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CAA Protest: क्या दंगाईयों की संपत्ति जब्त कर सकती है सरकार, जानें कानून

कुलदीप सिंह | Edited By : Kuldeep Singh | Updated on: 20 Dec 2019, 01:56:01 PM
लखनऊ में प्रदर्शनकारियों ने ओबी वैन में लगाई आग

नई दिल्ली:  

नागरिकता संशोधन एक्ट (Citizenship Amendment Act) को लेकर पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारी इस कानून के विरोध में हिंसक विरोध (Violent Protest) प्रदर्शन भी कर रहे हैं. असल से शुरू हुआ यह बवाल अब उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात जैसे राज्यों में हुए विरोध प्रदर्शन में सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति (Public And Government Properties) को नुकसान पहुंचाया गया है. गुरुवार को लखनऊ में हुए विरोध प्रदर्शन में भी सार्वजनिक संपत्ति का जबरदस्त नुकसान हुआ.

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लखनऊ में हुए प्रदर्शन के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने हिंसक विरोध प्रदर्शन पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. उन्होंने साफ कहा है कि हिंसा करने वाले दंगाइयों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई प्रदर्शनकारियों की संपत्ति से की जाएगी. सीएम ने कहा है कि उपद्रवियों से सख्ती से निपटा जाएगा. प्रदर्शन के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी. दंगाइयो से निपटने के लिए योगी सरकार ने कड़ी कार्रवाई की बात कही है. अब ऐसे में सवाल है कि अक्सर विरोध प्रदर्शनों में सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति का नुकसान होता है. क्या सरकार नुकसान की भरपाई के लिए उपद्रव करने वालों से इसकी कीमत वसूल कर सकती है?

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क्या दंगाइयों सरकार वसूल सकती है नुकसान की कीमत
इस संबंध में सार्वजनिक संपत्ति नुकसान रोकथाम अधिनियम 1984 है. इसमें इस बात का प्रावधान दिया गया है कि सरकार दोषी को 5 साल तक की सजा दे सकती है. इसके अलावा जुर्माने का भी प्रावधान है. दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ सजा और जुर्माने दोनों की सजा दी जा सकती है. इस कानून के अनुसार सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति का नुकसान पहुंचाने के दोषी को तब तक जमानत नहीं मिल सकती, जब तक कि वो नुकसान की 100 फीसदी भरपाई नहीं कर देता है. इस बारे में इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 425 में प्रावधान है. सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति के नुकसान पर सेक्शन 425 में विस्तार से बताया गया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने जारी की है गाइडलाइंस
सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी गंभीरता से लिया है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में गाइडलाइंस जारी कर चुका है. 2007 में सार्वजनिक संपत्ति के भीषण नुकसान की खबरों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था. उस दौरान हिंसक विरोध प्रदर्शन, बंद और हड़ताल में सरकारी संपत्ति का खूब नुकसान हुआ था. ऐसे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने गाइडलाइंस में सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान होने की स्थिति में सारी जिम्मेदारी नुकसान के आरोपी पर डाली है. गाइडलाइंस के मुताबिक अगर सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान होता है तो कोर्ट ये मानकर चलती है कि नुकसान का आरोपी इसका जिम्मेदार है. आरोपी को खुद को निर्दोष साबित करना होता है. निर्दोष साबित होने तक कोर्ट उसे जिम्मेदार मानकर चलती है. नरीमन कमिटी ने कहा था कि ऐसे मामलों में दंगाइयों से सार्वजिनक संपत्ति के नुकसान की वसूली की जाए.

First Published : 20 Dec 2019, 01:52:55 PM

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