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पूर्व अफगान सेना की संख्या फर्जी तरीके से ज्यादा दिखाई गई थी, सरकार के पतन के लिए जिम्मेदार थे भ्रष्ट अधिकारी

पूर्व अफगान सेना की संख्या फर्जी तरीके से ज्यादा दिखाई गई थी, सरकार के पतन के लिए जिम्मेदार थे भ्रष्ट अधिकारी

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 10 Nov 2021, 07:00:01 PM
Former Afghan

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

नई दिल्ली: अफगानिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री ने सरकार के पतन के लिए भ्रष्ट अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है, जिन्होंने फर्जी तरीके से सैनिकों का नाम दर्ज किया हुआ था और तालिबान ने उन्हें भुगतान भी किया था। बीबीसी ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया है।

अफगानिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री खालिद पायेंदा ने बीबीसी को बताया कि सरकार के पास मौजूद 300,000 सैनिकों और पुलिस में से अधिकांश मौजूद नहीं थे।

रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि फर्जी तरीके से कर्मियों को आधिकारिक सूचियों में जोड़ा गया ताकि जनरलों को उनका मेहनताना मिल सके।

अगस्त में तालिबान ने उम्मीद से भी कम समय में ही तेजी से अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया और अमेरिकी सेना के नेतृत्व वाला नाटो बल भी देश में 20 साल बाद बिताने के बाद वापस लौट गया।

इस्लामवादी समूह के आगे बढ़ने के कारण इस्तीफा देने और देश छोड़ने वाले वित्त मंत्री खालिद ने कहा कि रिकॉर्ड दिखाते हैं कि सुरक्षा बलों की संख्या असल में काफी कम थी, जबकि कागजात में इन्हें अधिक दिखाया गया था।

उन्होंने बीबीसी के सामने आरोप लगाते हुए कहा कि यह बढ़ाई गई संख्या छह गुना से अधिक हो सकती है, और इसमें मृत्यु और शहीद शामिल हैं, जिनका कभी हिसाब नहीं रहा, क्योंकि कुछ कमांडर उनके बैंक कार्ड रखते थे और उनका वेतन वापस ले लेते थे।

अफगानिस्तान पुनर्निर्माण के लिए अमेरिकी विशेष महानिरीक्षक (सिगार) की 2016 की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि न तो संयुक्त राज्य अमेरिका और न ही उसके अफगान सहयोगियों को पता है कि कितने अफगान सैनिक और पुलिस वास्तव में मौजूद हैं, कितने वास्तव में ड्यूटी के लिए उपलब्ध हैं, या विस्तार से, उनकी परिचालन क्षमताओं की वास्तविक प्रकृति क्या है, यह भी स्पष्ट नहीं था।

एक और हालिया रिपोर्ट में सिगार ने भ्रष्टाचार के प्रभावों के बारे में गंभीर चिंता और बल की वास्तविक ताकत पर डेटा की संदिग्ध सटीकता पर भी चिंता व्यक्त की थी।

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जो सैनिक मौजूद थे उन्हें अक्सर समय पर भुगतान नहीं किया जाता था, जबकि ऐसे जनरल थे जो किसी अन्य सैनिक के नाम का वेतन खुद ही हड़प रहे थे।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 10 Nov 2021, 07:00:01 PM

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