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कंगाल पाकिस्तान पूरा तो चीन का बड़ा हिस्सा ब्रह्मोस की रेंज में, हुआ स्वदेशी मिसाइल का सफल परीक्षण

'मेक इन इंडिया' नीति का नतीजा है कि 500 किलोमीटर तक की बढ़ी हुई रेंज के साथ स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल का उन्नत संस्करण तैयार है.

News Nation Bureau | Edited By : Nihar Saxena | Updated on: 08 Jul 2019, 07:46:53 AM
अब भारत की सैन्य क्षमता और बढ़ गई है.

अब भारत की सैन्य क्षमता और बढ़ गई है.

highlights

  • 500 किमी की बढ़ी रेंज के साथ स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल का उन्नत संस्करण तैयार.
  • सुखोई सरीखे आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ भी परीक्षण किया गया.
  • मामूली फेरबदल के साथ मिसाइल की सीमा को और भी बढ़ाना संभव.

नई दिल्ली.:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' नीति रंग ला रही है. इस नीति का नतीजा है कि 500 किलोमीटर तक की बढ़ी हुई रेंज के साथ स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल का उन्नत संस्करण तैयार है. यही नहीं, तकनीक में मामूली फेरबदल के साथ इस मिसाइल की सीमा को भी बढ़ाना संभव है, क्योंकि भारत अब मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का एक हिस्सा है. यह जानकारी ब्रह्मोस एरोस्पेस के सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने दी.

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सुखोई संग किया गया सफल परीक्षण
रविवार को एक चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा, ''भारत ने दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के 'वर्टिकल डीप डाइव संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है और अब हम पारंपरिक युद्ध की गतिशीलता बदल सकते हैं. 500 किलोमीटर तक की बढ़ी हुई रेंज के साथ स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल का उन्नत संस्करण तैयार है." गौरतलब है कि इस स्वदेशी मिसाइल का सुखोई सरीखे आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ भी परीक्षण किया जा चुका है.

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रूस के पास भी नहीं मौजूद यह तकनीक
सैन्य सूत्रों के मुताबिक ब्रह्मोस के इन उन्नत संस्करणों को 40 से अधिक सुखोई विमानों में लैस किया जाएगा. सुधीर मिश्रा के मुताबिक ब्रह्मोस मिसाइल का भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 विमान से परीक्षण किये जाने के बाद लड़ाकू विमानों पर लंबी दूरी की मिसाइलों को एकीकृत करने वाला भारत दुनिया में एकमात्र देश है. गौरतलब है कि ब्रह्मोस एरोस्पेस द्वारा विकसित की गई तकनीकें इससे पहले भारत या रूस में मौजूद नहीं थीं.

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First Published : 08 Jul 2019, 07:46:53 AM