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अवैज्ञानिक वृक्षारोपण के खिलाफ बीएचयू के वैज्ञानिक ने दी चेतावनी

अवैज्ञानिक वृक्षारोपण के खिलाफ बीएचयू के वैज्ञानिक ने दी चेतावनी

IANS | Edited By : IANS | Updated on: 12 Jul 2021, 11:15:01 AM
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(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक और नदी अभियंता ने उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाए जाने के बावजूद, बाढ़ के खतरे को बढ़ाने वाले पेड़ों के अवैज्ञानिक रोपण के खिलाफ चेतावनी दी है।

प्रोफेसर यू.के.चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में उनसे संबंधित अधिकारियों को बाढ़ क्षेत्रों में अवैज्ञानिक वृक्षारोपण के प्रति सावधान करने का अनुरोध किया है।

चौधरी ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा, प्रकृति मनुष्य के शरीर में और विभिन्न प्राणियों में विशिष्ट स्थान पर खास उद्देश्य के लिए विशिष्ट तरीके से बाल प्रदान करती है। इसकी वृद्धि उस स्थान की आंतरिक और बाहरी स्थितियों पर शरीर और विशिष्ट उद्देश्यों के लिए आधारित होती है।

इसी तरह, नदी के शरीर में वृक्षारोपण जहां हम बाढ़ के मैदान या बेसिन में रहते हैं, के लिए मिट्टी (शरीर रचना), उसके रूप और स्थान (आकृति विज्ञान) और भूजल और सतही जल (गति की) की सीमा स्थितियों के विशिष्ट ज्ञान की आवश्यकता होती है। अगर बाढ़ के मैदानों में वृक्षारोपण के मामले में इन शर्तों को पूरा नहीं किया जाता है, तो परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि नदी के बाढ़ के मैदानों में वृक्षारोपण या तो अवसादन या कटाव को बढ़ा सकता है और नदी के आकारिकी और गतिशीलता में भारी बदलाव का कारण बन सकता है।

उन्होंने चेतावनी दी, यह बाढ़ की ऊंचाई के आयाम को बढ़ा सकता है और भूमि के विशाल क्षेत्रों के क्षरण का कारण बन सकता है। इस प्रकार, गलत स्थानों पर वृक्षारोपण बाढ़ और घूमने को तेज कर सकता है।

इसके अलावा शहर के किनारे के पहले भाग में वृक्षारोपण को भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

मसलन, वाराणसी में नगवा से दशाश्वमेध घाट तक गंगा के घाटों पर गाद के जमाव में वृक्षारोपण तेज होगा।

ऐसा इसलिए है क्योंकि यह क्षेत्र अपसारी धाराओं के क्षेत्र में मौजूद है।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

First Published : 12 Jul 2021, 11:15:01 AM

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