News Nation Logo
ओमिक्रॉन पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी जानकारी 66 और 46 साल के दो मरीज आइसोलेशन में रखे गए भारत में ओमीक्रॉन वायरस की पुष्टि कर्नाटक में मिले ओमीक्रॉन के 2 मरीज सीएम योगी आदित्यनाथ ने प. यूपी को गुंडे-माफियाओं से मुक्त कराकर उसका सम्मान लौटाया है: अमित शाह जहां जातिवाद, वंशवाद और परिवारवाद हावी होगा, वहां विकास के लिए जगह नहीं होगी: योगी आदित्यनाथ पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में देश में चक्रवात से संबंधित स्थिति पर हुई समीक्षा बैठक प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों का एयरपोर्ट पर RT-PCR टेस्ट किया जा रहा है: सत्येंद्र जैन दिल्ली में पिछले कुछ महीनों से कोविड मामले और पॉजिटिविटी रेट काफी कम है: सत्येंद्र जैन आंदोलनकारी किसानों की मौत और बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में नारेबाजी की दिल्ली में आज भी प्रदूषण का स्तर काफी खराब, AQI 342 पर पहुंचा बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने बैठकर गाया राष्ट्रगान, मुंबई BJP के एक नेता ने दर्ज कराई FIR यूपी सरकार ने भी ओमीक्रॉन को लेकर कसी कमर, बस स्टेशन- रेलवे स्टेशन पर होगी RT-PCR जांच

यूपी में फिर उठी सीएए को खत्म करने की मांग

यूपी में फिर उठी सीएए को खत्म करने की मांग

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 21 Nov 2021, 11:30:01 AM
Demand to

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा के बाद कई मुस्लिम संगठनों और नागरिक समाज के सदस्यों ने अब सरकार से नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को निरस्त करने का आग्रह किया है।

अमरोहा से बसपा सांसद कुंवर दानिश अली ने सीएए को बिना किसी देरी के निरस्त करने का आह्वान किया है।

उन्होंने ट्वीट किया, 3 कृषि कानूनों को निरस्त करना एक स्वागत योग्य कदम है। मैं किसानों को शक्तिशाली राज्य सत्ता और उनके क्रोनी कैपिटलिस्ट दोस्तों से लड़ने, बलिदान करने और जीतने के लिए बधाई देता हूं। प्रधानमंत्री मोदी को भी बिना किसी देरी के सीएए पर पुनर्विचार करके कानून को निरस्त करना चाहिए।

जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा का स्वागत किया और किसानों की सफलता की सराहना की।

मदनी ने दावा किया कि सीएए के खिलाफ आंदोलन ने किसानों को कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने मांग करके कहा कि कृषि कानूनों की तरह सीएए को भी वापस लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले ने दिखाया है कि लोकतंत्र और लोगों की शक्ति सर्वोपरि है।

मदनी ने आरोप लगाया कि किसानों के आंदोलन को उसी तरह दबाने का हर संभव प्रयास किया गया जैसा देश के अन्य सभी आंदोलनों में किया गया था।

दारुल उलूम देवबंद के प्रवक्ता मौलाना सूफियान निजामी ने कहा कि कृषि कानूनों की तरह ही सरकार को भी समाज में सद्भाव और शांति के लिए सीएए को वापस लेना चाहिए।

एस.आर. सामाजिक कार्यकर्ता दारापुरी ने यह भी कहा कि सीएए को निरस्त करने का समय आ गया है, यह कहते हुए कि लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

सीएए के खिलाफ प्रदर्शनों में भाग लेने वाले एक अन्य कार्यकर्ता ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि समान विचारधारा वाले लोग अपने आंदोलन को फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं, जिसे महामारी के दौरान बंद कर दिया गया था।

उन्होंने कहा कि किसानों ने रास्ता दिखाया है और अगर उनके द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए मजबूर कर सकते हैं, तो हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते?

सीएए को 12 दिसंबर, 2019 को अधिसूचित किया गया था और यह 10 जनवरी, 2020 से लागू हुआ था।

संसद द्वारा सीएए पारित होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक विरोध देखा गया था।

सीएए का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदुओं, सिखों, जैनियों, बौद्धों, पारसियों और ईसाइयों जैसे उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देना है, लेकिन इसमें मुसलमानों का उल्लेख नहीं है।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 21 Nov 2021, 11:30:01 AM

For all the Latest India News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.