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भारत ने कोविड-19 के मामलों में 24 घंटे में छह प्रतिशत वृद्धि दर्ज की, जो मध्य मार्च से सबसे कम है

Bhasha | Edited By : Deepak Pandey | Updated on: 25 Apr 2020, 11:42:27 PM
corona virus

कोरोना वायरस (Photo Credit: फाइल फोटो)

दिल्ली:  

देश में शुक्रवार सुबह आठ बजे से 24 घंटे की अवधि के दौरान कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण के मामलों में छह प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है, जो मध्य मार्च में कोविड-19 संक्रमण के कुल पुष्ट मामलों के 100 पार जाने के बाद से प्रतिदिन की न्यूनतम वृद्धि दर है. सरकारी सूत्रों ने यह दावा किया है. कोविड-19 पर गठित मंत्रिसमूह (जीओएम) ने महामारी के प्रति राष्ट्रव्यापी प्रतिक्रिया तंत्र की शनिवार को समीक्षा की, जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने कहा कि (संक्रमित) मरीज के संक्रमण मुक्त होने की दर 20 प्रतिशत से अधिक है, जो कि विश्व के ज्यादातर देशों की तुलना में बेहतर है.

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देश में कोरोना के मरीजों की संख्या 25 हजार 

मंत्रालय ने शाम में अपना ताजा राष्ट्रव्यापी आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि कोविड-19 से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ कर 779 हो गई है, जबकि संक्रमण के मामले बढ़ कर शनिवार को 24,942 हो गये. शुक्रवार से कुल 56 लोगों की मौत हुई है. मंत्रालय ने कहा कि 24 घंटे की अवधि में अब तक सर्वाधिक 56 मौतें हुई हैं. मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की अध्यक्षता में हुई जीओएम की बैठक में जांच की रणनीति, देश भर में जांच किट की उपलब्धतता, संक्रमण से अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों (हॉटस्पॉट) में संक्रमण की रोकथाम की समीक्षा की गई.

बयान में कहा गया है, जीओएम को इस बात से अवगत कराया गया कि अभी (कोरोना वायरस संक्रमण से) मृत्यु दर 3.1 प्रतिशत है जबकि (संक्रमित) मरीज के संक्रमण मुक्त होने की दर 20 प्रतिशत से अधिक है, जो कि ज्यादातर देशों की तुलना में बेहतर है और इसे देश में लॉकडाउन और निषिद्ध क्षेत्र घोषित करने की रणनीति के सकारात्मक प्रभाव के तौर पर देखा जा सकता है. मंत्रालय ने कहा, देश में (संक्रमण के)मामलों के दोगुना होने की औसत दर अभी 9.1 दिन है. सरकारी सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार सुबह आठ बजे से शनिवार सुबह आठ बजे तक, देश में नये मामलों की वृद्धि दर छह प्रतिशत दर्ज की गई है, जो देश के 100 मामलों का आंकड़ा पार करने के बाद से प्रतिदिन के आधार पर सबसे कम वृद्धि दर है.

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मंत्रालय ने कहा कि देश में रोजाना एक लाख से अधिक पीपीई और एन95 मास्क बन रहे हैं. कुल 104 फर्म पीपीई बना रही हैं, जबकि तीन अन्य इकाइयां एन 95 मास्क बना रही हैं. मंत्रालय ने कहा कि इसके अलावा स्वदेशी विनिर्माताओं के जरिये वेंटिलेटर का उत्पादन भी शुरू हो गया है और नौ विनिर्माताओं को 59,000 से अधिक इकाइयों के लिये आर्डर दिये गये हैं. जीओएम को कोविड-19 संक्रमण के मामलों का इलाज कर रहे विशेष अस्पतालों का राज्यवार ब्योरा दिया गया. साथ ही, पृथक बिस्तर एवं वार्ड, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई किट), एन 95 मास्क, दवाइयां, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सिलेंडर सहित अन्य की उपलब्धता की भी जानकारी दी गई.

मंत्रालय ने कहा कि मंत्री समूह को यह भी जानकारी दी गई कि अभी तक पांच हजार से अधिक लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं और उनके इस रोग से उबरने की दर 20.66 प्रतिशत है. मंत्री समूह ने जांच की रणनीति और देश भर में जांच किट की उपलब्धता की स्थिति के अलावा हॉटस्पाट (अत्यधिक संक्रमण वाले क्षेत्र) आदि संबद्ध विषयों की भी समीक्षा की. मंत्री समूह को देश में अभी कोविड-19 की जांच के लिये काम कर रहे सरकारी और निजी प्रयोगशालाओं की संख्या की भी जानकारी दी गई. साथ ही, यह भी बताया गया कि प्रतिदिन कितनी संख्या में जांच हो रही है.

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देश में कोविड-19 महामारी की मौजूदा स्थिति के साथ-साथ रोग पर प्रतिक्रिया एवं प्रबंधन की विस्तृत प्रस्तुति की मंत्रियों के लिये व्यवस्था की गई. मंत्रालय ने कहा कि जीओएम ने कोविड-19 पर अब तक केंद्र और विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अब तक उठाये गये कदमों पर विस्तृत चर्चा भी की. मंत्री समूह ने कई उच्चाधिकार प्राप्त समितियों को सौंपे गये विभिन्न कार्यों पर भी चर्चा की. उसे बताया गया कि करीब 92,000 गैर सरकारी संगठन, स्वयं सहायता समूह और सामाजिक संस्थाएं देश भर में प्रवासी कामगारों को भोजन मुहैया कर रही हैं.

यह भी बताया गया कि स्वास्थ्य कर्मियों आदि का विशाल डेटा सभी राज्यों, जिलों एवं अन्य अधिकारियों से साझा किया गया, ताकि वे संसाधनों एवं स्वयंसेवियों को अत्यधिक जरूरत वाले स्थानों के लिये लामबंद कर सकें. बयान में कहा गया है कि कोरोना वायरस से लड़ रहे इन योद्धाओं को ऑनलाइन मंचों के जरिये प्रशिक्षित किया जा रहा. इस बीच, राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को कोविड-19 की त्वरित एंटीबॉडी जांच किट का उस वक्त तक उपयोग नहीं करने को कहा गया है, जब तक कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) इसकी सटीकता की फिर से जांच नहीं कर लेती है.

आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी. सूत्रों के मुताबिक आईसीएमआर द्वारा गठित टीमें उन त्वरित एंटीबॉडी जांच किट का विश्लेषण कर रही हैं, जो दो चीनी कंपनियों से खरीदी गई थी. उन्होंने बताया कि इस जांच का उद्देश्य इसकी (त्वरित एंटीबॉडी जांच किट की) दक्षता का पता लगाना है क्योंकि कुछ राज्यों से ये खबरें आई थी कि ये त्रुटिपूर्ण हैं और गलत नतीजे दे रही हैं.

First Published : 25 Apr 2020, 11:37:29 PM

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