पाक पीएम इमरान खान
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ (CRPF) काफिले पर आत्मघाती हमले के गुनहगारों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान आनाकानी का रवैया अपना रहा है. पाकिस्तान ने पुलवामा आतंकवादी हमले में जैश-ए-मोहम्मद के शामिल होने तथा संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन के देश में शिविरों की मौजूदगी के संबंध में बुधवार को भारत से और सबूत मांगे हैं. पुलवामा आतंकवादी हमले को घटना बताते हुए विदेश कार्यालय ने कहा कि विदेश सचिव तहमिना जंजुआ द्वारा भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को विदेश मंत्रालय में बुलाया गया और ''पुलवामा घटना के संबंध में प्रारंभिक निष्कर्ष'' साझा किए गए.
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विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा कि पुलवामा हमले पर भारतीय डोजियर की जांच के बाद प्रारंभिक निष्कर्ष भारत के साथ साझा किए गए. भारत ने 27 फरवरी को नयी दिल्ली में पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त को डोजियर सौंपा था जिसमें पुलवामा हमले में जैश-ए-मोहम्मद की संलिप्तता का विशिष्ट विवरण था.
विदेश कार्यालय ने कहा, ''हमने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए भारत से और जानकारी/सबूत मांगे हैं." विदेश कार्यालय ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत द्वारा विश्वसनीय सबूत दिए जाने पर जांच में सहयोग की पेशकश की थी. इस पेशकश के जवाब में पाकिस्तान को एक दस्तावेज सौंपा गया था."
गौरतलब है कि बीते 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक काफिले पर फिदायीन आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे. इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी, जिसका सरगना मसूद अजहर है.
Source : News Nation Bureau
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