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साल 2019 में सत्ता में आए तो राफेल डील के दोषियों को दिलाएंगे सजा: राहुल गांधी

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के जवाब देने के बाद राहुल गांधी ने सदन में कहा मैं रक्षा मंत्री को इस सौदे के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा रहा बल्कि मेरा सीधा आरोप पीएम मोदी पर है

News Nation Bureau | Edited By : Kunal Kaushal | Updated on: 04 Jan 2019, 05:04:35 PM
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फोटो- ANI)

नई दिल्ली:

राफेल डील पर आज भी संसद में गर्मागर्मी जारी है. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के जवाब देने के बाद राहुल गांधी ने सदन में कहा मैं रक्षा मंत्री को इस सौदे के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा रहा बल्कि मेरा सीधा आरोप पीएम मोदी पर है कि आखिर अनिल अंबानी की पार्टी को सरकार ने कैसे डील में ऑफसेट पार्टनर बनाया गया. राहुल ने पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा फाइटर जेट के दाम किसी गोपनीय समझौता का हिस्सा नहीं है. मेरा सवाल यह है कि इस डील में अनिल अंबानी कैसे शामिल हुए और उन्हें इसमें शामिल करने का फैसला किसने किया.

राहुल गांधी ने फाइटर जेट की कीमत पर सवाल उठाते हुए पूछा, 526 करोड़ रुपये का जहाज अगर 1600 करोड़ रुपये में खरीदा जाता है क्या ये गलत सवाल है कि ये क्यों खरीदा गया? मोदी सरकार पर एक के बाद एक सवाल दागते हुए राहुल ने कहा, क्या ये गलत सवाल है कि हिंदुस्तान में इंडस्ट्री बननी चाहिए लेकिन आपने दूसरे देश में बना दी है?

उन्होंने कहा, यदि 2019 में सत्ता में आये तो इस मामले की आपराधिक जांच होगी और जो लोग इसके लिये जिम्मेदार होंगे उनको सजा दिलवायी जायेगी.

उन्होंने कहा कि लोकसभा बुधवार को उस सौदे पर चर्चा की गवाह बनीं, जिसपर प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षर किए थे.

उन्होंने कहा, "आपने देखा कि सरकार ने मुख्य सवालों के जवाब देने से इनकार कर दिया. अरुण जेटली ने मुख्य सवालों के जवाब नहीं दिए. प्रधानमंत्री जो इस मामले के आरोपी हैं, ने सदन की चर्चा से भागने का विकल्प चुना." राहुल ने कहा कि जेटली ने उन्हें सवालों के जवाब देने के बजाए गाली दी. 

राहुल ने कहा, "यहां मौलिक प्रश्न यह है कि इस मामले में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच होनी चाहिए. सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि राफेल मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है.

राहुल ने कहा कि देश के नौजवान प्रधानमंत्री पर सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने कहा, "जेट फाइटर की कीमत 526 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1600 करोड़ रुपये करने का फैसला किसने किया? यह निर्णय किसका था? क्या यह वायुसेना, रक्षा मंत्रालय या प्रधानमंत्री का निर्णय था? हम स्पष्ट जवाब चाहते हैं." 

राहुल ने कहा कि महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या रक्षा मंत्रालय ने सौदे के किसी भी चीज पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा, "क्या रक्षा मंत्रालय के पास ऐसे दस्तावेज हैं, जो इस सौदे का विरोध करते हैं? उन्हें कहना चाहिए कि कोई आपत्ति नहीं जताई गई. लेकिन अगर आपत्तियां हैं, तो फिर प्रधानमंत्री किस आधार पर सवालों को गैरजरूरी बता रहे हैं." 

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय वायुसेना 126 लड़ाकू विमान चाहती थी, लेकिन सरकार ने केवल 36 विमान ही खरीदे. क्या ऐसा करते समय राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में विचार किया गया था?

उन्होंने आरोप लगाया कि इस ऑफसेट सौदे में एक निजी संस्था को 30,000 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया गया. उन्होंने कहा कि विमान के निर्माण का अनुबंध एचएएल के पास होना चाहिए था, लेकिन सरकार द्वारा खरीदे जा रहे विमानों का निर्माण फ्रांस में किए गए.

उन्होंने कहा, "एचएएल को बाहर रखने का फैसला किसने किया? यह नरेंद्र मोदी का पैसा नहीं है. यह आपका पैसा है."कांग्रेस नेता ने दावा किया कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा है कि मोदी ने 'यह स्पष्ट कर दिया था' कि लड़ाकू जेट विमान खरीद सौदा तभी होगा, जब ऑफसेट ठेका निजी कंपनी को दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि सीतारमण को यह बताना चाहिए कि क्या मोदी ने विमानों के विनिर्माण से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को अलग किया था.

First Published : 04 Jan 2019, 04:12:15 PM

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