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ट्रिपल तलाक मामले में 6 दिन होगी बहस, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जांचेंगे कि ये संविधान के मूलभूत अधिकारों का हनन है या नहीं

कोर्ट ने कहा कि वह इस बात पर विचार करेगा कि क्या ट्रिपल तलाक मुसलमानों के मूल अधिकार का हिस्सा है या नहीं।

News Nation Bureau | Edited By : Abhiranjan Kumar | Updated on: 11 May 2017, 03:59:08 PM

नई दिल्ली:

तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पांच सदस्यीय बेंच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में कुल 6 दिन बहस होगी, 2 दिन 3 ट्रिपल तलाक के विरोध में याचिका दायर करने वाले दलील रखेंगे। उसके बाद ट्रिपल तलाक़ का समर्थन रखने वाले दलील रखेंगे। इसके बाद  1-1 दिन  दोनों पक्ष दूसरे की बातों का जवाब देंगे।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर की अगुआई वाली बेंच ने शुरुआत में ही साफ कर दिया कि वह बहुविवाह के मुद्दे पर विचार नहीं करेगी। कोर्ट ने कहा कि वह इस बात पर विचार करेगा कि क्या ट्रिपल तलाक मुसलमानों के मूल अधिकार का हिस्सा है या नहीं।

कुछ मुख्य बातें जो सुनवाई के दौरान कोर्ट में कही गईः

1. मामले पर बहस के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कहा कि अगर ट्रिपल तलाक इस्लाम का मूलभूल हिस्सा होता तो कई मुस्लिम देशों ने इस पर बैन क्यों लगाता।

2. शायरा बानो के वकील ने कहा, 3 तलाक धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं। अनिवार्य हिस्सा वो होता है जिसके हटने से धर्म का स्वरूप ही बदल जाए

3. केंद्र की ओर से ASG पिंकी आनंद ने कहा, सरकार याचिकाकर्ता के समर्थन में है कि ट्रिपल तलाक असंवैधानिक है। बहुत सारे देश इसे खत्म कर चुके हैं।

4. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक की संवैधानिक वैधता के आधार पर फैसला दिया जाएगा।

5. याचिकाकर्ता फरहा फैज ने कहा कि तीन तलाक को एक बार में बोलना, हटाया जाना चाहिए।6

6. जस्टिस नरीमन ने कहा है कि एक बार में तीन तलाक बोलने के मामले पर सुनवाई होगी। तीन महीने के अंतराल पर बोले गए तलाक पर विचार नहीं।

7. बहु विवाह के मुद्दे पर कोर्ट ने सुनवाई करने से यह कहकर इनकार कर दिया कि यह मुद्दा ट्रिपल तलाक से संबंधित नहीं है।

बता दें कि इस मामले पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच में जस्टिस कुरियन जोसफ, आरएफ नरीमन, यूयू ललित और अब्दुल नजीर भी शामिल हैं। सभी जज अलग-अलग धर्म से संबंध रखते हैं।

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First Published : 11 May 2017, 02:17:00 PM

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