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केंद्र का पलायन पर सख्त रुख, सीमाएं सील करने के साथ घर खाली कराने वालों पर कार्रवाई के निर्देश

केंद्र ने राज्यों को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की भी हरी झंडी दे दी है, जो विद्यार्थियों और मजदूरों से घर खाली करने को कह रहे हैं.

By : Nihar Saxena | Updated on: 29 Mar 2020, 02:48:56 PM
Migrants

जो मजदूरों से खाली करा रहे घर उन पर होगी कार्रवाई. (Photo Credit: न्यूज स्टेट)

highlights

  • पलायन और शहरों में लोगों के बाहर घूमने-फिरने पर केंद्र की त्यौरियां चढ़ीं.
  • विद्यार्थियों और मजदूरों से घर खाली कराने वालों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश.
  • शहरों से लोगों के पलायन पर लॉकडाउन का उद्देश्य फेल होता दिख रहा है.

नई दिल्ली:

कोरोना वायरस (Corona Virus) के खिलाफ जंग के तहत लगाए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) के बावजूद मजदूरों के पलायन और शहरों में लोगों के बाहर घूमने-फिरने पर केंद्र सरकार ने त्यौरियां चढ़ा ली हैं. इसके तहत केंद्र ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के 'मन की बात' कार्यक्रम के बाद राज्यों को ऐसे लोगों पर रोक लगाने को कहा है. इसके साथ ही केंद्र ने यह निर्देश भी दिए हैं कि पलायन पर आमादा मजदूरों के लिए उनके कार्यस्थल पर ही सारी सुविधाएं जुटा कर दी जाएं. इसमें मजदूरों के वेतन-भत्ते भी शामिल हैं. इसके साथ ही केंद्र ने राज्यों को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई (Strict Action) की भी हरी झंडी दे दी है, जो विद्यार्थियों और मजदूरों से घर खाली करने को कह रहे हैं.

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संवेदनहीनता से उपजा घर वापसी का 'संकल्प'
गौरतलब है कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ाई में देश भर में लॉकडाउन की घोषणा की थी. इसके अगले ही दिन से दिल्ली समेत देश के बड़े शहरों में पढ़ाई करने और दो वक्त की रोटी कमाने आए मजदूरों में बेचैनी साफ देखी जा रही थी. इस वर्ग का संयम अंततः टूट गया और वह दसियों हजार की संख्या में सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने-अपने घरों की ओर पैदल ही निकल लिए. पता चला कि इसकी प्रमुख वजह यही थी कि रोजगार पर ताला पड़ने से उनके समक्ष जिंदा रहने का तो सवाल खड़ा ही हो गया था. इसके साथ ही उनके मालिकों ने वेतन-भत्ते देने से इंकार कर दिया था, तो मकान मालिकों ने उन्हें घर खाली करने का फतवा जारी कर दिया था. ऐसे में इनके पास घर वापसी के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचा था.

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लॉकडाउन पर पानी फिरता देख केंद्र सख्त
लॉकडाउन के उद्देश्य पर पानी फिरता और पलायन की स्थिति पर केंद्र सरकार का सख्त रुख अंततः सामने आ ही गया. केंद्र सरकार ने कहा है कि लॉकडाउन का पालन करवाना जिलाधिकारी और एसपी की जिम्मेदारी है. केंद्र सरकार की तरफ से आदेश दिया गया है कि सभी राज्यों और जिलों की सीमाएं सील कर दी जाएं और बाहर से आने वाले लोगों को सीमाओं पर ही कैंपों में रखा जाए. केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि काम करने आने वाले मजदूरों के रहने का इंतजाम किया जाए और उनको समय से भुगतान किया जाए. सरकार ने कहा कि आदेश को न मानने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी.

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लोगों के रहने-खाने का प्रबंध हो
केंद्र सरकार ने कहा है कि शहरों से लोगों को हाइवे पर आने से रोका जाए. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने लॉकडाउन का फैसला किया लेकिन शहरों से लोगों के पलायन के चलते यह लॉकडाउन फेल होता दिखा. शनिवार से दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में भारी भीड़ देखी गई. वहीं कई लोग पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए निकल पड़े. केंद्र सरकार ने कहा है कि लोग हाइवे पर न निकलें और जहां हैं वहीं रहें. सरकार ने राज्यों को आदेश दिया है कि लोगों के खाने और रहने का प्रबंध किया जाए.

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पीएम मोदी ने मांगी क्षमा
दरअसल अगर यह खतरनाक वायरस गांवों तक पहुंचता है तो गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है. देश में कोरोना मरीजों की संख्या 1000 के करीब पहुंच गई है वहीं अब तक 25 लोगों की मौत हो गई है. इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में लोगों से पूरे देश में लागू लॉकडाउन का पालन करने के लिए कहा, जिसे कोविड-19 से लड़ने के लिए लागू किया गया है. इसके साथ ही उन्होंने वायरस की रोकथाम के लिए ऐसे कठोर कदम उठाने के लिए देशवासियों से माफी भी मांगी. उन्होंने 'सामाजिक दूरी बढ़ाने और भावनात्मक दूरी घटाने' पर जोर दिया. लॉकडाउन के उल्लंघन की घटनाओं का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि लॉकडाउन प्रत्येक व्यक्ति और उसके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा के लिए है और अगर यह वायरस फैल गया तो इस पर काबू पाना मुश्किल होगा.

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First Published : 29 Mar 2020, 02:11:25 PM