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दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण: न्यायालय ने पराली जलाने की घटनाओं पर पंजाब, हरियाणा को आड़े हाथों लिया

उच्चतम न्यायालय ने न्यायिक आदेशों के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं होने पर सोमवार को पंजाब और हरियाणा को आड़े हाथों लिया.

न्‍यूज स्‍टेट ब्‍यूरो | Edited By : Deepak Pandey | Updated on: 25 Nov 2019, 04:23:17 PM
सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली:

उच्चतम न्यायालय ने न्यायिक आदेशों के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं होने पर सोमवार को पंजाब और हरियाणा को आड़े हाथों लिया और कहा कि वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली के लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने पराली जलाने पर प्रतिबंध के बाजवूद इन दो राज्यों में यह सिलसिला जारी रहने पर कड़ा रूख अपनाया ओर कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की वजह से लोगों का ‘दम घुट’ रहा है और लाखों लोगों की उम्र घट रही है. पीठ ने कहा, ‘‘क्या आप लोगों से इस तरह व्यवहार करेंगे और उन्हें प्रदूषण के कारण जान गंवाने देंगे. 

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में दूषित पानी के मसले पर खुद संज्ञान लिया. उन्होंने पानी के मुद्दे पर राजनीति करने के लिए दिल्ली और केंद्र सरकार की आलोचना की. पानी पर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा. कोर्ट इस बात को देखेगा कि दिल्ली में पानी पीने लायक है या नहीं.

जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि लोग हमारे देश पर हंस रहे हैं कि हम स्टबल बर्निंग को कंट्रोल नहीं कर सकते हैं. ब्लेम गेम दिल्ली के लोगों की सेवा नहीं है. आप लोग आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेल रहे हैं, इसे (प्रदूषण) गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. अदालत ने आगे कहा कि वह राष्ट्रीय राजधानी में जल प्रदूषण के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेगा, यह सत्यापित करने के लिए कि क्या पीने का पानी लोगों के लिए सुरक्षित है या नहीं और केंद्र और दिल्ली सरकार को सभी संबंधित आंकड़ों के साथ वापस आने के लिए कहेगा.

जस्टिस अरुण मिश्रा ने आगे कहा कि दिल्ली नरक से भी बदतर है. भारत में जीवन इतना सस्ता नहीं है और आपको भुगतान करना होगा. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि आपको कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है. प्रत्येक व्यक्ति को कितने लाख का भुगतान किया जाना चाहिए?. आप किसी व्यक्ति के जीवन को कितना महत्व देते हैं?.

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दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली 2 शक्ति केंद्रों दिल्ली सरकार और केंद्र के कारण 'शासन समस्या' का सामना कर रहा है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को अपने मतभेदों को एक तरफ रखने का निर्देश दिया है और शहर के विभिन्न हिस्सों में एयर प्यूरीफायर टावरों की लगाने के लिए 10 दिनों के भीतर एक साथ बैठकर योजना को अंतिम रूप देने को कहा है.

First Published : 25 Nov 2019, 04:21:45 PM

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