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दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार और सेबी को क्रिप्टोकरेंसी के विज्ञापन के मामले पर नोटिस भेजा

कोर्ट में दायर एक याचिका में भारत में क्रिप्टो-एसेट एक्सचेंजों के खिलाफ उचित मानक अस्वीकरण (Adequate Standardized Disclaimers) के बिना राष्ट्रीय टेलीविजन पर विज्ञापन देने के लिए उचित दिशानिर्देश/नियम जारी करने की मांग की गई है.

News Nation Bureau | Edited By : Dhirendra Kumar | Updated on: 14 Jul 2021, 12:05:54 PM
Bitcoin Cryptocurrency

Bitcoin Cryptocurrency (Photo Credit: IANS)

highlights

  • उचित मानक अस्वीकरण के बिना राष्ट्रीय टेलीविजन पर विज्ञापन देने के लिए उचित दिशानिर्देश/नियम जारी करने की मांग की
  • कुछ कंपनियां ऑफर के तौर पर शुरुआती निवेशकों को 100 रुपये का मुफ्त क्रिप्टोकरेंसी देने का वादा कर रही हैं

नई दिल्ली:

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, सेबी और अन्य को क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) के विज्ञापन के मामले पर नोटिस भेजा है. कोर्ट में दायर एक याचिका में भारत में क्रिप्टो-एसेट एक्सचेंजों के खिलाफ उचित मानक अस्वीकरण (Adequate Standardized Disclaimers) के बिना राष्ट्रीय टेलीविजन पर विज्ञापन देने के लिए उचित दिशानिर्देश/नियम जारी करने की मांग की गई है. बता दें कि हाल के दिनों में क्रिप्टोकरेंसी के विज्ञापनों की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है. इन विज्ञापनों में बेहद मामूली रकम के साथ निवेश करने के साथ ही निवेश का तरीका बेहद ही सरल होने की बात भी कही जा रही है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ कंपनियां ऑफर के तौर पर शुरुआती निवेशकों को 100 रुपये का मुफ्त क्रिप्टोकरेंसी देने का वादा कर रही हैं. बता दें कि बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बेसल समिति (Basel Committee) ने कहा है कि बिटकॉइन (Bitcoin) जैसी क्रिप्टोकरंसी (Cryptocurrency) बैंकों के लिए अतिरिक्त और उच्च जोखिम पैदा करती है और एक नए कंजरवेटिव प्रूडेंशियल ट्रीटमेंट के अधीन होगी. क्रिप्टोकरंसी को वित्तीय स्थिरता के लिए एक जोखिम के रूप में देखा जाता है, क्योंकि मनी लॉन्ड्रिंग और कीमतों में अस्थिरता की उनकी क्षमता के कारण चूक हो सकती है और बैंकों को भारी नुकसान हो सकता है. 

नए प्रूडेंशियल मानदंडों के तहत बैंकों को अपने पास मौजूद किसी भी क्रिप्टोकरंसी के जोखिम को कवर करने के लिए अधिक पूंजी अलग रखने की आवश्यकता होगी. यह बैंकों के जमाकतार्ओं और अन्य वरिष्ठ लेनदारों को नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक है, जो इन परिसंपत्तियों की कीमतों में अचानक क्रैश के कारण हो सकता है जो अक्सर होता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इन डिजिटल मुद्राओं की कीमतों में व्यापक रूप से उतार-चढ़ाव के कारण बैंकिंग प्रणाली का सामना करने वाले उच्च जोखिम को भी हरी झंडी दिखाई है. आरबीआई ने तो वास्तव में क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन तब सुप्रीम कोर्ट ने इन संपत्तियों के सीमित उपयोग की अनुमति देने के लिए हस्तक्षेप किया था. बेसल समिति के प्रस्ताव आरबीआई के लिए एक शॉट के रूप में आते हैं क्योंकि सरकार इन जोखिम भरी डिजिटल मुद्राओं पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून पर काम कर रही है. बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बेसल समिति (बीसीबीएस) बैंकों के प्रूडेंशियल रेगुलेशन के लिए प्राथमिक वैश्विक मानक निर्धारक है और बैंकिंग पर्यवेक्षी मामलों पर नियमित सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करती है. इसके 45 सदस्यों में 28 क्षेत्राधिकारों के केंद्रीय बैंक और बैंक पर्यवेक्षक शामिल हैं.

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First Published : 14 Jul 2021, 11:56:26 AM

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