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किसान नेता गुरुनाम सिंह चढ़ूनी के बिगड़े बोल, 'पुलिस पकड़ने आए तो पूरा गांव उन्हें बंधक बना लें'

किसान नेता गुरुनाम सिंह चढ़ूनी ने शुक्रवार को एक विवादित बयान दिया हैं. उन्होंने कहा कि अब तक 1700 नोटिस आ गए हैं लेकिन कोई भी किसान दिल्ली पुलिस के बुलावे पर न जाएं.

News Nation Bureau | Edited By : Vineeta Mandal | Updated on: 20 Feb 2021, 05:21:27 PM
Gurnam Singh Chaduni

Gurnam Singh Chaduni (Photo Credit: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

किसान नेता गुरुनाम सिंह चढ़ूनी ने शुक्रवार को एक विवादित बयान दिया हैं. उन्होंने कहा कि अब तक 1700 नोटिस आ गए हैं लेकिन कोई भी किसान दिल्ली पुलिस के बुलावे पर न जाएं. इसके बाद अगर पुलिस अगर किसी को गिरफ्तार करने आते हैं तो पूरा गांव उनका घेराव करें और उन्हें बंधक बना लें. उन्हें तब तक आजाद न करें जब तक कि जिला प्रशासन आश्ववासन नहीं देता कि उन्हें गांव में फिर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी. चढूनी ने एक वीडियो मैसेज में कहा कि दिल्ली पुलिस के कर्मी अगर छापेमारी करते हैं और किसी को पकड़ने आते हैं तो उनका घेराव किया जाना चाहिए, वहां बैठाया जाना चाहिए और पूरे गांव एवं आस पड़ोस को सूचित किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि मैं यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि यदि दिल्ली पुलिस के किसी भी जवान को घेर लिया जाता है, तो किसी को भी उन पर हाथ नहीं उठाना चाहिए, लेकिन उनकी देखभाल की जानी चाहिए और उन्हें खाना खिलाया जाना चाहिए और जिला प्रशासन के मौके पर पहुंचने तक उन्हें छोड़ना नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि हमें यह कार्रवाई करनी होगी क्योंकि दिल्ली पुलिस से निपटने का कोई दूसरा विकल्प नहीं है. इस तरह की ज्यादती बर्दाश्त नहीं की जाएगी. 

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गुरुनाम सिंह चढ़ूनी ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए आगे कहा कि बीजेपी के लोग जहां भी सभा या रैली करें तो उन्हें वहां से भगा दिया जाएं. वहीं किसी भी चुनाव में बीजेपी को वोट न दें. इसके अलावा उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अंबानी, अडानी और बाबा रामदेव के सामानों का बहिष्कार करें.

वहीं, दूसरी ओर चढ़ूनी ने भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत द्वारा पंजाब और हरियाणा में महापंचायतों का आयोजन करने का हवाला देते कहा कि दोनों राज्यों में ऐसे आयोजनों की जरूरत नहीं है. एक अन्य वीडियो संदेश में चढूनी ने कहा कि हरियाणा और पंजाब के किसान केंद्र के कृषि से जुड़े कानूनों से अवगत हैं और इन दोनों राज्यों में पंचायत आयोजित करने की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि आंदोलन सुचारू रूप से चल रहा है. पंजाब और हरियाणा में किसान पंचायत की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि यहां जन जागरण पहले से ही काफी अच्छा है. मुझे लगता है कि लोग भी ऐसा नहीं चाहते हैं. उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में लगातार हो रही पंचायतों के चलते इन दोनों राज्यों के किसान नेताओं को किसानों को जागरूक करने के लिए दूसरे राज्यों का दौरा करने के लिए बहुत कम मिल पाता है.

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बता दें कि चढूनी ने बलबीर सिंह राजेवाल और डॉ. दर्शन पाल सहित कुछ अन्य प्रमुख किसान नेताओं के साथ कुछ किसान महापंचायतों' को संबोधित किया था. फिर भी उन्होंने पंजाब और हरियाणा में किसानों की कम पंचायत आयोजित करने का आग्रह किया और कहा कि अन्य राज्यों के किसानों को जागरूक करने की अधिक आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब के हमारे भाइयों को धरना स्थलों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गांवों के लोगों का एक समूह वहां स्थायी रूप से मौजूद रहे. 

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First Published : 20 Feb 2021, 05:11:16 PM

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