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वार रूम का मैसेज मिल गया होता तो पाकिस्‍तान में जाकर न गिरते अभिनंदन वर्तमान

पहली बार 2005 में भारतीय वायु सेना ने बेहतर संचार के लिए अनुरोध किया था. बता दें कि एक सुरक्षित डाटा लिंक प्रत्येक फाइटर के पास उपलब्ध ईंधन और गोला बारूद जैसे जरूरी चीजों के बारे में जानकारी दे सकता है.

By : Sunil Mishra | Updated on: 14 Aug 2019, 12:56:52 PM
अभिनंदन वर्तमान (फाइल फोटो)

अभिनंदन वर्तमान (फाइल फोटो)

highlights

  • पड़ोसी देश ने जाम कर दिया था नेटवर्क, नहीं मिला मैसेज
  • मिग-21 में एंटी जैमिंग तकनीक हाेती तो पाक में नहीं गिरते अभिनंदन

नई दिल्ली:

पुलवामा हमले के बाद भारत ने बालाकोट में एयर स्‍ट्राइक की. उसके जवाब में पाकिस्‍तान का एफ-16 विमान भारतीय सीमा में घुस आया था, जिसे भारतीय वायुसेना के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने मार गिराया था. इसी बीच वॉर रूम से अभिनंदन को वापस लौटने का मैसेज दिया गया, लेकिन पड़ोसी देश ने कम्युनिकेशन नेटवर्क को जाम कर दिया था, जिससे अभिनंदन को वह मैसेज नहीं मिला और वह इजेक्‍ट होकर पाकिस्‍तान में जा गिरे थे.

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हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की एक खबर के अनुसार, मिग-21 में एंटी जैमिंग तकनीक होती तो अभिनंदन लौटने का संदेश पाकर वापस लौट सकते थे, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से खबर में कहा गया है कि यह पहली बार नहीं है कि भारतीय वायुसेना ने बेहतर और अधिक सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम की मांग की हो.

बालाकोट में भारतीय वायुसेना के हमलों के बाद पाकिस्तानी वायु सेना ने 27 फरवरी को लड़ाकू विमान भेजकर भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की थी. इसके बाद अभिनंदन वर्धमान ने मिग 21 से पाकिस्तानी विमान को वापस खदेड़ दिया था. एक विमान को मार भी गिराया था.

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पहली बार 2005 में भारतीय वायु सेना ने बेहतर संचार के लिए अनुरोध किया था. बता दें कि एक सुरक्षित डाटा लिंक प्रत्येक फाइटर के पास उपलब्ध ईंधन और गोला बारूद जैसे जरूरी चीजों के बारे में जानकारी दे सकता है. एक फाइटर पायलट ने कहा, 'कमांडर वास्तव में जानता है कि किस फाइटर को वापस बेस पर उड़ान भरने की जरूरत है और किसे दुश्मन को उलझाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

2008 से 2012 के बीच चार वर्षों में, IAF ने उपलब्ध नई संचार प्रणालियों का परीक्षण किया और सरकार से सिफारिश की. एक अन्य सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, 'डीआरडीओ द्वारा बनाए गए सेटों को विमान में फिट नहीं किया जा सकता है क्योंकि वे बड़े होते हैं और ऐसे में विमान में बड़े बदलाव की जरूरत होती है.'

First Published : 14 Aug 2019, 12:56:52 PM

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