रग सरकार के शासनकाल में कृषि क्षेत्र में आए थे.

First Published : 14 Dec 2020, 11:38:14 PM

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