News Nation Logo

बिरसा मुंडा: अंग्रेजी शासन के खात्मे का एलान करने करनेवाले योद्धा की जयंती पर 15 नवंबर को देश भर में मनेगा जनजातीय गौरव दिवस

बिरसा मुंडा: अंग्रेजी शासन के खात्मे का एलान करने करनेवाले योद्धा की जयंती पर 15 नवंबर को देश भर में मनेगा जनजातीय गौरव दिवस

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 14 Nov 2021, 12:25:01 PM
Bira Munda

(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

रांची: झारखंड की राजधानी रांची से 66 किलोमीटर दूर खूंटी जिले में जंगलों-पहाड़ियों से घिरा एक गांव है- उलिहातू। 15 नवंबर 1875 को इसी गांव में जन्मे बिरसा मुंडा ने ऐसी क्रांति का बिगुल फूंका था, जिसमें झारखंड के एक बड़े इलाके ने अंग्रेजी राज के खात्मे और अबुआ राइज यानी अपना शासन का एलान कर दिया था। इन्हीं बिरसा मुंडा की जयंती पर इस 15 नवंबर को पहली बार पूरा देश जनजातीय गौरव दिवस मनायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिये गये निर्णय के बाद इसकी घोषणा की गयी थी।
बिरसा मुंडा ने जिस क्रांति का एलान किया था, उसे झारखंड की आदिवासी भाषाओं में उलगुलान के नाम से जाना जाता है। 1899 में उलगुलान के दौरान उनके साथ हजारों लोगों ने अपनी भाषा में एक स्वर में कहा था-दिकू राईज टुन्टू जना-अबु आराईज एटेजना। इसका अर्थ है, दिकू राज यानी बाहरीराज खत्म हो गया, और हमलोगों का अपना राज शुरू हो गया। बिरसा मुंडा ऐसे अप्रतिम योद्धा थे, जिन्हें लोग भगवान बिरसा मुंडा के रूप में जानते हैं। बहुत कम लोगों को पता है कि बिरसा मुंडा के उलगुलान से घबरायी ब्रिटिश हुकूमत ने खूंटी जिले की डोंबारी बुरू पहाड़ी पर जालियांवाला बाग जैसा बड़ा नरसंहार किया था।

बिरसा मुंडा जब स्कूल के छात्र थे, तभी उन्हें यह बात समझ आ गयी थी कि ब्रिटिश शासन के चलते आदिवासियों की परंपरागत व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो रही है। उन्होंने विरोध की आवाज बुलंद की तो 1890 में उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने गांव-गांव घूमकर आदिवासी समाज को अपने अधिकारों के लिए जागरूक करना शुरू किया। आदिवासी सरदार उनके नेतृत्व में एकजुट हुए तो अंग्रेजों की पुलिस ने वर्ष 24 अगस्त 1895 को चलकद गांव से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इतिहास के दस्तावेजों के अनुसार 19 नवंबर 1895 को भारतीय दंड विधान की धारा 505 के तहत उन्हें दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनायी गयी। 30 नवंबर 1897 को जब वे जेल से बाहर आये तो खूंटी और आस-पास के इलाकों में एक बार फिर मुंडा आदिवासी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एकजुट हो गये। बिरसा मुंडा ने 24 दिसंबर, 1899 को उलगुलान का ऐलान कर दिया। घोषणा कर दी गयी कि जल, जंगल, जमीन पर हमारा हक है, क्योंकि यह हमारा राज है। जनवरी 1900 तक पूरे मुंडा अंचल में उलगुलान की चिंगारियां फैल गईं। 9 जनवरी, 1900 को हजारों मुंडा तीर-धनुष और परंपरागत हथियारों के साथ डोम्बारी बुरू पहाड़ी पर इकट्ठा हुए। इधर गुप्तचरों ने अंग्रेजी पुलिस तक मुंडाओं के इकट्ठा होने की खबर पहले ही पहुंचा दी थी।

अंग्रेजों की पुलिस और सेना ने पहाड़ी को चारों ओर से घेर लिया। दोनों पक्षों में भयंकर युद्ध हुआ। हजारों की संख्या में आदिवासी बिरसा के नेतृत्व में लड़े। अंग्रेज बंदूकें और तोप चला रहे थे और बिरसा मुंडा और उनके समर्थक तीर बरसा रहे थे। डोंबारी बुरू के इस युद्ध में हजारों आदिवासी बेरहमी से मार दिये गये। स्टेट्समैन के 25 जनवरी, 1900 के अंक में छपी खबर के मुताबिक इस लड़ाई में 400 लोग मारे गये थे। कहते हैं कि इस नरसंहार से डोंबारी पहाड़ी खून से रंग गयी थी। लाशें बिछ गयी थीं और शहीदों के खून से डोंबारी पहाड़ी के पास स्थित तजना नदी का पानी लाल हो गया था। इस युद्ध में अंग्रेज जीत तो गये, लेकिन विद्रोही बिरसा मुंडा उनके हाथ नहीं आए।

इसके बाद 3 फरवरी 1900 को रात्रि में चाईबासा के घने जंगलों से बिरसा मुंडा को पुलिस ने उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वे गहरी नींद में थे। उन्हें खूंटी के रास्ते रांची ले आया गया। उनके खिलाफ गोपनीय ढंग से मुकदमे की कार्रवाई की गयी। उनपर मेजिस्ट्रेट डब्ल्यू एस कुटुस की अदालत में उनपर मुकदमा चला। कहने को बैरिस्टर जैकन ने बिरसा मुंडा की वकालत की, लेकिन यह दिखावा था। उन्हें रांची जेल में बंद कर भयंकर यातनाएं दी गयीं। एक जून को अंग्रेजों ने उन्हें हैजा होने की खबर फैलायी और 9 जून की सुबह जेल में ही उन्होंने आखिरी सांस ली। उनकी लाश रांची के मौजूदा डिस्टिलरी पुल के पास फेंक दी गयी थी। इसी जगह पर अब उनकी समाधि बनायी गयी है।

बिरसा मुंडा ने जिस रांची जेल में प्राण त्यागे, उसे अब बिरसा मुंडा स्मृति संग्रहालय के रूप में विकसित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को भोपाल से इसका ऑनलाइन लोकार्पण करेंगे।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 14 Nov 2021, 12:25:01 PM

For all the Latest India News, Download News Nation Android and iOS Mobile Apps.