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नेपाल से तनाव कम करने के लिए भारत आपदा राहत प्रशिक्षण प्रदान करने को तैयार

उन्होंने भारत द्वारा प्रदान की गई सभी सहायता के लिए भी धन्यवाद व्यक्त किया. सिंह ने नेतृत्व के साथ अपने व्यक्तिगत संबंध, लंबे जुड़ाव और नेपाल के लोगों के लिए विशेष सम्मान की भावना से अवगत कराया. दोनों नेताओं ने उत्कृष्ट सैन्य सहयोग पर अपनी संतुष्टि व

News Nation Bureau | Edited By : Ravindra Singh | Updated on: 16 Jan 2021, 05:48:34 PM
Rajnath Singh

राजनाथ सिंह (Photo Credit: फाइल )

नई दिल्ली :  

भारत नेपाल को मानवीय सहायता और आपदा राहत प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण (कैपिसिटी बिल्डंग) प्रदान करने के लिए तैयार है, क्योंकि दोनों देश तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं. नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली की शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक के दौरान सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करने पर निर्णय लिया गया. सिंह ने कहा कि भारत दोनों देशों के बीच विशेष संबंधों को और गहरा और मजबूत करने के लिए तत्पर है.

नेपाल के विदेश मंत्री छठे भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की बैठक के लिए भारत में हैं. सिंह के साथ बातचीत के दौरान, ग्यावाली ने नेपाल नेतृत्व की ओर से उनका अभिवादन किया और द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने की इच्छा व्यक्त की. उन्होंने भारत द्वारा प्रदान की गई सभी सहायता के लिए भी धन्यवाद व्यक्त किया. सिंह ने नेतृत्व के साथ अपने व्यक्तिगत संबंध, लंबे जुड़ाव और नेपाल के लोगों के लिए विशेष सम्मान की भावना से अवगत कराया. दोनों नेताओं ने उत्कृष्ट सैन्य सहयोग पर अपनी संतुष्टि व्यक्त की.

नेपाल के विदेश मंत्री ने कोविड के टीके को विकसित करने में सफलता के लिए भारत को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि कोविड महामारी जल्द ही दूर हो जाएगी. चीन द्वारा नेपाल में अपना प्रभाव बढ़ाने के बाद दोनों देशों (भारत-नेपाल) के बीच संबंधों में तनाव आ गया था.

इसके अलावा, यह लिपुलेख क्षेत्र में 17,000 फीट की दूरी पर भारत का सड़क निर्माण था, जिसने भारत और नेपाल के बीच एक कूटनीतिक विवाद को जन्म दिया था, क्योंकि काठमांडू ने इस क्षेत्र पर अपना दावा कर दिया था. कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा के समय को कम करने के लिए सड़क का निर्माण किया गया था. लिपुलेख भारत, नेपाल और चीन के बीच एक त्रि-जंक्शन है जो उत्तराखंड में कालापानी घाटी में स्थित है.

इसके बाद, नेपाल ने क्षेत्र को अपना हिस्सा दिखाते हुए एक नया राजनीतिक मानचित्र पेश किया. भारत ने नेपाल के इस नए नक्शे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह ऐतिहासिक तथ्यों या सबूतों पर आधारित नहीं है.

First Published : 16 Jan 2021, 05:48:34 PM

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