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Modi Govt का चीन को जैसे को तैसा जवाब, लद्दाख में लड़ाकू विमानों के लिए अपग्रेड होगी न्योमा एयरफील्ड

लड़ाकू विमानों के लिहाज से यह अपग्रेडेड अत्याधुनिक लैंडिंग ग्राउंड दो साल में संचालन के लिए तैयार हो जाएगा. इसके निर्माण में 214 करोड़ रुपये खर्च होंगे.

Updated on: 31 Dec 2022, 11:04 PM

highlights

  • नया अत्याधुनिक लैंडिंग ग्राउंड 1,235 एकड़ में फैला होगा
  • रन-वे पर लड़ाकू विमान दोनों दिशाओं से लैंड कर सकेंगे
  • न्योमा एयरफील्ड भारत में सर्वाधिक ऊंचाई पर है स्थित

नई दिल्ली:

भारत ने शनिवार को लद्दाख (Ladakh) के न्योमा में देश के सबसे ऊंचे हवाई क्षेत्रों में से एक के निर्माण के लिए एक बड़ी निविदा आमंत्रित की. यह एयरफील्ड वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से 50 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है. यह चीन द्वारा सीमा के अपने हिस्से में तेजी से बुनियादी ढांचे के विकास पर भारत का जैसे को तैसा वाला जवाब होगा. लड़ाकू विमानों के लिहाज से यह अपग्रेडेड अत्याधुनिक लैंडिंग ग्राउंड दो साल में संचालन के लिए तैयार हो जाएगा. इसके निर्माण में 214 करोड़ रुपये खर्च होंगे. नया अत्याधुनिक लैंडिंग ग्राउंड 1,235 एकड़ में फैला होगा, जहां संबद्ध सैन्य बुनियादी ढांचे के साथ 2.7 किलोमीटर का रन-वे बनेगा. 

रन-वे पर दोनों दिशाओं से लैंड कर सकेंगे लड़ाकू विमान
सीमा सड़क संगठन ने इस परियोजना को अंजाम देने के लिए ठेकेदारों की मांग करते हुए निविदाएं आमंत्रित की है. रन-वे का एलाइनमेंट ऐसा होगा कि लड़ाकू विमान दोनों दिशाओं से लैंड कर सके. इसकी चौड़ाई 45 मीटर से अधिक होगी. नए रन-वे का स्थान लेह-लोमा रोड के पास होगा. यह हवाई क्षेत्र एक रणनीतिक संपत्ति होगी ,जिसके परिणामस्वरूप इस संवेदनशील क्षेत्र में सैनिकों और सैन्य सामग्री दोनों की त्वरित आवाजाही हो सकेगी.

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फिलहाल हेलीकॉप्टरों का होता है संचालन
लेह से 180 किलोमीटर दूर न्योमा में बनने वाला एडवांस लैंडिंग ग्राउंड भारत की सैन्य क्षमता में जबर्दस्त ढंग से इजाफा करेगा. न्योमा दक्षिणी लद्दाख में 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. न्योमा में मौजूदा उन्नत लैंडिंग ग्राउंड में अपाचे हेलीकॉप्टर, चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर, एमआई-17 हेलीकॉप्टर और सी-130जे स्पेशल ऑपरेशंस एयरक्राफ्ट का संचालन होता है. गौरतलब है कि 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में हिंसक संघर्ष के बाद भारत-चीन के बीच तनाव गहरा गया है. इस महीने की शुरुआत में तवांग में भी भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई थी.