News Nation Logo
उत्तराखंड : बारिश के दौरान चारधाम यात्रा बड़ी चुनौती बनी, संवेदनशील क्षेत्रों में SDRF तैनात आंधी-बारिश को लेकर मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया राजस्थान : 11 जिलों में आज आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट, ओला गिरने की भी आशंका बिहार : पूर्णिया में त्रिपुरा से जम्मू जा रहा पाइप लदा ट्रक पलटने से 8 मजदूरों की मौत, 8 घायल पर्यटन बढ़ाने के लिए यूपी सरकार की नई पहल, आगरा मथुरा के बीच हेली टैक्सी सेवा जल्द महाराष्ट्र के पंढरपुर-मोहोल रोड पर भीषण सड़क हादसा, 6 लोगों की मौत- 3 की हालत गंभीर बारिश के कारण रोकी गई केदारनाथ धाम की यात्रा, जिला प्रशासन के सख्त निर्देश आंधी-बारिश के कारण दिल्ली एयरपोर्ट से 19 फ्लाइट्स डाइवर्ट
Banner

नेताजी ने बड़े उद्देश्य के लिए आज ही छोड़ा था देश, झारखंड के गोमो जंक्शन ने सहेज रखी हैं उनकी यादें

नेताजी ने बड़े उद्देश्य के लिए आज ही छोड़ा था देश, झारखंड के गोमो जंक्शन ने सहेज रखी हैं उनकी यादें

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 19 Jan 2022, 12:45:01 AM
Hitorical event

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

रांची:   18 जनवरी 1941- यही वो तारीख थी, जब नेताजी सुभाष चंद्र ने आजादी के लिए सशस्त्र संघर्ष छेड़ने के इरादे के साथ देश छोड़ा था। वह इसी दिन झारखंड के गोमो स्थित रेलवे स्टेशन से कालका मेल पकड़कर नेताजी पेशावर के लिए रवाना हुए थे। गोमो के लोगों ने नेताजी से जुड़ी यादें 82 साल बाद आज भी ताजा रखी हैं। उस घटना को याद करने के लिए इस बार भी 17-18 जनवरी की आधी रात को गोमो जंक्शन पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हुए। इस दौरान हावड़ा-कालका नेताजी एक्सप्रेस ट्रेन के चालक, गार्ड और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया।

आजाद हिंद फौज को कायम करने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जब देश छोड़ा था, तो उन्होंने आखिरी रात इसी जगह पर गुजारी थी। इसे अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन के नाम से जाना जाता है।अंग्रेजी हुकूमत द्वारा नजरबंद किये गये सुभाष चंद्र बोस के देश छोड़ने की यह परिघटना इतिहास के पन्नों पर द ग्रेट एस्केप के रूप में जानी जाती है। द ग्रेट एस्केप की यादों को सहेजने और उन्हें जीवंत रखने के लिए झारखंड के नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या 1-2 के बीच उनकी आदमकद कांस्य प्रतिमा लगाई गई है।

इस जंक्शन पर द ग्रेट एस्केप की दास्तां भी संक्षेप रूप में एक शिलापट्ट पर लिखी गयी है। कहानी ये है कि 2 जुलाई 1940 को हालवेल मूवमेंट के कारण नेताजी को भारतीय रक्षा कानून की धारा 129 के तहत गिरफ्तार किया गया था। तब डिप्टी कमिश्नर जान ब्रीन ने उन्हें गिरफ्तार कर प्रेसीडेंसी जेल भेजा था। जेल जाने के बाद उन्होंने आमरण अनशन किया। उनकी तबीयत खराब हो गई। तब अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें 5 दिसंबर 1940 को इस शर्त पर रिहा किया कि तबीयत ठीक होने पर पुन: गिरफ्तार किया जाएगा। नेताजी रिहा होकर कोलकाता के एल्गिन रोड स्थित अपने आवास आए। केस की सुनवाई 27 जनवरी 1941 को थी, पर ब्रिटिश हुकूमत को 26 जनवरी को पता चला कि नेताजी तो कलकत्ता में नहीं हैं। दरअसल वे अपने खास नजदीकियों की मदद से 16-17 जनवरी की रात करीब एक बजे हुलिया बदलकर वहां से निकल गए थे। इस मिशन की योजना बाग्ला वोलेंटियर सत्यरंजन बख्शी ने बनायी। योजना के मुताबिक नेताजी 18 जनवरी 1941 को अपनी बेबी अस्टिन कार से धनबाद के गोमो आए थे। वे एक पठान के वेश में आए थे।

बताया जाता है कि भतीजे डॉ शिशिर बोस के साथ गोमो पहुंचने के बाद वह गोमो हटियाटाड़ के जंगल में छिपे रहे। जंगल में ही स्वतंत्रता सेनानी अलीजान और अधिवक्ता चिरंजीव बाबू के साथ इन्होंने गुप्त बैठक की थी। इसके बाद इन्हें गोमो के ही लोको बाजार स्थित कबीलेवालों की बस्ती में मो. अब्दुल्ला के यहां आखिरी रात गुजारी थी। फिर वे उन्हें पंपू तालाब होते हुए स्टेशन ले गए। गोमो से कालका मेल में सवार होकर गए तो उसके बाद कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं लगे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सम्मान में रेल मंत्रालय ने वर्ष 2009 में गोमो स्टेशन का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस गोमो जंक्शन कर दिया। इतना ही नहीं, 23 जनवरी 2009 को तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने इनके स्मारक का लोकार्पण किया था।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 19 Jan 2022, 12:45:01 AM

For all the Latest India News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.